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अब घंटो तक खाना रहेगा सूक्ष्मजीवरोधी, रिसर्च स्कॉलर पूजा ने तैयार किया रोटी लपेटने वाला खास रेपिंग मैटिरियल

Tue, 13 Oct 2020 01:30 AM IST
Vikas Kumar सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 13 Oct 2020 01:30 AM IST
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IIT Madras Research Scholar Pooja designed a antimicrobial wrapping material for keeping food safe
रिसर्च स्कॉलर पूजा कुमारी - फोटो : amar ujala

अब घर या घर से बाहर ले जाकर जाने वाला खाना नुकसानदेह बैक्टीरिया आदि से सुरक्षित रहेगा। आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञों ने खाने को सुरक्षित रखने के मकसद से सूक्ष्मजीवरोधी रोटी को लपेटने वाला (एंटीमाइक्रोबीअल रेपिंग मैटिरियल) प्रोडेक्ट तैयार किया है। इसमें रखा खाना या रोटी 99.999 फीसदी बैक्टीरिया आदि से सुरक्षित होगा। खास बात यह है कि इस प्रोडेक्ट में खाना रखने के चलते प्लास्टिक आदि के डिब्बों या टिफिन की जरूरत भी नहीं रहेगी।

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डिपार्टमेंट ऑफ बॉयोटेक्रोलॉजी के प्रोफेसर मुकेश डोबल की अध्यक्षता में रिसर्च स्कॉलर पूजा कुमारी ने इस प्रोडेक्ट का शोध किया है। इस प्रोजेक्ट के चलते आईआईटी मद्रास की टीम को गांधीयन यंग टेक्नोलॉजीकल इनोवेशन एप्प्रीसेशन 2020 का अवार्ड भी मिला है। टीम ने इस प्रोडेक्ट के लिए पेंटेट को भी आवेदन कर दिया है।
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प्रो. मुकेश के मुताबिक, इस शोध का मकसद आम लोगों की प्लेट से प्लास्टिक को दूर करके उन्हें बीमारियों से निजात और सूक्ष्मजीवरोधी खाना लपेटना वाला उत्पाद देना था। इस शोध में लोगों की सेहत के साथ पर्यावरण को भी ध्यान में रखा गया है। फिलहाल मार्केट में जो भी खाना लपेटने वाली शीट या उत्पाद हैं, वे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। जबकि हर व्यक्ति घर से बाहर निकलने के  दौरान अपने खाने सुरक्षित रखना चाहता है। क्योंकि घर से  निकलने के बाद ट्रैफिक और ऑफिस के दौरान लंच टाइम के बीच में एक  लंबा समय  होता है। यदि प्लास्टिक शीट या डिब्बे में खाना होगा, उसके जहरीले तत्व खाने में मिल जाते हैं। कई लोग रददी कागज में अपनी रोटी आदि लपेटते हैं, उस कागज में लगी स्याही खाने के माध्यम से शरीर में जाकर सेहत  को नुकसान पहुंचाती है।
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- हर वर्ष 300 मिलिनयन टन प्लास्टिक अवशेष निकलता है
रिसर्च स्कॉलर पूजा के मुताबिक, प्रति वर्ष करीब 300 मिलियन टन प्लास्टिक का अवशेष या कूड़ा निकलता है। जबकि इसमें से महज नौ फीसदी प्लास्टिक का दोबारा प्रयोग किया जा सकता है। इसके अलावा 12 फीसदी को जला दिया जाता है। एक अन्य शोध रिपोर्ट के मुताबिक, विश्व में प्रति दस  में से एक व्यक्ति प्लास्टिक बर्तनों में खाने से बीमार होता है। इसके अलावा प्लास्टिक के चलते ही प्रति वर्ष 4,20,000 लोग अपनी जान गंवा बैठते हैं।


- 21 दिन में उत्पाद मिट्टी में घूल जाता
शोध के मुताबिक, 4 से 21 दिन में यह व्यर्थ शीट या उत्पाद मिट्टी में घुल जाता है। इस प्रकार इसके चलते मिट्टी या पर्यावरण को  कोई नुकसान नहीं होता है। इस शीट को बनाने में प्रयोग मैटिरियल यूनाइटेड स्टेट  फुड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रिशन से मान्यता प्राप्त है। यह भारत की लैब में जांचा-परखा गया है। लैब में प्रशिक्षण के दौरान 30 डिग्री तापमान में प्रोडेक्ट को दस दिनों तक रखने के बाद आम मार्केट में उपलब्ध खाना लपेटने वाले उत्पाद केसाथ भी परखा गया। इसमें सामने आया कि इसमें रखा खाना 99.9999 फीसदी तक रोगाणु  और सूक्ष्मजीवरोधी है।

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