इंद्रेश कुमार बोले: जिनकी अपनी मातृभूमि पर सांस फूलती है उन्हें जहन्नुम में भी जगह नहीं मिलती, किया जनजागरण
इंद्रेश कुमार ने गालिब सभागार में आयोजित समारोह में कहा कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने 20 साल की विजय गाथा संपन्न की है। इसके लिए उन्होंने मंच से जुड़े कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को बधाई दी।
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मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने शुक्रवार को अपना 21वां स्थापना दिवस मनाया। मंच के संरक्षक व आरएसएस के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने इस दौरान कहा कि अपने देश की सरजमीं पर जिनकी सांस फूलती है और यहां रहने में बेचैनी का एहसास होता है, उन्हें जहन्नुम में भी जगह नसीब नहीं होती।
उन्होंने इशारों में देश के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ बुद्धिजीवी वर्ग के लोग कहतेे हैं कि इस देश में मुसलमानों में बेचैनी और असुरक्षा का भाव है, जबकि इस देश का मुसलमान हिंदुस्तानी था, हिंदुस्तानी है और हिंदुस्तानी ही रहेगा। उसे अपने देश से बेहद प्यार है और उसको यहां कोई डरा नहीं सकता।
इंद्रेश कुमार ने गालिब सभागार में आयोजित समारोह में कहा कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने 20 साल की विजय गाथा संपन्न की है। इसके लिए उन्होंने मंच से जुड़े कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को बधाई दी। राष्ट्रवाद की पाठशाला चलाई और जन जागरण किया। उन्होंने बताया कि 24 दिसंबर 2002 को 15-20 लोगों के साथ मुस्लिम राष्ट्रीय मंच बनाया गया था। नेशन फर्स्ट, नेशन आलवेज, नेशन लास्ट की सोच के साथ यह आगे बढ़ा। लोग जुड़ते गए और वतन से मोहब्बत, इसकी इज्जत और कुर्बानी का जज्बा पैदा किया। आज यह मंच न सियासी है, न मजहबी, बल्कि खुदा की खुदाई बन गया है।
इस मंच से जुड़े लोगों को यह पता है कि आदमी को जन्नत या जहन्नुम उसके मजहब, जाति, जुबान, पैसा, शिक्षा से नहीं मिलती, बल्कि अच्छे काम और किरदार से जन्नत मिलती है। मुस्लिम मंच नारी के सम्मान का तहरीक बनकर उभरा है। इस मौके पर डॉ. इमरान चौधरी, डॉ. शाहिद अख्तर, मो. अफजाल अंसारी, डॉ. माजिद तालीकोटी, बिललुर्रहमान और मंच संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे मो. साबरीन उपस्थित थे।