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आरोप-प्रत्यारोप का चला सिलसिला जब अदालत ने पूछा- बिना पुख्ता सबूत के क्यों किया अशोक को गिरफ्तार

Thu, 16 Nov 2017 07:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम Updated Thu, 16 Nov 2017 07:17 PM IST
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in ryan murder case court asked without any concrete proof
ryan international - फोटो : सुदर्शन झा

भोंडसी स्थित रायन इंटरनेशनल स्कूल में 8 सितंबर को हुए प्रद्युम्न हत्याकांड मामले में बृहस्पतिवार को आरोपी अशोक की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनी यादव की अदालत में चली। अदालत ने सुनवाई के दौरान सीबीआई व गुरुग्राम पुलिस को जमकर फटकार भी लगाई।

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मामले की सुनवाई सुबह 10 बजे शुरू हुई। सूत्रों ने बताया कि अदालत ने गुरुग्राम पुलिस के भोंडसी थाने के उस जांच अधिकारी से मामले की जानकारी ली, जिसने मामले की जांच कर अशोक की गिरफ्तारी दिखाई।
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इस मामले में अदालत ने जांच अधिकारी को जमकर फटकार लगाई। अदालत ने जांच अधिकारी से पूछा जब उनके पास अशोक के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं था तो उन्होंने अशोक को गिरफ्तार क्यों किया? सबूत जुटाने से पहले गिरफ्तारी की जल्दीबाजी क्यों की गई ?
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इस मामले में जांच अधिकारी भी पुलिस आयुक्त संदीप खिरवार की तरह अपनी बातों से पलट गए और उन्होंने अदालत में कहा कि उनकी जांच प्रारंभिक स्थिति में थी। वह आगे की जांच करते तब तक मामला सीबीआई के अधीन जा चुका था और मामले की फाइल उनसे ले ली गई थी। इस पर उन्हें अदालत ने फटकार लगाई।

बता दें कि मामले में अशोक की गिरफ्तारी के बाद पुलिस आयुक्त संदीप खिरवार ने 9 सितंबर को पत्रकारवार्ता कर कहा था कि उनकी जांच पूरी हो गई है और वे एक सप्ताह में अदालत में चार्जशीट दाखिल कर देंगे और मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलवाने की सिफारिश करेंगे।

सीबीआई के अधिकारी अदालत में जमानत के लिए जवाब तैयार करके नहीं आए

in ryan murder case court asked without any concrete proof
ryan school - फोटो : सुदर्शन झा/अमर उजाला

उधर, बृहस्पतिवार को सीबीआई के अधिकारी अदालत में पेश हुए, लेकिन वह जमानत के लिए जवाब तैयार करके नहीं आए थे। इस पर अदालत ने उन्हें फटकार लगाते हुए दोपहर 2 बजे तक जवाब दाखिल करने को कहा।

दोपहर दो बजे शुरू हुई कार्रवाई के बाद सीबीआई द्वारा अपना जवाब तो दाखिल किया साथ ही साथ एक आवेदन भी किया कि उक्त मामले की सुनवाई के लिए यह न्यायिक क्षेत्र नहीं है। इसकी सुनवाई सीबीआई अदालत में ट्रांसफर की जाए।

इस पर भी अदालत ने सीबीआई अधिकारियों को फटकार लगाई। एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि जब मामले में पोक्सो एक्ट जैसी धारा लगी हो तो उसमें न्यायिक क्षेत्र वहीं होता है जिस क्षेत्र में यह घटना हुई हो।

​आरोपी कंडक्टर पर पोक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। ऐसे में न्यायिक क्षेत्र गुरुग्राम होने के चलते मामले की सुनवाई जिला अदालत में ही चलेगी। उसके बाद आगे की तिथि तय की गई। 

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