दिल्ली एमसीडी उपचुनावों के ये आंकड़े AAP के लिए बन सकते हैं परेशानी, कांग्रेस के पास 'पहचान' बनाने को मौका
कांग्रेस ने उपचुनाव में अपने मत प्रतिशत को एक बार फिर 21 फीसदी से ऊपर कर लिया, जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में यह केवल 4.26 फीसदी रह गया था। यह पार्टी के लिए एक मजबूत वापसी का संकेत है...
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दिल्ली नगर निगमों के उपचुनाव में कहने के लिए तो कांग्रेस ने केवल एक सीट जीती है, लेकिन इस चुनाव परिणाम की व्याख्या कांग्रेसी खेमे में उत्साह भरने वाली है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का मत प्रतिशत केवल 4.26 फीसदी रह गया था, जो पार्टी का मनोबल तोड़ने वाला था, लेकिन इस उपचुनाव में पार्टी का मत प्रतिशत एक बार फिर तेजी से बढ़ा है और यह 21.84 फीसदी तक पहुंच गया है।
कांग्रेस को 21.84 फीसदी मत मिले
एमसीडी के 2017 के चुनाव में भी कांग्रेस ने 21 फीसदी का ही मत प्राप्त किया था। इस प्रकार अपने मतदाताओं का दुबारा भरोसा जीतना कांग्रेस के लिए उत्साहजनक संकेत लेकर आया है। हालांकि, पांच में से चार सीटें जीतने के बाद भी कांग्रेस का यह उभार अरविंद केजरीवाल को परेशान करने वाला है, जो कांग्रेस के वोट बैंक को अपने पाले में कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।
पांच सीटों के लिए हुए इस उपचुनाव में नंबर एक पर रही आम आदमी पार्टी ने 46.10 फीसदी, भाजपा ने 27.29 फीसदी और कांग्रेस ने 21.84 फीसदी मत प्राप्त किया है।
ध्यान देने वाली है कि कांग्रेस के वोटरों ने उसके पक्ष में यह वापसी ऐसे समय में की है, जहां आम आदमी पार्टी के पास अरविंद केजरीवाल का चेहरा, दिल्ली सरकार द्वारा जनता को मुफ्त बिजली, पानी जैसी योजनाओं के प्रचार का सहारा था, तो वहीं भाजपा भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम, केंद्र सरकार के काम और भारी भरकम टीम का सहयोग प्राप्त हो रहा था। दो मजबूत दावेदारों के बीच कांग्रेस के पास चौधरी अनिल कुमार के रूप में हाल ही में नियुक्त प्रदेश अध्यक्ष था, जिनके पास बताने के लिए कांग्रेस और शीला दीक्षित के विरासत के काम के अलावा और कुछ नहीं था। ऐसे में कांग्रेस की वापसी सकारात्मक सन्देश देने वाली है।
केजरीवाल ने लगाई पूरी ताकत
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार ने अमर उजाला से कहा कि शायद यह पहली बार हो रहा था कि केवल पांच सीटों के निगम स्तर के प्रचार के लिए एक प्रदेश का मुख्यमंत्री अपनी पूरी ताकत के साथ प्रचार कर रहा था, पार्टी और सरकार की पूरी ताकत का इस्तेमाल किया जा रहा था। भाजपा भी निगमों से लेकर प्रदेश की टीम और केन्द्रीय नेताओं तक का प्रयोग कर रही थी। जबकि कांग्रेस की लड़ाई पूरी तरह प्रदेश टीम और इसके कार्यकर्ताओं पर निर्भर कर रही थी। इसके बाद भी अगर हम कुछ वापसी करने में सफल रहे हैं तो यह हमारे लिए अच्छा संकेत है।
अगर आम आदमी पार्टी की सफलता को राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित किया जा रहा है तो कांग्रेस का उभार भी राष्ट्रीय उम्मीदें जगाता है। पूर्वांचल के कांग्रेस नेता चंद्रभूषण तिवारी कहते हैं कि अरविंद केजरीवाल सरकार पैसे से अपने प्रचार के बल पर झूठ का पुलिंदा बनाये हुए हैं, जबकि कांग्रेस के पास जमीनी संघर्ष को दिखाने के आलावा और कुछ नहीं है। जहां पूरा विपक्ष सत्ता के सामने मौन हो चुका है, उसी माहौल में निजी हमलों को झेलते हुए भी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की कोशिशें उस जनता के मन में उम्मीद जगाती हैं, जो केंद्र की नीतियों से गंभीर रूप से नाराज है। तिवारी को उम्मीद है कि जनता की यही नाराजगी कांग्रेस की ताकत बनेगी।
