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यादव सिंह के खास ‘भाई साहब’ तक CBI जांच

Sat, 26 Sep 2015 10:33 AM IST
Updated Sat, 26 Sep 2015 10:33 AM IST
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in yadav singh case CBI inquiry reached to 'Bhai sahab'

नोएडा प्राधिकरण के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह की सीबीआई जांच अब उनके खासमखास रहे ‘भाई साहब’ की तरफ बढ़ रही है। जांच एजेंसी ने नोएडा प्राधिकरण से ‘भाई साहब’ व उनकी पत्नी के नाम पर दर्ज संपत्तियों का भी ब्योरा मांग लिया है।

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सीबीआई का पत्र नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को मिला है, जिसे तुरंत संपत्ति से जुड़े विभागों को भेज दिया गया। जांच एजेंसी ने प्राधिकरण से ‘भाई साहब’ व पत्नी के नाम दर्ज आवासीय, औद्योगिक व व्यावसायिक, हर तरह की संपत्तियों का ब्योरा उपलब्ध कराने को कहा है।

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पत्र मिलने के बाद प्राधिकरण ने सभी संबंधित अधिकारियों से इसकी रिपोर्ट शीघ्र तैयार करने का निर्देश दिया गया है। सीबीआई के पत्र के बाद से हलचल काफी बढ़ गई है। इसकी चर्चा भी शुरू हो गई है कि आने वाले दिनों में सीबीआई की जांच राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं तक पहुंच सकती है।
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‘भाई साहब’ नोएडा प्राधिकरण में सहायक के पद पर थे

in yadav singh case CBI inquiry reached to 'Bhai sahab'

प्राधिकरण सूत्रों के मुताबिक, ‘भाई साहब’ नोएडा प्राधिकरण में सहायक के पद पर थे। बसपा सरकार आते ही उनकी तूती बोलने लगी। 2002 के करीब ‘भाई साहब’ ने नौकरी छोड़ दी।


बसपा शासनकाल में न सिर्फ नोएडा, बल्कि ग्रेटर नोएडा, यमुना प्राधिकरण उनके इशारे पर चलते रहे। टेंडर से लेकर आवंटन तक उनका हस्तक्षेप रहा। यादव सिंह की अब तक की जांच के आधार पर ‘भाई साहब’ से लिंक मिलने के कारण सीबीआई ने उनकी संपत्तियों का ब्योरा मांगा है।

यादव सिंह को नोएडा प्राधिकरण से अब तक करीब 70 लाख रुपये वेतन के रूप में मिले हैं। प्राधिकरण ने सीबीआई को यह जानकारी भेजी है। प्राधिकरण के मुताबिक, यादव सिंह ने 1980 में बतौर अवर अभियंता नोएडा प्राधिकरण में तैनात हुए।

उस समय अवर अभियंताओं का वेतन 400-500 रुपये के करीब थे। इसके बाद यादव सिंह 1985 में सहायक परियोजना अभियंता, 1995 में परियोजना अभियंता और 1997 में वरिष्ठ परियोजना अभियंता बने।

सीबीआई कर रही 954 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच

in yadav singh case CBI inquiry reached to 'Bhai sahab'

2002 में मुख्य अनुरक्षण अभियंता और 2011 में इंजीनियर इन चीफ बने। पदोन्नति के साथ ही वेतन में वृद्धि भी हुई, लेकिन 2006 में नया वेतनमान लागू होने के बाद ही इंजीनियरों के वेतन में सुधार हुआ और वेतन 50 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक पहुंचा था।

मौजूदा समय में चीफ इंजीनियर का वेतन करीब 1.10 लाख रुपये, परियोजना अभियंता का वेतन 90 हजार से एक लाख रुपये, सहायक अभियंता का वेतन 80 से 90 हजार और पुराने अवर अभियंताओं का मौजूदा वेतन 70 से 80 हजार रुपये के करीब है।

सीबीआई 954 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच गहनता से कर रही है। घोटाले से जुड़े उन छोटे टेंडरों का ब्योरा भी सीबीआई ने मांगा है, जिनकी कीमत पांच लाख रुपये से भी कम है जबकि अब तक इस घोटाले से जुड़े उन्हीं टेंडरों का ब्योरा लिया था, जिनकी कीमत पांच लाख रुपये से अधिक थी। अब इससे कम कीमत के टेंडरों को भी सीबीआई खंगाल रही है। बता दें कि बसपा शासनकाल में भूमिगत केबल समेत कई कामों के एवज में यह घोटाला होने की बात सामने आई थी।

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