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Delhi NCR News: 20 साल बाद फिर दुनिया के पैरा खिलाड़ियों की मेजबानी की तैयारी कर रहा भारत
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2029 वर्ल्ड एबिलिटीस्पोर्ट गेम्स के लिए भारत ने पेश की दावेदारी
पीसीआई और सीपीएसएफआई के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर, चेन्नई और भुवनेश्वर संभावित मेजबान शहर
सनी सिंह
नई दिल्ली। भारत अब केवल अंतरराष्ट्रीय खेलों में पदक जीतकर अपनी पहचान नहीं बना रहा बल्कि दुनिया के प्रतिष्ठित खेल आयोजनों की मेजबानी के लिए दावेदारी भी पेश कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में देश ने खेल के बुनियादी ढांचे, आयोजन क्षमता और खिलाड़ियों के प्रदर्शन के दम पर वैश्विक मंच पर कई कीर्तिमान हासिल किये हैं। इसी कड़ी में अब भारत ने एक और कदम उठाते हुए 2029 वर्ल्ड एबिलिटीस्पोर्ट गेम्स की मेजबानी की तैयारी शुरू कर दी है।
पीसीआई और सीपीएसएफआई ने बुधवार को 2029 वर्ल्ड एबिलिटीस्पोर्ट गेम्स की मेजबानी के लिए संयुक्त रूप से बोली लगाने के उद्देश्य से एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए। अगर भारत को मेजबानी मिलती है तो दुनिया के विभिन्न देशों से करीब 1,500 खिलाड़ी, टीम अधिकारी, तकनीकी प्रतिनिधि, क्लासिफायर और सपोर्ट स्टाफ भारत पहुंच सकेंगे। इस तरह का आयोजन न केवल भारत की संगठनात्मक क्षमता का प्रदर्शन करेगा बल्कि दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए समावेशी खेल संस्कृति को बढ़ावा देने और देश को वैश्विक पैरा स्पोर्ट्स हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा।
इस बहु-खेल प्रतियोगिता की मेजबानी के लिए फिलहाल चेन्नई और भुवनेश्वर पर विचार किया जा रहा है। दोनों शहरों के खेल बुनियादी ढांचे, दिव्यांग अनुकूल सुविधाओं, आवास, परिवहन, सुरक्षा और राज्य सरकारों के सहयोग का विस्तृत आकलन किया जाएगा। इसके बाद शहर का चयन कर विश्व एबिलिटीस्पोर्ट के समक्ष प्रस्तावित किया जाएगा।
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प्रस्तावित खेलों में पैरा एथलेटिक्स, पैरा स्विमिंग, पैरा बैडमिंटन, पैरा फेंसिंग, सीपी फुटबॉल, पैरा टेबल टेनिस और तीन-ए-साइड व्हीलचेयर बास्केटबॉल जैसी प्रतियोगिताएं शामिल होंगी। आयोजन का उद्देश्य केवल पदक जीतना नहीं बल्कि खेलों के माध्यम से समावेशिता और दिव्यांगजनों की भागीदारी को बढ़ावा देना भी है।
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बीते एक दशक में भारत में पैरा खेलों ने काफी प्रगति की है। 2029 वर्ल्ड एबिलिटीस्पोर्ट गेम्स की मेजबानी देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। इससे भारतीय खिलाड़ियों को घरेलू मैदान पर विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धा का मौका मिलेगा। -देवेंद्र झाझरिया, अध्यक्ष पीसीआई
यह साझेदारी केवल एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित करने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए बेहतर खेल ढांचा तैयार करना, तकनीकी विशेषज्ञता विकसित करना, प्रशिक्षित स्वयंसेवकों का नेटवर्क बनाना और अधिक से अधिक युवाओं को पैरा खेलों से जोड़ना है। -राजेश तोमर, अध्यक्ष सीपीएसएफआई
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2009 के बाद फिर मौका
भारत ने आखिरी बार 2009 में बेंगलुरु में आईडब्ल्यूएएस वर्ल्ड गेम्स की सफल मेजबानी की थी। करीब दो दशक बाद देश फिर से विश्वस्तरीय पैरा बहु-खेल प्रतियोगिता की मेजबानी का प्रयास कर रहा है। अगर बोली सफल रहती है तो यह भारतीय पैरा खेलों के इतिहास का एक नया अध्याय साबित हो सकता है।
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ये होंगे फायदे
दिव्यांगजनों के बीच खेलों के प्रति जागरूकता और भागीदारी बढ़ेगी।
भारत की वैश्विक खेल आयोजक के रूप में पहचान और मजबूत होगी।
दिव्यांग अनुकूल खेल सुविधाओं और बुनियादी ढांचे का विस्तार होगा।
