बुधवार को एससी-एसटी आयोग के सदस्य ईश्वर सिंह के मेवात दौरे के दौरान दलित उत्पीड़न की जो तस्वीरें उभरकर सामने आई, उन्होंने सभी का दिल दहला दिया। वहां मौजूद लोग सोचने पर मजबूर हो गए कि क्या वास्तव में मेवात में ऐसा हो रहा हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
आपसी भाईचारे के लिए मशहूर मेवात की फिजां को आखिरकार क्या हुआ कि अब वहां इन शब्दों की कोई अहमियत नहीं रह गई हैं। नीमखेड़ा के पीड़ित दलित परिवार ने अपनी व्यथा बताई कि किस प्रकार उनकी जवान लड़कियों को गांव के दंबंग लोग जबरदस्ती अपनी हवस का शिकार बनाते हैं और आवाज उठाने पर अत्याचार करते हैं।
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एक महिला ने मीड़िया की उपस्थित में आयोग के सामने कहा कि उन्होंने अपनी जवान लड़कियों को गांव से बाहर अपनी रिश्तेदारियों में भेज दिया हैं ताकि उनकी इज्जत सुरक्षित रह सके। यहां से दंबंगों पर पीड़ित परिवार की एक लड़की को अगवा करने का आरोप हैं।
बाहर नहीं आऊंगी, नहीं तो मार देंगे: पुन्हाना में 1 सितंबर को शहर के बीचों-बीच से अगवा की गई एक दलित लड़की की दादी आज भी सदमे में हैं और घर की छत पर बने गुसलखाना(शौचालय) में पड़ी रहती हैं। न तो कुछ खाती हैं और न ही किसी से मिलती हैं।
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पहले दो जवान पोतों की अलग-अलग सड़क दुर्घटना में मौत और अब परिवार के सामने ही हथियार के बल पर पोती का अपहरण करने का सदमा इस कदर बैठा हुआ हैं कि उसे अपने और पराए की कोई पहचान नहीं हैं।