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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Incense sticks, spices and cleaning chemicals are increasing pollution in the house.

Delhi NCR News: अगरबत्ती, छौंक और क्लीनिंग केमिकल्स से घर में बढ़ रहा प्रदूषण

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 07 Feb 2026 09:58 PM IST
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आईपीसीए और एसआईई की रिसर्च के मुताबिक, सुबह 6-9 और रात में 9-12 बजे तक रहता है ज्यादा प्रदूषण
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-इनडोर हवा में पीएम 2.5 और वीओसी का स्तर चिंताजनक
संवाद न्यूज एजेंसी

नई दिल्ली। अगर आप सोचते हैं कि घर के अंदर रहकर या स्कूल-कॉलेज बंद कर, वर्क फ्रॉम होम करके आप प्रदूषण से बच सकते हैं तो यह गलत है। हाल के शोध में सामने आया है कि जहरीली हवा सिर्फ बाहर ही नहीं, बल्कि घर के भीतर भी लोगों को बीमार कर रही है। दरअसल, इनडोर प्रदूषण कई मामलों में बाहर की हवा से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन (आईपीसीए) और सोसायटी फॉर इनडोर एन्वायरमेंट (एसआईई) की रिसर्च के मुताबिक, घर के भीतर पीएम 2.5 यानी बेहद सूक्ष्म धूल के कणों का स्तर सुबह छह से नौ और रात नौ से बारह बजे के बीच सबसे ज्यादा होता है। यह बाहर की हवा से 15 से 30 प्रतिशत अधिक होता है। साथ ही, कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) और वॉलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स (वीओसी) जैसे अदृश्य प्रदूषक भी इनडोर हवा को नुकसान पहुंचा रहे हैं।


शोध में यह भी सामने आया कि इनडोर प्रदूषण के मुख्य कारणों में घर की सीलन, खिड़कियों का कम होना और खाना बनाते समय छौंक लगाना है। इसके अलावा, सफाई के दौरान धूल का उड़ना, क्लीनिंग केमिकल्स का इस्तेमाल, मच्छर भगाने की अगरबत्ती और पूजा के दौरान धूप-अगरबत्ती का धुआं शामिल है। शोध में पाया गया कि शहरी इलाकों में 54 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में 17 प्रतिशत घरों में इनडोर हवा की गुणवत्ता चिंता का कारण बनी हुई है। इनडोर हवा के पीएम 2.5, सीओ2 और वीओसी के अत्यंत सूक्ष्म कण सांस के माध्यम से शरीर में प्रवेश करते हैं। लंबे समय तक इनका संपर्क टीबी, अस्थमा, कैंसर और यहां तक कि समयपूर्व मौत का कारण भी बन सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जबकि कई देशों में इनडोर वायु प्रदूषण के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बन चुके हैं, देश में अभी तक इस दिशा में कोई ठोस गाइडलाइन नहीं बनाई गई है।
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