खेल पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
भारतीय पैरा खिलाड़ियों को घरेलू मैदान पर विश्वस्तरीय प्रतियोगिता खेलने का अवसर मिलेगा।
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पीसीआई और सीपीएसएफआई के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर, चेन्नई और भुवनेश्वर संभावित मेजबान शहर
सनी सिंह
नई दिल्ली। भारत अब केवल अंतरराष्ट्रीय खेलों में पदक जीतकर अपनी पहचान नहीं बना रहा बल्कि दुनिया के प्रतिष्ठित खेल आयोजनों की मेजबानी के लिए दावेदारी भी पेश कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में देश ने खेल के बुनियादी ढांचे, आयोजन क्षमता और खिलाड़ियों के प्रदर्शन के दम पर वैश्विक मंच पर कई कीर्तिमान हासिल किये हैं। इसी कड़ी में अब भारत ने एक और कदम उठाते हुए 2029 वर्ल्ड एबिलिटीस्पोर्ट गेम्स की मेजबानी की तैयारी शुरू कर दी है।
पीसीआई और सीपीएसएफआई ने बुधवार को 2029 वर्ल्ड एबिलिटीस्पोर्ट गेम्स की मेजबानी के लिए संयुक्त रूप से बोली लगाने के उद्देश्य से एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए। अगर भारत को मेजबानी मिलती है तो दुनिया के विभिन्न देशों से करीब 1,500 खिलाड़ी, टीम अधिकारी, तकनीकी प्रतिनिधि, क्लासिफायर और सपोर्ट स्टाफ भारत पहुंच सकेंगे। इस तरह का आयोजन न केवल भारत की संगठनात्मक क्षमता का प्रदर्शन करेगा बल्कि दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए समावेशी खेल संस्कृति को बढ़ावा देने और देश को वैश्विक पैरा स्पोर्ट्स हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा।
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इस बहु-खेल प्रतियोगिता की मेजबानी के लिए फिलहाल चेन्नई और भुवनेश्वर पर विचार किया जा रहा है। दोनों शहरों के खेल बुनियादी ढांचे, दिव्यांग अनुकूल सुविधाओं, आवास, परिवहन, सुरक्षा और राज्य सरकारों के सहयोग का विस्तृत आकलन किया जाएगा। इसके बाद शहर का चयन कर विश्व एबिलिटीस्पोर्ट के समक्ष प्रस्तावित किया जाएगा।
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प्रस्तावित खेलों में पैरा एथलेटिक्स, पैरा स्विमिंग, पैरा बैडमिंटन, पैरा फेंसिंग, सीपी फुटबॉल, पैरा टेबल टेनिस और तीन-ए-साइड व्हीलचेयर बास्केटबॉल जैसी प्रतियोगिताएं शामिल होंगी। आयोजन का उद्देश्य केवल पदक जीतना नहीं बल्कि खेलों के माध्यम से समावेशिता और दिव्यांगजनों की भागीदारी को बढ़ावा देना भी है।
बीते एक दशक में भारत में पैरा खेलों ने काफी प्रगति की है। 2029 वर्ल्ड एबिलिटीस्पोर्ट गेम्स की मेजबानी देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। इससे भारतीय खिलाड़ियों को घरेलू मैदान पर विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धा का मौका मिलेगा। -देवेंद्र झाझरिया, अध्यक्ष पीसीआई
यह साझेदारी केवल एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित करने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए बेहतर खेल ढांचा तैयार करना, तकनीकी विशेषज्ञता विकसित करना, प्रशिक्षित स्वयंसेवकों का नेटवर्क बनाना और अधिक से अधिक युवाओं को पैरा खेलों से जोड़ना है। -राजेश तोमर, अध्यक्ष सीपीएसएफआई
2009 के बाद फिर मौका
भारत ने आखिरी बार 2009 में बेंगलुरु में आईडब्ल्यूएएस वर्ल्ड गेम्स की सफल मेजबानी की थी। करीब दो दशक बाद देश फिर से विश्वस्तरीय पैरा बहु-खेल प्रतियोगिता की मेजबानी का प्रयास कर रहा है। अगर बोली सफल रहती है तो यह भारतीय पैरा खेलों के इतिहास का एक नया अध्याय साबित हो सकता है।
ये होंगे फायदे
दिव्यांगजनों के बीच खेलों के प्रति जागरूकता और भागीदारी बढ़ेगी।
भारत की वैश्विक खेल आयोजक के रूप में पहचान और मजबूत होगी।
दिव्यांग अनुकूल खेल सुविधाओं और बुनियादी ढांचे का विस्तार होगा।
खेल पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
भारतीय पैरा खिलाड़ियों को घरेलू मैदान पर विश्वस्तरीय प्रतियोगिता खेलने का अवसर मिलेगा।