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Delhi NCR News: ‘कूल’ दिखने की चाह में सेहत से खिलवाड़, गर्भावस्था में धूम्रपान बच्चों के लिए घातक
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र्भावस्था में धूम्रपान से बच्चों में बढ़ रहा अस्थमा और डायबिटीज का खतरा
सोनम प्रतिहस्त
नई दिल्ली। आधुनिक जीवनशैली, बदलते सामाजिक रुझान और तथाकथित ‘कूल’ दिखने की चाह ने धूम्रपान को एक फैशन ट्रेंड के रूप में पेश किया है। अब यह महिलाओं के बीच भी तेजी से अपनी जगह बना रही है। खासतौर पर शहरी इलाकों में युवतियों और कामकाजी महिलाओं में धूम्रपान की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे एक गंभीर सामाजिक और चिकित्सकीय चेतावनी मान रहे हैं, क्योंकि इसका सीधा असर न केवल महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है, बल्कि गर्भावस्था के दौरान यह आदत गर्भ में पल रहे शिशु के लिए बेहद खतरनाक है। विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान से होने वाला नुकसान तात्कालिक नहीं बल्कि दीर्घकालिक होता है। गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करने वाली महिलाओं में समय से पहले प्रसव, गर्भपात, कम वजन वाले शिशु का जन्म और नवजात मृत्यु का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा, ऐसे बच्चों में आगे चलकर कई गंभीर बीमारियों की आशंका भी सामान्य बच्चों की तुलना में अधिक रहती है।
गर्भ में बच्चे को नहीं मिल पाती ऑक्सीजन
गुरु तेग बहादुर अस्पताल के स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ दिव्या रश्मि ने बताया कि गर्भावस्था में धूम्रपान करने से सिगरेट में मौजूद निकोटिन और कार्बन मोनोऑक्साइड गर्भनाल के जरिए शिशु तक पहुंच जाते हैं। इससे गर्भ में पल रहे शिशु को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिसका नतीजा समय से पहले प्रसव और गर्भपात के रूप में सामने आते हैं। गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करने से केवल समय से पहले प्रसव और गर्भपात के अलावा बच्चों में कुछ समय के बाद डायबिटीज और मोटापा जैसी बीमारियों के होने का खतरा भी साधारण की तुलना में 30 प्रतिशत तक अधिक बढ़ जाता है। साथ ही जन्म के समय बच्चों का वजन ढ़ाई किलो से कम होने की संभावना भी बढ़ जाती है। ऐसे बच्चों में आगे चलकर अस्थमा और सांस से जुड़ी बीमारियों के होने की संभावना भी अधिक रहती है। जन्म के कुछ समय बाद मृत्यु होने की संभावना भी सामान्य से अधिक रहती है। डॉक्टर ने कहा कि गर्भवती महिलाओं को धूम्रपान करने से बचना चाहिए और बच्चे के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर नियमित योगा करते रहना चाहिए। साथ ही जिस कमरे में गर्भवती महिला हो उसमें अन्य परिजनों को भी धूम्रपान नहीं करना चाहिए। बच्चे के अच्छे विकास के पौष्टिक आहार खाना चाहिए। नियमित रूप से डॉक्टर की सलाह के अनुसार चेकअप कराते रहना चाहिए।
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सोनम प्रतिहस्त
नई दिल्ली। आधुनिक जीवनशैली, बदलते सामाजिक रुझान और तथाकथित ‘कूल’ दिखने की चाह ने धूम्रपान को एक फैशन ट्रेंड के रूप में पेश किया है। अब यह महिलाओं के बीच भी तेजी से अपनी जगह बना रही है। खासतौर पर शहरी इलाकों में युवतियों और कामकाजी महिलाओं में धूम्रपान की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे एक गंभीर सामाजिक और चिकित्सकीय चेतावनी मान रहे हैं, क्योंकि इसका सीधा असर न केवल महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है, बल्कि गर्भावस्था के दौरान यह आदत गर्भ में पल रहे शिशु के लिए बेहद खतरनाक है। विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान से होने वाला नुकसान तात्कालिक नहीं बल्कि दीर्घकालिक होता है। गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करने वाली महिलाओं में समय से पहले प्रसव, गर्भपात, कम वजन वाले शिशु का जन्म और नवजात मृत्यु का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा, ऐसे बच्चों में आगे चलकर कई गंभीर बीमारियों की आशंका भी सामान्य बच्चों की तुलना में अधिक रहती है।
गर्भ में बच्चे को नहीं मिल पाती ऑक्सीजन
गुरु तेग बहादुर अस्पताल के स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ दिव्या रश्मि ने बताया कि गर्भावस्था में धूम्रपान करने से सिगरेट में मौजूद निकोटिन और कार्बन मोनोऑक्साइड गर्भनाल के जरिए शिशु तक पहुंच जाते हैं। इससे गर्भ में पल रहे शिशु को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिसका नतीजा समय से पहले प्रसव और गर्भपात के रूप में सामने आते हैं। गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करने से केवल समय से पहले प्रसव और गर्भपात के अलावा बच्चों में कुछ समय के बाद डायबिटीज और मोटापा जैसी बीमारियों के होने का खतरा भी साधारण की तुलना में 30 प्रतिशत तक अधिक बढ़ जाता है। साथ ही जन्म के समय बच्चों का वजन ढ़ाई किलो से कम होने की संभावना भी बढ़ जाती है। ऐसे बच्चों में आगे चलकर अस्थमा और सांस से जुड़ी बीमारियों के होने की संभावना भी अधिक रहती है। जन्म के कुछ समय बाद मृत्यु होने की संभावना भी सामान्य से अधिक रहती है। डॉक्टर ने कहा कि गर्भवती महिलाओं को धूम्रपान करने से बचना चाहिए और बच्चे के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर नियमित योगा करते रहना चाहिए। साथ ही जिस कमरे में गर्भवती महिला हो उसमें अन्य परिजनों को भी धूम्रपान नहीं करना चाहिए। बच्चे के अच्छे विकास के पौष्टिक आहार खाना चाहिए। नियमित रूप से डॉक्टर की सलाह के अनुसार चेकअप कराते रहना चाहिए।
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