{"_id":"5ed87f6b8ebc3e907d0839d5","slug":"indian-scientists-develops-new-technique-for-corona-test-to-get-faster-results","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कोरोना टेस्ट के लिए भारतीय वैज्ञानिकों की नई तकनीक तैयार, 2-3 दिन में 50 हजार सैंपल की हो सकेगी जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना टेस्ट के लिए भारतीय वैज्ञानिकों की नई तकनीक तैयार, 2-3 दिन में 50 हजार सैंपल की हो सकेगी जांच
Thu, 04 Jun 2020 10:28 AM IST
प्राची प्रियम
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
Published by: प्राची प्रियम
Updated Thu, 04 Jun 2020 10:28 AM IST
सार
- तेज जांच करने में सक्षम होगा नया तरीका, टीई बफर तकनीक पर काम होगा।
- टीई बफर तकनीक के जरिए आरटी पीसीआर का मोडिफाईड तरीका निकाला।
- हैदराबाद के वैज्ञानिकों का अध्ययन आया सामने, टीई तकनीक पर किया है काम।
- आरटी-पीसीआर की तुलना में 40 फीसदी सस्ती, 20 फीसदी ज्यादा प्रभावी।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कोरोना वायरस को लेकर भारत को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। अभी तक दुनिया भर में वायरस की जांच के लिए आरटी पीसीआर को ही सबसे भरोसेमंद माना जा रहा था, लेकिन अब भारतीय वैज्ञानिकों ने जांच का एक और तरीका ईजाद कर लिया है। पहली बार एक ऐसी तकनीक को विकसित किया गया है जिसके जरिए वायरस का फैलाव कम समय और कम खर्च में पता लगाया जा सकता है।
इसे दुनिया की सबसे तेज जांच भी बताया जा रहा है। हैदराबाद स्थित सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलीक्यूलर बॉयोलॉजी (सीसीएमबी-सीएसआईआर) के वैज्ञानिकों ने आरएनए जांच के लिए आरटी पीसीआर की मोडिफाईड तकनीक का पता लगा लिया है।
टीई बफर तकनीक के जरिए आरटी पीसीआर की जांच में करीब आधा समय ही लगता है। वर्तमान में एक सैंपल की आरटी पीसीआर जांच के लिए करीब दो से तीन घंटे लैब में लग जाते हैं। यह नई तकनीक न सिर्फ 40 फीसदी सस्ती पड़ेगी, बल्कि 20 फीसदी ज्यादा प्रभावी परिणाम भी मिल सकते हैं।
विज्ञापन
सीसीएमबी के निदेशक डॉ. राकेश मिश्रा ने बताया कि इस तकनीक से जुड़ी तमाम जानकारी आईसीएमआर को भेजी जाएगी, जिसके बाद इस पर आगे काम शुरू होगा। हालांकि इस तकनीक का इस्तेमाल मरीज की जांच में न करते हुए बड़े स्तर पर वायरस का पता लगाने के लिए किया जा सकता है।
इसमें भी गले और नाक से स्वैब लेने के बाद उनका आरएनए परीक्षण किया जाता है। दिल्ली आईसीएमआर के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इस प्रोजेक्ट पर काफी तेजी से काम चल रहा है। अगले एक से डेढ़ सप्ताह में इस प्रोजेक्ट पर फैसला लिया जा सकता है।
विज्ञापन
इसे दुनिया की सबसे तेज जांच भी बताया जा रहा है। हैदराबाद स्थित सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलीक्यूलर बॉयोलॉजी (सीसीएमबी-सीएसआईआर) के वैज्ञानिकों ने आरएनए जांच के लिए आरटी पीसीआर की मोडिफाईड तकनीक का पता लगा लिया है।
विज्ञापन
टीई बफर तकनीक के जरिए आरटी पीसीआर की जांच में करीब आधा समय ही लगता है। वर्तमान में एक सैंपल की आरटी पीसीआर जांच के लिए करीब दो से तीन घंटे लैब में लग जाते हैं। यह नई तकनीक न सिर्फ 40 फीसदी सस्ती पड़ेगी, बल्कि 20 फीसदी ज्यादा प्रभावी परिणाम भी मिल सकते हैं।
विज्ञापन
सीसीएमबी के निदेशक डॉ. राकेश मिश्रा ने बताया कि इस तकनीक से जुड़ी तमाम जानकारी आईसीएमआर को भेजी जाएगी, जिसके बाद इस पर आगे काम शुरू होगा। हालांकि इस तकनीक का इस्तेमाल मरीज की जांच में न करते हुए बड़े स्तर पर वायरस का पता लगाने के लिए किया जा सकता है।
