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इनेलो का समस्त भारतीय पार्टी से समझौता
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Tue, 25 Mar 2014 04:00 PM IST
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एक कार्यक्रम में मंगलवार को हरियाणा की समस्त भारतीय पार्टी ने इंडियन नेशनल लोकदल को समर्थन देने का ऐलान किया।
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इस मौके पर इनेलो के सीनियर लीडर विधायक अभय चौटाला, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा और सभापा की कार्यकारिणी के सदस्य मौजूद थे। इस दौरान सभापा ने इनेलो प्रत्याशियों के चुनाव का प्रचार करने का भी ऐलान किया।
इस मौके पर आयोजित एक प्रेस वार्ता में सभापा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुदेश अग्रवाल ने कहा कि उनकी पार्टी ने इनेलो को चार महत्वपूर्ण मसलों पर समर्थन दिया है। चारों ही मुद्दे सूबे के हित में हैं।
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उन्हाेंने बताया कि एक पत्र लिखकर सबसे पहले बीजेपी से समझौते की बात कही गई थी। उधर से कोई लिखित जवाब नहीं आया। लेकिन इनेलो को पत्र लिखने पर तेजी से घटनाक्रम बदला और दोनों पार्टियां इन मुददों पर सहमत हो गईं। कार्यक्रम के दौरान चारों मुददों को लेकर दोनों पार्टियों के बड़े नेताओं ने समझौता पत्र पर हस्ताक्षर भी किए।
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इस मौके पर अभय चौटाला ने कहा कि उनके राजनीतिक जीवन में पहली बार दो दलों में लिखित समझौता हो रहा है। उन्हाेंने इसे अच्छी परंपरा की शुरुआत बताते हुए कहा कि इससे एक दूसरे के प्रति दायित्व और जवाबदेही का बोध बना रहेगा।
उन्होंने सुदेश अग्रवाल की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने सही समय पर इनेलो का साथ देने का सच्चा फैसला लिया है। वह चाहते हैं कि चुनाव के बाद भी दोनों पार्टियों का साथ बना रहे। यहां उल्लेखनीय है कि इस लोकसभा चुनाव में सभापा ने अपने उम्मीदवार नहीं उतारे हैं।
प्रेस कान्फ्रेंस में इनेलो के प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा, पार्टी के लोकसभा उम्मीदवार जाकिर हुसैन और सभापा की प्रदेश अध्यक्ष नीलम अग्रवाल भी मौजूद थे। इस दौरान पटौदी से कांग्रेस के पूर्व विधायक भूपेंद्र चौधरी ने इनेलो में शामिल होने का ऐलान किया। उनका अभय चौटाला ने हरी पगड़ी बांधकर पार्टी में स्वागत किया।
समझौते के चार बिंदु
1. केंद्र में बनने वाली नई सरकार से एसवाईएल का पुराना मुद्दा सुलझाने में मदद।
2. प्रदेश सरकार पर ८० हजार करोड़ कर्ज है। अगले पांच सालों तक इसके ब्याज की वसूली रोककर उससे बचने वाले 14 हजार करोड़ रुपये प्रदेश के विकास पर खर्च करने में केंद्र सरकार का साथ लेने।
3. सूबे में फोर लेन सड़कों का विस्तार।
4.हरियाणा में केंद्र के तमाम लंबित प्रोजेक्ट को नई सरकार के सहयोग से अगले पांच सालों में पूरे करना।