भाजपा सरकार के लिए दोहरी मुसीबत बनी 'वाड्रा की जमीन'
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हरियाणा में नई सरकार के सत्ता में आते ही रॉबर्ट वाड्रा का मामला फिर से तूल पकड़ने लगा है। विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल इंडियन नेशनल लोकदल ने मंगलवार को वाड्रा के जमीन से संबंधित मामले को सदन में उठाया।
बता दें कि प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद से वाड्रा जमीन खरीद-फरोख्त का मामला उठ रहा है। इस पर कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश सरकार को जनता ने बहुमत दिया है, उन्हें कुछ सकारात्मक काम करना चाहिए। लगता है कि सरकार के पास सिर्फ वाड्रा ही मुद्दा है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकार जो वादे करके सत्ता में आई है, उन्हें पूरा करना चाहिए, न कि असल मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाने का काम करना चाहिए।
दोतरफा घिरी सरकार
भले ही वाड्रा के नाम पर भले ही सियासत हो रही हो, मगर गुड़गांव के शिकोहरपुर में जिस प्लॉट के साथ उनका नाम जुड़ा है, वहां किसी प्रकार की सरगर्मी नहीं है। इस प्लॉट को लोग 'वाड्रा वाली जमीन' के नाम से भी जानते हैं।
प्रशासन ने वहां कोई सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम नहीं किए हैं। गौरतलब है कि वाड्रा पर आरोप है कि उन्होंने शिकोहपुर गांव में राजस्थान के किसान की जमीन को खरीदने के बाद उसका सीएलयू करा डीएलएफ को बेच दिया। यह जमीन साढे़ चार एकड़ की है। इसकी रजिस्ट्री दो करोड़ पांच लाख रुपये में हुई। बाद में वाड्रा ने इसे 58 करोड़ में डीएलएफ को बेच दिया।
कांग्रेस नेत्री आशा शर्मा ने कहा प्रदेश सरकार बदले की भावना के साथ काम कर रही है। सरकार को किसी मामले में लगता है कि कुछ गलत हुआ है तो वह उसकी जांच कराए। यह उसका कर्त्तव्य भी है। मगर बदले वाली भावना से है तो कांग्रेस को ही लाभ होगा।
भाजपा जिला महामंत्री कुलभूषण भारद्वाज ने कहा, "भाजपा सरकार किसी प्रकार से बदले की भावना से काम नहीं करेगी। अगर वाड्रा ने गलत किया है तो कानून अपना काम करेगा। इसमें सरकार किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करेगी। भाजपा सरकार प्रदेश में विकास और सुशासन देने का काम करेगी।