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विधानसभा में सवाल-जवाब: 10 वर्ष में दिल्ली के सरकारी पोर्टल और मेले रोजगार देने में विफल, चौंका रहे कुछ आंकड़े

Thu, 03 Apr 2025 04:58 AM IST
दुष्यंत शर्मा विनोद डबास, नई दिल्ली
विनोद डबास, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 03 Apr 2025 04:58 AM IST
सार

यह खुलासा विधानसभा में भाजपा के दो विधायकों की ओर से पूछे गए प्रश्नों का दिल्ली सरकार की ओर से दिए गए जवाब में हुआ है।

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In 10 years, Delhi's government portals and fairs failed to provide employment
demo - फोटो : freepik

विस्तार

दिल्ली सरकार के रोजगार संबंधी प्रयास पिछले 10 वर्षों में असफल साबित हुए हैं। सरकार के बेरोजगारी दूर करने के लिए रोजगार पोर्टल और रोजगार मेले अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पाए। आंकड़े बताते हैं कि रोजगार सृजन की दिशा में ठोस नीतियों और प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत है। यह खुलासा विधानसभा में भाजपा के दो विधायकों की ओर से पूछे गए प्रश्नों का दिल्ली सरकार की ओर से दिए गए जवाब में हुआ है।

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दिल्ली सरकार की ओर से संचालित ऑनलाइन एम्प्लॉयमेंट पोर्टल वर्ष 2009 से कार्यरत है, लेकिन 2015 से 2024 तक इस पोर्टल के माध्यम से केवल 414 नियुक्तियां ही की गईं। चौंकाने वाली बात यह है कि वर्ष 2019 से 2023 तक एक भी नियुक्ति दर्ज नहीं हुई। वर्ष 2024 में भी केवल दो नियुक्तियां हुईं, जिससे स्पष्ट है कि यह पोर्टल बेरोजगार युवाओं के लिए कोई ठोस अवसर प्रदान करने में असफल रहा है। 
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दिल्ली सरकार ने वर्ष 2020 में एक नया रोजगार बाजार पोर्टल शुरू किया था, जिसमें रोजगार देने का दावा किया गया था, लेकिन यह पोर्टल केवल मई 2023 तक ही कार्यरत रहा और इसके बावजूद रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में कोई खास सफलता नहीं मिली। सरकार ने इस पोर्टल पर 33.85 लाख रुपये खर्च किए। वर्ष 2009 से चल रहे एम्प्लॉयमेंट पोर्टल के रखरखाव के लिए सरकार ने पांच अधिकारियों और छह अनुबंधित तकनीकी कर्मचारियों की नियुक्ति की थी। बावजूद इसके 2021 से अब तक इस पोर्टल पर 34 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी रोजगार की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।


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कोविड काल में भी बेरोजगारों को कोई राहत नहीं
दिल्ली में जब कोविड महामारी का सबसे बुरा दौर चल रहा था, उस समय रोजगार की समस्या विकराल रूप में थी। लिहाजा वर्ष 2019 से 2023 के बीच दिल्ली सरकार के एम्प्लॉयमेंट पोर्टल से एक भी व्यक्ति को नौकरी नहीं मिली। इस दौरान हजारों लोग बेरोजगार हुए, लेकिन पोर्टल महज एक कागजी औपचारिकता बनकर रह गया।

रोजगार मेलों के दावे और हकीकत
दिल्ली सरकार ने पिछले 10 वर्षों में कुल 10 रोजगार मेले आयोजित किए, जिनमें 36,062 प्रार्थियों को शॉर्टलिस्ट किया गया, लेकिन इनमें से कितने लोगों को वास्तविक रूप से नौकरी मिली, इसका कोई स्पष्ट आंकड़ा सरकार की ओर से नहीं दिया गया। सरकार ने इन रोजगार मेलों पर लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन बेरोजगारी की समस्या जस की तस बनी रही।

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