तिवारी के मुताबिक़ अगर अगर आम आदमी पार्टी ने गुजरात चुनावों में कुछ सफलता हासिल की है तो उसे प्रचार के दम पर बड़ा बताने की कोशिश हो रही है, जबकि उसी बीच कांग्रेस के हजारों उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है, जिसको उचित जगह नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि यह दोहरापन उस समय भी दिखाई पड़ा, जब पंजाब चुनावों में आम आदमी पार्टी की बुरी हालत होने के बाद भी उस पर कोई चर्चा नहीं की गई।
मुस्लिम ही नहीं अन्य समुदाय की भी कांग्रेस की ओर हुई वापसी
इन उपचुनावों में सबसे ज्यादा भारी जीत चौहान बांगर सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी जुबेर अहमद की हुई। उन्होंने कुल 16203 वोट मिले और उन्होंने अपने नजदीकी प्रतिद्वंदी को 10 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। निगम चुनाव की किसी सीट पर यह अंतर बहुत बड़ा कहा जा सकता है। यह सीट मुस्लिम बहुल है। जाहिर है कि इसे मुस्लिम मतदाताओं के कांग्रेस की तरफ मुड़ने के तौर पर देखा जा रहा है। लेकिन चौधरी अनिल कुमार का कहना है कि यह सही नहीं है। अन्य सीटों पर भी जहां केवल एक समुदाय विशेष के लोग नहीं रहते हैं, वहां भी कांग्रेस का मत प्रतिशत तेजी से सुधरा है। यह बताता है कि कांग्रेस अपने कोर मतदाताओं की ओर एक बार फिर से लौट रही है। पार्टी के लिए यह राष्ट्रीय स्तर पर एक सुकून भरा सन्देश हो सकता है।
बाकी सीटों पर भी कांग्रेस उम्मीदवारों ने दो से तीन हजार के बीच वोट हासिल किया है। ये वोट इस मामले में अहम हैं कि पिछले लोकसभा चुनाव में शीला दीक्षित की अगुवाई में लड़ी कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया था। उसने लोकसभा की ज्यादातर सीटों पर आम आदमी पार्टी को तीसरे नंबर पर धकेल दिया था, लेकिन असमय शीला दीक्षित के देहांत के बाद पार्टी यह बढ़त बरकरार नहीं रख पाई और विधानसभा चुनाव में बुरी तरह पिछड़ गई। विधानसभा चुनाव में भी उसके ज्यादातर उम्मीदवारों ने दो-तीन हजार वोट हासिल किया था। आज अगर उतना वोट केवल एक वार्ड से मिल रहा है तो इसे कांग्रेस की बेहतर होती सेहत के रूप में देखा जा सकता है।
अभी से शुरू करेंगे लड़ाई
इस चुनाव परिणाम और वोटों की बढ़त से दिल्ली कांग्रेस के युवा अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार जोश से भरे हैं। उनका कहना है कि आने वाले निगम चुनाव उनकी प्राथमिकता हैं। वे अभी से सटीक उम्मीदवारों का चयन कर उसे अपनी जमीन बनाने का भरपूर मौका देंगे। टिकट केवल उन्हीं उम्मीदवारों को दिया जाएगा जो जमीन पर पकड़ रखते हैं, जमीनी संघर्ष करते हैं और जनता के बीच स्वीकार्य हैं। यानी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का जो फार्मूला पार्टी के केन्द्रीय स्तर पर आजमाए जाने की चर्चा हो रही है, दिल्ली में उसका सफल प्रयोग शुरू हो चुका है। युवा अध्यक्ष को उम्मीद है कि पार्टी की यह सोच उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी मजबूत वापसी दिलाने में सहायक होगी जहां विपक्ष सत्ताधारी दल के सामने सोया हुआ पड़ा है।