पूर्वी दिल्ली में कमेटी के नाम पर करोड़ों रुपये उड़ा ले गया परिवार
कृष्णा नगर इलाके में एक परिवार कमेटी के नाम पर कई लोगों के करोड़ों रुपये लेकर फरार हो गया। आरोपियों ने अपना मकान बेचने के अलावा रेस्तरां भी बंद कर दिया।
लोगों को जब इसका पता चला, तो मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पीड़ित लोग संयुक्त आयुक्त आलोक कुमार से मिले, जिसके बाद कृष्णा नगर थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर आरोपी परिवार की तलाश शुरू कर दी गई।
पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता गुरमीत व अन्य ने शिकायत में बताया कि राजू वर्मा, उसकी पत्नी मीनाक्षी और बेटी कोमल वर्मा पांच साल से इलाके में कमेटी चला रहे थे। धीरे-धीरे कई लोग इनसे जुड़ते चले गए। मौजूदा समय में 20 कमेटियों के 500 से अधिक लोग इनसे जुड़े हुए थे।
सभी कमेटियां दो हजार रुपये से 50 हजार रुपये महीने की थीं। राजू कमेटी चलाने के लिए अलावा कृष्णा नगर में अपना रेस्तरां भी चलाता था। इसके साथ ही उसने जितार नगर में घर भी खरीदा हुआ था।
गुरमीत ने बताया कि शुरुआत में तो आरोपियों ने समय पर कमेटियों का भुगतान किया, लेकिन पिछले करीब छह माह से कमेटी हर महीने लेट हो रही थी। राजू ने कमेटी के रुपयों के बदले चेक देने शुरू कर दिए थे।
कुछ चेक बाउंस हो गए। लोगों ने पैसे मिल जाने की उम्मीद से इसकी शिकायत नहीं की। इधर 28 दिसंबर को लोगों को पता चला कि राजू अपना मकान बेचकर और रेस्तरां बंद कर फरार हो गया है। मामले की शिकायत पुलिस से की गई।
बाद में संयुक्त आयुक्त से मिलकर इस संबंध में मामला दर्ज करने की गुहार लगाई गई। वरिष्ठ अधिकारियों की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
लैंड पूलिंग पॉलिसी के नाम पर लाखों की ठगी
दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने डीडीए की लैंड पूलिंग पॉलिसी के नाम पर कई लोगों से ठगी के मामले में 13 केस दर्ज किए हैं। इस मामले में कई बिल्डर, प्रमोटर और डेवलपर को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि दिल्ली में सस्ते फ्लैट का झांसा देकर आरोपियों ने कई लोगों से लाखों रुपये हड़प लिए। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने एसआईटी गठित कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
शाखा के संयुक्त आयुक्त ओपी मिश्रा ने बताया कि डीडीए ने लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत फ्लैट बनाने के लिए योजना निकाली थी। इसके तहत घर बनाने का काम शुरू नहीं हुआ है। योजना के आड़ में बिल्डरों ने लोगों को अपना घर होने का सपना दिखाना शुरू कर दिया। उनसे फ्लैट बुकिंग के नाम पर लाखों रुपये एडवांस ले लिए। लेकिन फ्लैट नहीं मिलने पर पीड़ितों ने इसकी शिकायत शाखा में की।
शिकायत की जांच में पता चला है कि आरोपियों ने लोगों के मोबाइल पर मेसेज भेजकर ठगी की वारदात को अंजाम दिया है। इन बिल्डरों ने द्वारका में चल रहे कई हाउसिंग परियोजनाओं को अपना बताया था। शक न हो इसके लिए आरोपियों ने ई विज्ञापन भी दिया था। एसआईटी की टीम अन्य पीड़ितों की पहचान करने में जुटी है।