इसमें भी गले और नाक से स्वैब लेने के बाद उनका आरएनए परीक्षण किया जाता है। दिल्ली आईसीएमआर के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इस प्रोजेक्ट पर काफी तेजी से काम चल रहा है। अगले एक से डेढ़ सप्ताह में इस प्रोजेक्ट पर फैसला लिया जा सकता है।
इसे यूं भी समझा जा सकता है कि दिल्ली या मुंबई जैसे शहर के एक घनी आबादी वाले क्षेत्र में करीब 50 हजार सैंपल लेकर वायरस के फैलाव का पता लगाना है तो हर सैंपल को एक बारकोड देते हुए टीई तकनीक से आरएनए परीक्षण किया जा सकता है। इस तकनीक में महज दो से तीन दिन में ही 50 हजार सैंपल की रिपोर्ट मिल सकती है।
सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. शेखर मांडे का कहना है कि बड़े स्तर पर जांच करने के लिए इस तकनीक के इस्तेमाल पर काम चल रहा है। अगले आठ से 10 दिन में इसे लेकर और सटीक आकलन सामने आ जाएगा। एक साथ 40 से 50 हजार सैंपल की जांच हो सकती है।
40 मरीजों पर किया गया अध्ययन
तेलंगना के सिंकदराबाद स्थित गांधी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल आए 40 मरीजों के दो तरह से सैंपल लिए गए। नाक और गले से दो-दो बार सैंपल लेने के बाद एक को वीटीएम में 4 डिग्री तापमान पर रखा गया। जबकि दूसरे सैंपल को ड्राई तरीके से रखा गया है।
पहले 14 मरीजों के सैंपल पर जांच की गई, और इसके बाद 26 मरीजों के सैंपल पर। 14 में से 9 पॉजिटिव सैंपल मिले थे, जबकि पांच निगेटिव मिले। आरटी पीसीआर के अलावा टीई बफर तकनीक दोनों से सैंपल की जांच की गई, जिसमें टीई बफर तकनीक से कम समय में आरएनए को अलग करते हुए जल्दी कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई।
इधर आरटी लैंप और फेलूदा भी सस्ती किट तैयार
सीएसआईआर के अनुसार कोरोना वायरस की जांच को लेकर वैज्ञानिक नई नई किट पर काम कर रहे हैं। अभी जम्मू के वैज्ञानिकों ने आरटी लैंप और दिल्ली में फेलूदा किट बनाई है जो करीब 500 रुपये से कम कीमत में उपलब्ध होगी।
टाटा और रिलायंस कंपनी से इन किट्स के निर्माण को लेकर करार किया है। जल्द ही इन्हें बाजार में उपलब्ध कराया जा सकेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कोरोना वायरस जांच की कीमत 50 से 60 फीसदी कम हो सकती है।
सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. शेखर मांडे का कहना है कि बड़े स्तर पर जांच करने के लिए इस तकनीक के इस्तेमाल पर काम चल रहा है। अगले आठ से 10 दिन में इसे लेकर और सटीक आकलन सामने आ जाएगा। एक साथ 40 से 50 हजार सैंपल की जांच हो सकती है।
40 मरीजों पर किया गया अध्ययन
तेलंगना के सिंकदराबाद स्थित गांधी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल आए 40 मरीजों के दो तरह से सैंपल लिए गए। नाक और गले से दो-दो बार सैंपल लेने के बाद एक को वीटीएम में 4 डिग्री तापमान पर रखा गया। जबकि दूसरे सैंपल को ड्राई तरीके से रखा गया है।
पहले 14 मरीजों के सैंपल पर जांच की गई, और इसके बाद 26 मरीजों के सैंपल पर। 14 में से 9 पॉजिटिव सैंपल मिले थे, जबकि पांच निगेटिव मिले। आरटी पीसीआर के अलावा टीई बफर तकनीक दोनों से सैंपल की जांच की गई, जिसमें टीई बफर तकनीक से कम समय में आरएनए को अलग करते हुए जल्दी कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई।
इधर आरटी लैंप और फेलूदा भी सस्ती किट तैयार
सीएसआईआर के अनुसार कोरोना वायरस की जांच को लेकर वैज्ञानिक नई नई किट पर काम कर रहे हैं। अभी जम्मू के वैज्ञानिकों ने आरटी लैंप और दिल्ली में फेलूदा किट बनाई है जो करीब 500 रुपये से कम कीमत में उपलब्ध होगी।
टाटा और रिलायंस कंपनी से इन किट्स के निर्माण को लेकर करार किया है। जल्द ही इन्हें बाजार में उपलब्ध कराया जा सकेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कोरोना वायरस जांच की कीमत 50 से 60 फीसदी कम हो सकती है।