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IIMC: संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी करेंगे फेसबुक पोस्ट मामले की जांच

Thu, 04 Feb 2016 06:28 AM IST
Updated Thu, 04 Feb 2016 06:28 AM IST
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 IIMC formed a committee to probe allegations of “casteist” remarks,

भारतीय जनसंचार संस्थान में एक छात्र द्वारा किए गए सोशल मीडिया पर उसके पोस्ट ने खासा विवाद खड़ा कर दिया है। सरकार ने कहा है कि अनुसुचित जाति और जनजाति छात्रों के खिलाफ किए गए जातिवादी टिप्पणी की जांच अब संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी करेंगे।

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छात्रों के एक समूह ने आरोप लगाया कि रोहित वेमुला की आत्महत्या पर उनके विरोध प्रदर्शन के खिलाफ संस्थान के ही कुछ छात्रों द्वारा बैर' और 'घृणा' फैलाई गई। जिस संबंध में उन्होंने संबंधित मंत्रालय में शिकायत भी की थी।
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इस मामले एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि उनके पास सोशल मीडिया पर की गई कुछ टिप्पणियों की सूचना मंत्रालय के पास आई है, जिस पर मंत्रालय ने संयुक्त सचिव मिहिर कुमार सिंह को इस मामले की 10 फरवरी तक जांच पूरी कर, अपना निष्कर्ष प्रस्तुत करने के लिए कहा है।
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सूत्रों का कहना है कि मंत्रालय आगामी 5 फरवरी को संस्थान में होने वाले दीक्षांत समारोह कार्यक्रम और हाल ही में हैदराबाद विश्वविद्यालय में हुए रोहित वेमुला आत्महत्या मामले को लेकर संवेदनशील है, इसलिए इस मामले पर त्वरित कार्रवाई की है।

पोस्ट पर मचा बवाल, 17 छात्रों ने की शिकायत

 IIMC formed a committee to probe allegations of “casteist” remarks,

वहीं आईआईएमसी प्रशासन ने भी छात्र द्वारा की गई फेसबुक पोस्ट में 'जातिवादी' टिप्पणी करने पर वहां जांच कमेटी गठित की है जिससे 3 सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है।

इस मामले में गठित की गई कमेटी के संबंध में एक शिक्षक का कहना है कि पांच लोगों की कमेटी बनाई गई है जिसमें दोनों पक्षों को सुना जाएगा और 3 सप्ताह के भीतर रिपोर्ट दी जाएगी।

आरोप है कि वहीं के एक छात्र ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी, जिससे उनकी भावनाएं आहत हुई हैं और संस्थान में उनके साथ दुर्वव्यवहार किया जा रहा है। वहीं इस मामले में आरोपी छात्र का कहना है कि 'मैंने अपने फेसबुक पर की गई पोस्ट के लिए माफी मांग ली है लेकिन मैं ऐसा कुछ करने वाला नहीं था क्योंकि मैं जिस क्षेत्र से आता हूं वहां ऐसे शब्द इस्तेमाल किए जाते हैं।

छात्र ने कहा कि उससे 'निजी दुश्मनी' निकाली जा रही है और 'प्रोपैगैंडा' इस्तेमाल किया जा रहा है। आरोपी छात्र का कहना है कि उसके खिलाफ उस हक का दुरूपयोग किया जा रहा है जो अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को संविधान द्वारा दिया गया है।

वहीं 17 छात्रों ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में भी छात्र के सोशल मीडिया पोस्ट की शिकायत की है और उनका कहना है कि इस वजह से वो 'तनाव' में आ गए हैं और अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।

संस्थान के विशेषाधिकारी अनुराग मिश्रा ने इन आरोपों पर किसी भी तरह की बात करने से इंकार कर दिया। इस मामले में आरोपी छात्र के समर्थन में जुटे छात्रों का कहना है कि यह सब एक प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है और आरोपी छात्र की पोस्ट में ऐसी कोई भी बात नहीं लिखी गई है जो किसी को आहत कर सके।

उनका कहना है कि दूसरे पक्ष के लोग उन्हें कानून का डर दिखा कर अपनी बात कहने और लिखने से भी रोक रहे हैं। अपना नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर एक छात्र ने बताया कि आरोपी छात्र ने जो पोस्ट किया था वह उसी विभाग के दूसरे छात्र की एक पोस्ट का जवाब था, जिस छात्र को यह जवाब दिया गया था उसे इससे आपत्ति नहीं है फिर इन लोगों को न जाने किसने इतना भड़का दिया। (तस्वीर में 17 छात्रों के हस्ताक्षर जिन्होंने मंत्रालय में शिकायत की है)

प्रोफेसर के खिलाफ भड़काने का आरोप

 IIMC formed a committee to probe allegations of “casteist” remarks,

इतना ही नहीं एक छात्र ने संस्थान के अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर अमित सेन गुप्ता पर यह आरोप लगाते हुए संस्थान के विशेषाधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई है कि वे छात्रों को उनके खिलाफ भड़का रहे हैं। अपने खिलाफ की गई शिकायत के संबंध में प्रोफेसर अमित सेन गुप्ता ने अमर उजाला से कहा कि वो किसी कमेटी में मेंबर नहीं हैं और उन्हें अपने खिलाफ की गई शिकायत के बारे में कुछ अंदाजा नहीं है।

छात्रों का कहना है कि संस्थान प्रशासन भी उनके साथ दोहरा मापदण्ड अपना रहा है। बता दें कि भारतीय जनसंचार संस्थान सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अतंर्गत काम करता है जो पत्रकारिता का प्रीमियर इंस्टीट्यूट भी माना जाता है।

यहां आगामी 5 तारीख को बीते वर्ष के छात्रों का दीक्षांत समारोह होना है जिसमें राज्य मंत्री रिटार्यड कर्नल (एवीएसएम) राज्य वर्धन सिंह राठौड़ मुख्य अतिथि हैं। संस्थान प्रशासन नहीं चाहता की ये मुद्दा उस दिन मंत्री के सामने उछले इसलिए वो दोनों पक्षों को अपने-अपने स्तर से भी समझाने में लगे हैं।

दूसरी ओर शिकायत करने वाले छात्रों का कहना है कि उनके साथ संस्थान में भेदभाव किया जा रहा है और ऐसी स्थिति में वो पढ़ाई लिखाई पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। (तस्वीर में छात्र द्वारा शिक्षक के खिलाफ की गई शिकायत की कॉपी)

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