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भजन-कीर्तन कर घर का खर्च चलाती है मां, नहीं भर पाई बेटे की फीस तो स्कूल ने काटा नाम

Thu, 27 Aug 2020 04:31 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 27 Aug 2020 04:31 PM IST
सार

  • कोरोना काल में धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन पर प्रतिबंध, कोई आय न होने से नहीं वहन कर पाई बेटे की फीस का खर्च         
  • रोहिणी के एक प्राइवेट स्कूल पर नाम काटने का आरोप, स्कूल ने छात्र को ऑनलाइन क्लास लेने से रोका

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In the pandemic situation, schools removing the names of students those are unable to pay the fees
Students in School - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

एक मां धार्मिक कार्यक्रमों में भजन-कीर्तन कर किसी तरह अपने परिवार का खर्च चलाती है। लेकिन कोरोना काल में धार्मिक आयोजनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया, तो इस मां की कमाई का साधन भी जाता रहा। आर्थिक तंगी में वह अपने बेटे की स्कूल फीस भी नहीं भर पाई। इससे नाराज होकर स्कूल ने 12वीं में पढ़ने वाले उनके बेटे देव की पहले तो ऑनलाइन क्लास पर रोक लगा दी, बाद में उसका नाम काट दिया। अब मां नेताओं के पास चक्कर लगा रही है कि किसी तरह उनके बच्चे का दोबारा से नामांकन कराया जाए और उसकी जिंदगी का महत्वपूर्ण साल खराब होने से बचा लिया जाए।

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देव की एक नजदीकी जानकार वंदना शर्मा ने अमर उजाला को बताया कि कोरोना काल में धार्मिक आयोजनों पर पूर्ण प्रतिबंध ने इस परिवार की आर्थिक स्थिति खराब कर दी है। तलाकशुदा मां के पास अब आय का कोई साधन नहीं है। वे एक कमरे के जनता फ्लैट में किसी तरह अपने बेटे देव के साथ रह रही हैं और किसी तरह कुर्ते-सलवार बेचकर अपना गुजारा कर रही हैं। लेकिन इसी तंगी में वे अपने बेटे की स्कूल फीस नहीं भर पाईं, जिससे नाराज होकर रोहिणी के प्राइवेट स्कूल ने उसका नाम काट दिया।
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वंदना शर्मा ने बताया कि देव इसी स्कूल में पहली कक्षा से लेकर अब तक पढ़ता रहा है। आज तक फीस चुकाने में कभी कोई देरी नहीं हुई है। लेकिन इस संकट के समय स्कूल ने उनकी एक नहीं सुनी और बच्चे का नाम काट दिया। स्कूल से दबाव पड़ने पर मई महीने में उन्होंने काफी प्रयास कर 4200 रुपये फीस जमा कराई थी, लेकिन स्कूल के मुताबिक़ अभी भी 45,000 रुपये फीस बकाया है। इसे चुकाने में वे पूरी तरह असमर्थ हैं।

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शिक्षा का बाजारीकरण बंद कराएं शिक्षा मंत्री

उत्तरी दिल्ली नगर निगम की पूर्व मेयर प्रीती अग्रवाल ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण मामला है कि कोरोना के संकट काल में भी स्कूल लोगों के साथ कोई सहानुभूति नहीं दिखा रहे हैं और किसी भी कीमत पर फीस वसूल रहे हैं। जो छात्र उनके यहां पहली कक्षा से लेकर आज तक पढ़ता रहा, उन्होंने उसे ऑनलाइन क्लास लेने पर रोक लगा दिया। उन्होंने कहा कि वे दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया से अपील करती हैं कि प्राइवेट स्कूलों को इस तरह की मनमानी करने पर रोक लगाएं। वे इसके लिए शिक्षा मंत्री को एक पत्र भी लिखेंगी।

तय हो स्कूल फीस के नये मानक

भारत अभिभावक संघ के अध्यक्ष प्रताप चंद्रा ने कहा कि स्कूलों की फीस स्कूल चलते रहने के दौरान उसके सभी खर्चों को मिलाकर होती है, लेकिन कोरोना संकट के कारण पिछले छह महीने से स्कूल नहीं चल रहे हैं। केवल ऑनलाइन क्लास के माध्यम से कक्षाएं चल रही हैं। ऐसे में स्कूल फीस का दोबारा निर्धारण होना चाहिए। इसके लिए वे अभिभावकों के साथ आगामी तीन सितंबर को दिल्ली सचिवालय का घेराव भी करेंगे।
 
स्कूल फीस के मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के सामने एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसकी सुनवाई न्यायमूर्ति पंकज कुमार जायसवाल और न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की अदालत में चल रही है। अदालत ने इस मामले के साथ प्राइवेट स्कूलों के एक अन्य मामले की सुनवाई करने का निर्णय लिया है जिसमें प्राइवेट स्कूलों ने यह मांग की है कि अभिभावकों को स्कूल फीस जमा करने के निर्देश दिए जाएं क्योंकि उन्हें भी शिक्षकों के वेतन सहित अन्य सेवाओं के भुगतान करने हैं।

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