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Delhi NCR News: इलाज के लिए तरसे मासूम, माता-पिता ने सरकार से लगाई गुहार
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- ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से पीड़ित बच्चों के इलाज, दवाइयों और आर्थिक मदद की मांग को लेकर दिल्ली में जुटे परिवार
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (डीएमडी) से पीड़ित बच्चों के माता-पिता ने सरकार से इलाज और जीने का हक मांगा है। देश के विभिन्न हिस्सों से आए इन परिवारों ने दिल्ली में एकजुट होकर अपनी समस्याएं उठाईं। उन्होंने सरकार से बच्चों के लिए बेहतर जिंदगी सुनिश्चित करने की अपील की है।
इन परिवारों ने इलाज, जरूरी दवाइयां और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि बीमारी के इलाज और देखभाल पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बच्चों का इलाज कराना मुश्किल हो रहा है। डीएमडी एक आनुवंशिक बीमारी है, जिससे मांसपेशियां समय के साथ कमजोर होती जाती हैं। इससे बच्चों को चलने-फिरने और रोजमर्रा के काम करने में परेशानी होती है। माता-पिता ने मुफ्त या कम खर्च में इलाज, नियमित फिजियोथेरेपी और मासिक पेंशन की मांग की है। उन्होंने प्रशिक्षित देखभाल करने वाले कर्मचारी उपलब्ध कराने की भी अपील की।
इलाज में तेजी और शोध की मांग
सेव अवर चिल्ड्रन इनिशिएटिव के वरिष्ठ सदस्य अखिलेश त्रिपाठी ने कहा कि माता-पिता अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए दिल्ली में एकत्र हुए हैं। उन्होंने विदेशों में उपलब्ध जरूरी दवाइयों को भारत में लाने की मांग की। त्रिपाठी ने बताया कि बच्चों की फिजियोथेरेपी पर प्रतिदिन करीब 400 रुपये तक खर्च होता है। यह खर्च उठाना कई परिवारों के लिए कठिन है।
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अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (डीएमडी) से पीड़ित बच्चों के माता-पिता ने सरकार से इलाज और जीने का हक मांगा है। देश के विभिन्न हिस्सों से आए इन परिवारों ने दिल्ली में एकजुट होकर अपनी समस्याएं उठाईं। उन्होंने सरकार से बच्चों के लिए बेहतर जिंदगी सुनिश्चित करने की अपील की है।
इन परिवारों ने इलाज, जरूरी दवाइयां और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि बीमारी के इलाज और देखभाल पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बच्चों का इलाज कराना मुश्किल हो रहा है। डीएमडी एक आनुवंशिक बीमारी है, जिससे मांसपेशियां समय के साथ कमजोर होती जाती हैं। इससे बच्चों को चलने-फिरने और रोजमर्रा के काम करने में परेशानी होती है। माता-पिता ने मुफ्त या कम खर्च में इलाज, नियमित फिजियोथेरेपी और मासिक पेंशन की मांग की है। उन्होंने प्रशिक्षित देखभाल करने वाले कर्मचारी उपलब्ध कराने की भी अपील की।
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इलाज में तेजी और शोध की मांग
सेव अवर चिल्ड्रन इनिशिएटिव के वरिष्ठ सदस्य अखिलेश त्रिपाठी ने कहा कि माता-पिता अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए दिल्ली में एकत्र हुए हैं। उन्होंने विदेशों में उपलब्ध जरूरी दवाइयों को भारत में लाने की मांग की। त्रिपाठी ने बताया कि बच्चों की फिजियोथेरेपी पर प्रतिदिन करीब 400 रुपये तक खर्च होता है। यह खर्च उठाना कई परिवारों के लिए कठिन है।
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