आरुषि हत्याकांड : कोर्ट ने केस में साक्ष्यों की कड़ियों को कमजोर बता कर तलवार दंपति को किया बरी
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नोएडा के चर्चित आरुषि तलवार- हेमराज हत्याकांड में हाईकोर्ट ने डॉ. राजेश और नूपुर तलवार को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर टिके इस केस में साक्ष्यों की कड़ियां इतनी मजबूत नहीं हैं कि उनके आधार पर दंपति को दोषी ठहराया जा सके। वह संदेह का लाभ पाने के हकदार हैं।
राजेश और नूपुर तलवार को विशेष सीबीआई अदालत गाजियाबाद ने हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। डा. राजेश और नुपुर तलवार ने सजा के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अलग-अलग अपीलें दाखिल की थीं।
न्यायमूर्ति बालाकृष्ण नारायण और न्यायमूर्ति अरविंद मिश्र प्रथम की पीठ ने सीबीआई कोर्ट की उस अवधारणा को खंडित कर दिया कि घटना की रात हत्याकांड वाले फ्लैट में तलवार दंपति ही मौजूद थे और बाहर से किसी तीसरे व्यक्ति के आने की संभावना नहीं है लिहाजा हत्या उन्हीं दोनों ने की है।
कोर्ट ने कहा कि घटना की रात फ्लैट में किसी तीसरे व्यक्ति के आने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। सीबीआई के पास अपनी कहानी साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। घटनाओं की तारतम्यता इतनी पुख्ता नहीं है कि उसके आधार पर तलवार दंपति को दोषी ठहराया जा सके। संदेह का लाभ देने के लिहाज से यह एकदम सही केस है।
14 मई 2008 को आरुषि अपने कमरे में मृत पाई गई थी
उल्लेखनीय है कि नोएडा के सेक्टर 25 में रहने वाले डॉ. राजेश तलवार की 14 वर्षीय बेटी आरुषि तलवार 14 मई 2008 को अपने कमरे में मृत पाई गई। इसके दो दिन बाद उनके घरेलू नौकर नेपाल के हेमराज का शव उसी फ्लैट के टेरेस पर पाया गया। पुलिस ने शुरूआत जांच में आरुषि के माता-पिता डॉ. राजेश तलवार और नुपुर तलवार को हत्या का दोषी माना।
23 मई 2008 को पुलिस ने डॉ. राजेश तलवार को गिरफ्तार कर लिया। मगर 29 मई 2008 को मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई। सीबीआई ने जांच के बाद पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के आधार पर क्लोजर रिपोर्ट लगा दी।
सीबीआई कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट खारिज करते हुए कहा कि केस चलाने केलिए पर्याप्त परिस्थितिजन्य साक्ष्य हैं। नौ फरवरी 2011 को कोर्ट ने तलवार दंपति पर आरोप तय किया और 18 महीने चली सुनवाई के बाद 26 नवंबर 2013 को दंपति को दोहरे हत्याकांड का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुना दी।