विज्ञापन मामले में फंसी सरकार, कोर्ट ने मांगा जवाब
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली सरकार विज्ञापन मामले में फंस गई है। सरकार के अधिवक्ता ठोस जवाब नहीं दे पाए। अदालत ने उनके रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा यह गंभीर मामला है और आम लोगों के धन को इस प्रकार से इस्तेमाल की इजाजत नहीं दी जा सकती।
मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी व न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार के उस तर्क को खारिज कर दिया कि विज्ञापन देने के मुद्दे पर दिल्ली सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का कोई उल्लंघन नहीं किया।
अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया स्पष्ट है कि आप ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद पब्लिक फंड के मामले में उल्लंघन किया है।
अदालत ने सरकार को स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद दिए विज्ञापनों पर सरकार ने कितनी राशि खर्च की है। इसके अलावा विज्ञापनों पर खर्च राशि का स्रोत क्या है। अदालत ने मामले की सुनवाई 3 अगस्त तय की है।
अवमानना पर जवाब मांगा
खंडपीठ कांग्रेस नेता अजय माकन द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन कर केजरीवाल को महिमामंडित करने संबंधी विज्ञापन देकर जनता के धन को बर्बाद कर रही है।
वहीं, दूसरी तरफ विज्ञापनों में दिल्ली सरकार की अपेक्षा केजरीवाल सरकार शब्द का इस्तेमाल करने पर रोक लगाने वाली याचिका पर भी खंडपीठ ने एक साथ सुनवाई का निर्णय किया है।
खंडपीठ ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ विज्ञापन मामले में दिए गलत बयान पर अवमानना कार्रवाई करने के मुद्दे पर केजरीवाल से जवाब मांगा है।
अदालत ने कहा कि पहले जवाब आने दें फिर सुनवाई करेंगे। याचिका में आरोप लगाया गया है कि विज्ञापन मामला लंबित होने के बावजूद केजरीवाल ने कहा है कि याचिका खारिज हो गई है और अदालत ने माना है कि केजरीवाल ठीक काम कर रहे हैं।