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आईआईएम अब सरकारी दखल से आजाद, खुद तय करेंगे पाठ्यक्रम: मोदी

Sun, 30 Sep 2018 06:41 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 30 Sep 2018 06:41 AM IST
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IIM now free from government interference says pm modi
पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) को हर तरह के सरकारी दखल से आजाद करने का एलान किया है। दिल्ली के विज्ञान भवन में शनिवार को आयोजित एकेडमिक लीडरशिप ऑन एजुकेशन फॉर रिसर्जेंस में उन्होंने कहा कि आईआईएम को अब अपना कोर्स व पाठ्यक्रम डिजाइन, फैकल्टी व बोर्ड सदस्य चुनने की आजादी होगी। मोदी ने कहा कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों की दौड़ में शामिल करने के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों को स्वायत्तता दी जा रही है। 

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भारतीय शिक्षण संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा में लाने के लिए यूजीसी अन्य विश्वविद्यालयों को स्वायत्तता दी जा रही है। ऐसा होने से इन उच्च शिक्षण संस्थानों में सरकार का कोई दखल नहीं रहेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें इस वास्तविकता को स्वीकार करना होगा कि आज दुनिया में कोई भी देश, समाज या व्यक्ति अलग होकर नहीं रह सकता। हमें ग्लोबल सिटीजन और ग्लोबल विलेज के दर्शन पर सोचना होगा। विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों से कहा कि उच्च शिक्षा हमें उच्च विचार, आचार, संस्कार व व्यवहार के साथ समाज की समस्याओं का समाधान भी उपलब्ध करवाती है। इसलिए मेरा आग्रह है कि आप छात्रों को कॉलेज व यूनिवर्सिटी के क्लास रूम में ज्ञान देने के साथ देश की आकांक्षाओं से भी जोड़ें।  
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रिसर्च, तकनीक, संस्कृति व मानवीय मूल्य भी दें   
मोदी ने स्वामी विवेकानंद, रविंद्रनाथ टैगोर, बाबा साहेब आंबेडकर, दीनदयाल उपाध्याय, राममनोहर लोहिया की शिक्षाओं को जीवन में उतारने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि नालंदा, तक्षशीला व विक्रमशीला ने ज्ञान के साथ-साथ इनोवेशन पर जोर देने की जरूरत है। ज्ञान व शिक्षा सिर्फ किताबी नहीं हो सकते हैं। शिक्षा का मकसद व्यक्ति का हर आयाम से संतुलित विकास करना और संतुलित विकास इनोवेशन के बिना संभव नहीं है। इसलिए शिक्षा में तकनीक, इनोवेशन, रिसर्च के साथ मानवीय मूल्य व संस्कृति भी शामिल होनी चाहिए। 
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शिक्षा के बजट में 70 फीसदी बढ़ोतरी        
पीएम ने कहा कि शिक्षा के बगैर विकास अधूरा है। इसीलिए शिक्षा के बजट में विभिन्न माध्यमों से करीब 70 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। शिक्षा का इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर बनाने को रिविटलाइजेशन ऑफ इंफ्रास्ट्रक्चर और सिस्टम इन एजुकेशन कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसमें वर्ष 2022 तक एक लाख करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है। देश की जरूरतों में शिक्षण संस्थानों को भागीदार बनाया जा रहा है। 

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