सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उपराज्यपाल को लगा बड़ा झटका, इन 10 लाइनों में तय कर दिए अधिकार
आज देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में लंबे समय से चल रही अधिकारों की जंग को लेकर फैसला सुनाया। इस फैसले से यह साफ हो गया है कि अदालत ने कुछ शर्तों के साथ मुख्यमंत्री को ही दिल्ली का बॉस माना है।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया है जिसमें उपराज्यपाल को दिल्ली का बॉस बताया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आज के फैसले में कहा है कि उपराज्यपाल को कैबिनेट की सलाह पर काम करना होगा। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अपनी अन्य टिप्पणियों से उपराज्यपाल का अधिकार क्षेत्र तय कर दिया है। पढ़ें कोर्ट ने अपने फैसले में एलजी को क्या-क्या अधिकार दिए हैं-
-उपराज्यपाल अनिल बैजल को स्वतंत्र फैसले लेने का अधिकार नहीं है और वह मंत्री परिषद की सलाह पर काम करने के लिए बाध्य हैं।
-चीफ जस्टिस मिश्रा ने अपनी टिप्पणी में कहा कि एलजी चुनी हुई सरकार के काम में अड़ंगा नहीं डाल सकते।
-अदालत ने ये भी कहा कि चुनी हुई सरकार को अपने हर फैसले से एलजी को अवगत कराना जरूरी है लेकिन ऐसा नहीं है कि हर बारे में उनकी राय लेनी जरूरी है।
पढ़ें सभी अधिकार
-लैंड, लॉ और ऑर्डर को छोड़कर दिल्ली सरकार को हर मुद्दे पर कानून बनाने का हक होगा।
-एलजी को मैकेनिकल तौर पर काम नहीं करना चाहिए और हर मामले में अड़चन पैदा नहीं करनी चाहिए।
-एलजी को फैसले लेने की स्वतंत्र शक्ति नहीं है और वह किसी मामले में अपना विरोध प्रकट कर सकते हैं और उसे राष्ट्रपति तक भी ले जा सकते हैं लेकिन हर मामले को राष्ट्रपति तक नहीं ले जा सकते। जब तक कि वो मामला कोई अपवाद न हो। राष्ट्रपति तक ले जाने से पहले उन्हें अपना विवेक इस्तेमाल कर उसे सुलझाने की कोशिश करनी होगी और जब मामला ज्यादा बड़ा हो तो राष्ट्रपति तक उसे ले जा सकते हैं।
-एलजी को मंत्री परिषद के साथ सौहार्द से काम करना होगा।
सभी रूटीन मामलों को एलजी तक ले जाना जरूरी नहीं
-अदालत ने कहा कि एलजी को याद रखना चाहिए कि मंत्री परिषद जनता के प्रति जवाबदेह है। ऐसे में एलजी को कोई भी स्वतंत्र फैसला लेने की शक्ति नहीं है।
-सभी रूटीन मामलों को एलजी को बताना या उन तक ले जाना जरूरी नहीं है।