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यूडीआईडी लागू करने के मुद्दे पर रेलवे से हाईकोर्ट ने एनपीआरडी की जनहित याचिका पर मांगा जवाब
Thu, 14 Mar 2019 03:07 AM IST
देव कश्यप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Thu, 14 Mar 2019 03:07 AM IST
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दिल्ली हाईकोर्ट
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हाईकोर्ट ने दिव्यांगों को रियायती यात्रा टिकट प्रदान करने के लिए अलग पहचान पत्र अनिवार्य करने के आदेश को रद्द करने के मुद्दे पर केंद्रीय रेल मंत्रालय से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने यह जवाब नेशनल प्लेटफार्म फॉर द राइट ऑफ द डिसेबल्ड (एनपीआरडी) की ओर से दायर जनहित याचिका पर मांगा है। याची का कहना है कि रेलवे का यह नियम यूनीक डिसेबिलिटी आईडेंटिटी कार्ड (यूडीआईडी) योजना के विरुद्घ है।
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मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति एजे भंभानी की खंडपीठ ने रेलवे को दिव्यांग जन अधिकारिता विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया कि यूडीआईडी पूरे देश में दिव्यांगों को लाभ प्रदान करने के लिए मान्य है। याचिका में कहा गया कि रेलवे को संविधान में दिए गए समानता के अधिकार तथा आरपीडी एक्ट 2016 के अंतर्गत रियायती टिकट प्रदान करने के लिए यूडीआईडी को मान्यता देने का निर्देश दिया जाए।
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याची का कहना है कि यूडीआईडी योजना शुरू होने से पहले दिव्यांग जनों को प्रत्येक योजना के लिए अलग पहचान पत्र लेना होता था। यूपीएससी के प्रत्याशियों को अलग कार्ड लेना होता था। देश के अलग-अलग विभाग व एजेंसी अपने प्रारूप के पालन का जोर देते थे।
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