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Delhi NCR News: आईआईटी सेल से बिना प्रोटीन अलग किए ड्रग और वैक्सीन की करेगा खोज
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-क्रायो ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप में क्रायो इलेक्ट्रॉन टोमोग्राफी के इस्तेमाल की तैयारी
-12 घंटे में पांच से सात हजार प्रोटीन की संरचना की मिलती है इमेज, -190 डिग्री सेल्सियस पर रखा जाता है प्रोटीन
अमर उजाला दिल्ली
नई दिल्ली। आईआईटी दिल्ली वायरस और बैक्टीरिया के सेल से बिना प्रोटीन अलग किए ड्रग और वैक्सीन विकसित करने की दिशा में खोज करेगा। इसके लिए क्रायो इलेक्ट्रॉन टोमोग्राफी तकनीक का इस्तेमाल होगा। दरअसल, बुधवार को आईआईटी में केंद्रीय अनुसंधान सुविधा (सीआरएफ) दिवस 2026 का आयोजन हुआ था। इसमें विभिन्न वैज्ञानिक उपकरणों को प्रदर्शित किया गया।
आईआईटी दिल्ली में स्थापित क्रायो ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से अभी सेल से प्रोटीन को अलग निकालकर उसके संरचना को तस्वीरों के माध्यम से समझा जाता है। लेकिन अब सेल से प्रोटीन को अलग करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आईआईटी दिल्ली के साथी फाउंडेशन की फैसेलिटी मैनेजर डॉ. किम्मी आजाद ने बताया कि क्रायो इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप में अभी -190 डिग्री सेल्सियस पर रखकर प्रोटीन की संरचना को तस्वीरों से जानते है। 12-14 घंटे में प्रोटीन की संरचना को समझने के लिए माइक्रोस्कोप पांच से सात हजार इमेज जारी करता है।
शोध में मानवीय हस्तक्षेप की संभावना कम : मशीन को तरल नाइट्रोजन की मदद से कम तापमान पर संचालित किया जाता है। किसी भी बीमारी के इलाज में ड्रग और वैक्सीन विकसित करने के लिए प्रोटीन को समझना आवश्यक है। कोविड के दौरान दवा विकसित करने में इस तरह की तकनीक का उपयोग किया गया था। देशभर में इस तरह के छह माइक्रोस्कोप अलग-अलग संस्थानों में है। इसमें आईआईटी मुंबई, मद्रास, कानपूर और दूसरे संस्थान है। यह माइक्रोस्कोप रोबोटिक ऑटो लोडर से संचालित होता है। इसमें मानवीय हस्तक्षेप बेहद कम है।
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अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधा उपलब्ध कराना लक्ष्य : उन्होंने बताया कि यह माइक्रोस्कोप बायोमॉलिक्यूल्स, प्रोटीन, वायरस, बैक्टीरिया सहित दूसरे जीव विज्ञान में मददगार है। अमेरिकी कंपनी द्वारा निर्मित माइक्रोस्कोप को करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से नीदरलैंड से वर्ष 2022 में मंगवाया गया था। अब इसका इस्तेमाल सेल से बिना प्रोटीन निकाले उसकी संरचना को समझने के लिए किया जाएगा। वहीं इस अवसर पर आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी ने कहा कि केंद्रीय अनुसंधान सुविधा का मुख्य लक्ष्य अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाएं उपलब्ध कराना और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी व स्थानीय रूप से प्रासंगिक शोध को बढ़ावा देना है। हमारा लक्ष्य आईआईटी और देशभर के शोधार्थियों और विद्यार्थियों को 24/7 अनुसंधान सुविधाओं की निर्बाध एवं सुलभ उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
यह उपकरण किए प्रदर्शित : उधर, सीआरएफ के अध्यक्ष प्रो. मणिदीपा बनर्जी ने कहा कि हमारी सभी सुविधाओं, शिक्षाजगत, उद्योग और सरकारी हितधारकों के प्रतिनिधियों को सहयोग एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक मंच पर लाते हैं। बता दें कि सीआरएफ दिवस पर क्रायो इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप, इलेक्ट्रॉन प्रोब माइक्रो एनालाइजर, फील्ड एमिशन स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप, सिंगल क्रिस्टल एक्स-रे डिफ्रेक्टोमीटर, ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप और मेडटेक उपकरणों को प्रदर्शित किया गया।
