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अब बेहतर बूथ मैनेजमेंट से ही मिलेगी दिल्ली में जीत

Thu, 05 Feb 2015 12:40 AM IST
Updated Thu, 05 Feb 2015 12:40 AM IST
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in booth management BJP and 'AAP' have tough competition.

भाजपा के सबसे बड़े स्टार कैंपेनर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रचार अभियान में वापसी के साथ कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी चुनावी मैदान से हट गए हैं। दोनों दलों के अन्य नेताओं के अलावा ‘आप’  संयोजक अरविंद केजरीवाल आज भर प्रचार करेंगे लेकिन भाजपा व ‘आप’ के बीच अभी एक और कड़ा मुकाबला चुनाव प्रबंधन को लेकर है। जानकारों का मानना है कि कड़े मुकाबले के बीच शेष दो दिनों में जिसने भी बेहतर चुनाव प्रबंधन दिखाया वह बाजी मार लेगा।

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दिल्ली विधानसभा चुनाव के तमाम सर्वे में पहले भाजपा की बढ़त दिखाने के बाद कल से ‘आप’ की बढ़त के सर्वे आए तो भाजपा के रणनीतिकारों में खलबली मच गई। इसका असर प्रधानमंत्री की रैली में उनके भाषण में भी देखने को मिला। प्रचार बृहस्पतिवार को खत्म हो जाएगा और मोदी की आज यह आखिरी चुनावी रैली इस चुनाव के लिए थी। राहुल ने भी बुधवार को रोड शो में भीड़ जुटा कर अपना शो खत्म कर दिया। अरविंद केजरीवाल ने आज भी कई रैलियां कीं और अभी वे बृहस्पतिवार को भी मैदान में होंगे।
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ऐसे में प्रचार समाप्त होने के कुछ घंटे पहले व उसके अगले 24 घंटों तक की योजना परिणाम की दिशा काफी हद तक तय करेगी। यानी चुनाव मैनेजमेंट में जो बाजी मारेगा, उसकी बढ़त तय है।
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इस स्थिति को समझते हुए ही ‘आप’ व भाजपा ने इस बार बूथ मैनेजमेंट की जबर्दस्त तैयारी की है। ऐसे में बूथ मैनेजमेंट में भी दोनों दलों के बीच कड़ा मुकाबला होगा। राजधानी में कुल 2527 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। नियमानुसार हर बूथ पर एक दल का एक ही एजेंट तैनात किया जा सकता है। लेकिन बूथ के बाहर दलों ने वोटरों को घर से लाने, पर्ची देने तक कार्यकर्ताओं को लगाया है।

कैसा है तीनों पार्टियों का बूथ मैनेजमेंट

in booth management BJP and 'AAP' have tough competition.

भाजपा ने एक मतदान केंद्र पर पांच पन्ना प्रमुख नियुक्त किए हैं, हर पन्ना प्रमुख 40-50 घरों से वोटरों को निकालने का काम शनिवार को करेगा। इनके अलावा पोलिंग स्टेशन से सौ मीटर की दूरी पर भाजपा या संघ के दो-तीन अन्य कार्यकर्ता वोटरों की पर्ची बनाने का भी काम करेंगे। ऐसे में चुनाव प्रबंधन के तहत पन्ना प्रमुखों के जरिए हर वोटर को मतदान के समय टच करने की योजना भाजपा की है।

आम आदमी पार्टी भी बूथ मैनेजमेंट में भाजपा से कोई कम योजना लेकर नहीं आई है। उसने हर पोलिंग स्टेशन पर 10 सदस्यीय कमेटी तैयार की है। इनमें हर सदस्य पर 20 से 25 घरों तक पहुंचने की जिम्मेदारी है। इसके अलावा पर्ची बनाने के लिए दो से तीन कार्यकर्ता मतदान केंद्र के बाहर बैठेंगे। यानी उसके बूथ मैनेजमेंट को संभालने की जिम्मेदारी लाखों वॉलेंटियर के दम पर है।

कांग्रेस मतदान केंद्रों पर अपने परंपरागत तरीके से भी लड़ेगी। उसने एक बूथ पर एक एजेंट के अलावा बाहर पर्ची बनाने के लिए कांग्रेस सेवा दल को भी जोड़ा है। उसके कार्यकर्ता मतदाताओं को लाने के काम में भी पूर्व की भांति जुटे रहेंगे। हालांकि पूरी कार्ययोजना को बृहस्पतिवार रात को अमली जामा पहनाया जाना है।

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