BS-3 और 4 डीजल बसों की एंट्री पर रोक: खराब श्रेणी में पहुंची दिल्ली की वायु, लगाई गईं नई पाबंदियां
Delhi Air Pollution: बस मालिकों का कहना है कि प्रदूषण में सबकी भागीदारी है, ऐसे में केवल बसों पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है। दिल्ली टैक्सी, टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टूर ऑपरेटर एसोसिएशन ने इस संबद्ध में उपराज्यपाल वीके सक्सेना को पत्र लिखा है।
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राजधानी में वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंच गया है। ऐसे में इससे निपटने के लिए अलग-अलग पाबंदियां लगाई जा रही हैं। इसी कड़ी में एक नवंबर से एनसीआर से दिल्ली आने वाले वाहनों में बीएस-तीन और बीएस- चार डीजल बसों की एंट्री पर रोक रहेगी। इसका असर यात्रियों की सुविधा पर दिखने को मिल सकता है। वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक, सीएनजी और बीएस-छह के अनुपालक डीजल बसों को संचालित किया जाएगा।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने घोषणा करते हुए कहा है कि एक नवंबर से केवल इलेक्ट्रिक, सीएनजी और बीएस छह-अनुपालक डीजल बसों को संचालित करने की अनुमति दी जाएगी। बता दें यह नियम निजी बसों में भी लागू होगा। परिवहन विभाग के मुताबिक उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, राजस्थान परिवहन विभाग की प्रतिदिन कई बसें चलती हैं। वहीं, निजी बसें भी रोजाना हजारों की संख्या में चलती है। ऐसे में निजी बस मालिकों ने इस नियमों को लेकर विरोध जताना शुरू कर दिया है।
बस मालिकों का कहना है कि प्रदूषण में सबकी भागीदारी है, ऐसे में केवल बसों पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है। दिल्ली टैक्सी, टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टूर ऑपरेटर एसोसिएशन ने इस संबद्ध में उपराज्यपाल वीके सक्सेना को पत्र लिखा है। जिसमें कहा गया है कि दिल्ली सरकार और सीएक्यूएम प्रदूषण के नाम पर बस मालिकों को बेरोजगार कर रही है।
उनका कहना है कि ऑल इंडिया परमिट वाली बीएस चार की बसों के मालिकों को इस संबंध में पहले सूचित नहीं किया और न ही किसी तरह की बैठक को बुलाया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट ने कहा कि इस रोक का असर राजस्थान, उत्तराखंड, यूपी, हरियाणा व पंजाब राज्यों के ट्रांसपोर्टरों पर पड़ेगा। ऐसे में काम नहीं होगा तो घर का खर्च कैसे चलेगा। सम्राट ने कहा कि बीएस-चार डीजल की गाड़ियों को बेचकर बीएस-छह डीजल की बसें खरीदें इतना पैसा नहीं है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर फिर से विचार किया जाना चाहिए।