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Delhi NCR News: परम्परागत ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के लिए आईजीएनसीए और जीबीयू के बीच समझौता
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। भारत की ज्ञान परंपरा को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टि से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) और ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। समझौता पारंपरिक भारतीय ज्ञान और समकालीन विज्ञान के समन्वय के माध्यम से नए शोध आयाम विकसित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लागू होने के बाद भारतीय ज्ञान प्रणाली को नए दृष्टिकोण से समझने की आवश्यकता बढ़ी है। यह समझौता पारंपरिक ज्ञान विशेषकर आयुर्वेद, जीवन विज्ञान और चिकित्सा विज्ञान को आधुनिक अनुसंधान से जोड़ते हुए नए विचारों और संभावनाओं को सामने लाएगा। वहीं, जीबीयू के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने बताया, कि विश्वविद्यालय के पास पांडुलिपियों का एक समृद्ध डिजिटल भंडार उपलब्ध है, जिसके माध्यम से प्राचीन ज्ञान को समझने और उसकी वर्तमान प्रासंगिकता पर शोध करने की दिशा में संयुक्त कार्य किया जाएगा। समारोह में आईजीएनसीए के सदस्य सचिव सच्चिदानंद जोशी, कलानिधि प्रभाग के प्रमुख प्रो. डॉ. रमेश चंद्र गौड़, प्रो. सुधीर लाल, अनुराग पुनेठा और प्रो. धर्मचंद चौबे सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं जीबीयू की ओर से कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह, रजिस्ट्रार प्रो. चंद्र कुमार सिंह और प्रो. उत्तम कुमार सहित अन्य शिक्षाविदों ने भागीदारी की।
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नई दिल्ली। भारत की ज्ञान परंपरा को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टि से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) और ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। समझौता पारंपरिक भारतीय ज्ञान और समकालीन विज्ञान के समन्वय के माध्यम से नए शोध आयाम विकसित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लागू होने के बाद भारतीय ज्ञान प्रणाली को नए दृष्टिकोण से समझने की आवश्यकता बढ़ी है। यह समझौता पारंपरिक ज्ञान विशेषकर आयुर्वेद, जीवन विज्ञान और चिकित्सा विज्ञान को आधुनिक अनुसंधान से जोड़ते हुए नए विचारों और संभावनाओं को सामने लाएगा। वहीं, जीबीयू के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने बताया, कि विश्वविद्यालय के पास पांडुलिपियों का एक समृद्ध डिजिटल भंडार उपलब्ध है, जिसके माध्यम से प्राचीन ज्ञान को समझने और उसकी वर्तमान प्रासंगिकता पर शोध करने की दिशा में संयुक्त कार्य किया जाएगा। समारोह में आईजीएनसीए के सदस्य सचिव सच्चिदानंद जोशी, कलानिधि प्रभाग के प्रमुख प्रो. डॉ. रमेश चंद्र गौड़, प्रो. सुधीर लाल, अनुराग पुनेठा और प्रो. धर्मचंद चौबे सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं जीबीयू की ओर से कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह, रजिस्ट्रार प्रो. चंद्र कुमार सिंह और प्रो. उत्तम कुमार सहित अन्य शिक्षाविदों ने भागीदारी की।
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