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-12 घंटे में पांच से सात हजार प्रोटीन की संरचना की मिलती है इमेज, -190 डिग्री सेल्सियस पर रखा जाता है प्रोटीन
अमर उजाला दिल्ली
नई दिल्ली। आईआईटी दिल्ली वायरस और बैक्टीरिया के सेल से बिना प्रोटीन अलग किए ड्रग और वैक्सीन विकसित करने की दिशा में खोज करेगा। इसके लिए क्रायो इलेक्ट्रॉन टोमोग्राफी तकनीक का इस्तेमाल होगा। दरअसल, बुधवार को आईआईटी में केंद्रीय अनुसंधान सुविधा (सीआरएफ) दिवस 2026 का आयोजन हुआ था। इसमें विभिन्न वैज्ञानिक उपकरणों को प्रदर्शित किया गया।
आईआईटी दिल्ली में स्थापित क्रायो ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से अभी सेल से प्रोटीन को अलग निकालकर उसके संरचना को तस्वीरों के माध्यम से समझा जाता है। लेकिन अब सेल से प्रोटीन को अलग करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आईआईटी दिल्ली के साथी फाउंडेशन की फैसेलिटी मैनेजर डॉ. किम्मी आजाद ने बताया कि क्रायो इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप में अभी -190 डिग्री सेल्सियस पर रखकर प्रोटीन की संरचना को तस्वीरों से जानते है। 12-14 घंटे में प्रोटीन की संरचना को समझने के लिए माइक्रोस्कोप पांच से सात हजार इमेज जारी करता है।
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शोध में मानवीय हस्तक्षेप की संभावना कम : मशीन को तरल नाइट्रोजन की मदद से कम तापमान पर संचालित किया जाता है। किसी भी बीमारी के इलाज में ड्रग और वैक्सीन विकसित करने के लिए प्रोटीन को समझना आवश्यक है। कोविड के दौरान दवा विकसित करने में इस तरह की तकनीक का उपयोग किया गया था। देशभर में इस तरह के छह माइक्रोस्कोप अलग-अलग संस्थानों में है। इसमें आईआईटी मुंबई, मद्रास, कानपूर और दूसरे संस्थान है। यह माइक्रोस्कोप रोबोटिक ऑटो लोडर से संचालित होता है। इसमें मानवीय हस्तक्षेप बेहद कम है।
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अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधा उपलब्ध कराना लक्ष्य : उन्होंने बताया कि यह माइक्रोस्कोप बायोमॉलिक्यूल्स, प्रोटीन, वायरस, बैक्टीरिया सहित दूसरे जीव विज्ञान में मददगार है। अमेरिकी कंपनी द्वारा निर्मित माइक्रोस्कोप को करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से नीदरलैंड से वर्ष 2022 में मंगवाया गया था। अब इसका इस्तेमाल सेल से बिना प्रोटीन निकाले उसकी संरचना को समझने के लिए किया जाएगा। वहीं इस अवसर पर आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी ने कहा कि केंद्रीय अनुसंधान सुविधा का मुख्य लक्ष्य अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाएं उपलब्ध कराना और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी व स्थानीय रूप से प्रासंगिक शोध को बढ़ावा देना है। हमारा लक्ष्य आईआईटी और देशभर के शोधार्थियों और विद्यार्थियों को 24/7 अनुसंधान सुविधाओं की निर्बाध एवं सुलभ उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
यह उपकरण किए प्रदर्शित : उधर, सीआरएफ के अध्यक्ष प्रो. मणिदीपा बनर्जी ने कहा कि हमारी सभी सुविधाओं, शिक्षाजगत, उद्योग और सरकारी हितधारकों के प्रतिनिधियों को सहयोग एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक मंच पर लाते हैं। बता दें कि सीआरएफ दिवस पर क्रायो इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप, इलेक्ट्रॉन प्रोब माइक्रो एनालाइजर, फील्ड एमिशन स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप, सिंगल क्रिस्टल एक्स-रे डिफ्रेक्टोमीटर, ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप और मेडटेक उपकरणों को प्रदर्शित किया गया।