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बदलते समय के साथ हमें भी बदलना होगाः खाप
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Sat, 03 May 2014 12:43 PM IST
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फरीदाबाद के सतरोल खाप के फैसले का फरीदाबाद तथा पलवल के जाट और गुर्जर समाज के मौजिज लोगों ने स्वागत किया है। सबने एक सुर से कहा है कि समय के अनुसार सामाजिक ताने-बाने में बुनियादी परिवर्तन बहुत जरूरी है।
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चौरासी पाल के गुर्जर नेता रणवीर सिंह चंदीला ने कहा कि समय के साथ बदलाव के फैसले स्वागत योग्य हैं। सतरोल की तरह और खापें भी जरूरी बदलाव लाएं, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियों को किसी सामाजिक समस्या का सामना न करना पड़े। मेरे विचार से थोड़ा और आगे बढ़कर समाज के अलग-अलग वर्गों को अब अंतरजातीय शादियों के लिए भी सोचना चाहिए।
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चंदीला कहते हैं कि अब हवा बदल रही है, इसलिए हमें भी बदलने में परहेज नहीं करना चाहिए। एक समय था जब हम चार-चार गोत्र बचाकर शादियां करते थे, जिसमें माता-पिता और नानी-दादी के गोत्र शामिल होते थे, लेकिन समय बदलने के साथ इस समय सिर्फ दो गोत्र बचते हैं। बदलाव समय की मांग है।
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जाट समाज फरीदाबाद के अध्यक्ष सेवानिवृत्त आईएएस जेपीएस सांगवान का कहना है कि वह व्यक्तिगत तौर पर इस फैसले के हिमायती हैं। समाज बहुत तेजी से बदल रहा है, इसलिए हालात के मुताबिक बदलाव बहुत जरूरी है। सतरोल खाप ने बदलाव का जो फैसला लिया है उससे हमारी भावी पीढ़ी को फायदा मिलेगा।
मुहिम से तीन गोत्रों में परस्पर समरसता बढ़ी
पिछले साल यहां 84 पाल में चंदीला गोत्र का नागर और अधाना गोत्र में रोटी-बेटी का रिश्ता शुरू किया गया। गुर्जर समाज के नेता रणवीर चंदीला के मुताबिक, लगभग 1,100 साल पुरानी इस परंपरा को बदलने के लिए उन्हें मुहिम चलानी पड़ी। इससे तीन गोत्रों के बीच परस्पर समरसता बढ़ गई। इससे पहले 84 पाल में चंदीला गोत्र के लोग अधाना और नागर गोत्र में तथा अधाना व नागर गोत्र के लोग चंदीला गोत्र में शादियां नहीं करते थे।
नए नियम लागू करने का समय आया: जेलदार
पलवल। 52 पालों के अध्यक्ष युद्धवीर जेलदार का कहना है कि पुराने ताने बाने को लेकर अब बदलाव की बयार बहने लगी है। सतरोल खाप और सांगवान खाप द्वारा शादी के नियमों को लेकर किए गए बदलाव इसी का हिस्सा हैं। उनका कहना है कि समय की मांग को देखते हुए पालों को पुराने नियमों में बदलाव करने की जरूरत है। समाज के साथ बैठकर कुरीतियों को दूर करने व नए नियम बनाकर लागू करने का समय आ गया है।
खाप ने पहले भी कई बार नियम बदले: डागर
डागर पाल के नेता रामजीलाल डागर का कहना है कि मौजूदा परिवेश में खाप पंचायतों ने जो परिवर्तन की मिसाल कायम की है वह नई बात नहीं है। खाप पंचायतें हमेशा से ही समाज की जरूरतों के अनुसार काम करती हैं। इससे पहले भी खाप पंचायत कई बार नियमों को बदल चुकी हैं। खाप पंचायतें हमेशा समाज के साथ चलने के लिए रीतियों को बदलती हैं। इसमें बुजुर्गों का स्वाभिमान है तो युवाओं की सोच भी नजर आ रही है।