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अपहरण के झूठे मामले में माता-पिता पर केस दर्ज
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 19 Apr 2014 09:46 AM IST
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अगर कोई यह सोचे कि झूठे मामले में फंसाकर किसी को जेल की हवा खिला देगा तो यह उसकी गलतफहमी है। मामला झूठा साबित होने पर शिकायतकर्ता पर उसका ही दांव उल्टा पड़ सकता है। ऐसे ही एक मामले में अदालत ने पीड़िता के माता-पिता के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का निर्देश थाना विजय विहार पुलिस को दिया है।
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रोहिणी जिला अदालत की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. कामिनी लाऊ ने आरोपी उमेश को बरी करते हुए कहा कि पीड़िता के माता-पिता ने यह जानबूझकर किया है। लड़की के माता-पिता पुलिस को गलत जानकारी दी और आरोपियों को फंसाने की कोशिश की जबकि उनका इस मामले से कोई लेना देना नहीं था।
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पेश मामले में पीड़िता बालिग होने वाली थी और अपनी मर्जी से आरोपी के साथ भाग कर उससे शादी कर ली। उसके माता-पिता ने आरोपी व अन्य तीन लोगों के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज करवाया था। अदालत में मामला झूठा साबित हुआ है।
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पीड़िता की मां ने 24 अगस्त 2012 को आरोपी उमेश व अन्य के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज करवाया था। पुलिस ने पीड़िता को उत्तर प्रदेश के महामाया नगर से बरामद कर लिया था। पीड़िता ने सरकारी वकील से जिरह के दौरान कहा कि मेडिकल जांच के दौरान डॉक्टर को बताया कि वह अपनी मर्जी से उमेश के साथ गई थी। वह उसके करीब डेढ़ महीना पत्नी के रूप में रही और वह अपनी जांच नहीं करवाना चाहती।