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अगर नहीं बनवाया है ड्राइविंग लाइसेंस तो अब आएगी मुसीबत

Tue, 26 May 2015 08:29 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा Updated Tue, 26 May 2015 08:29 PM IST
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If you don't have driving license, you will be in trouble now.

अब ‘खेल-खेल’ में ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बनेगा, बल्कि कड़े टेस्ट से गुजरना होगा। एक छोटी सी गलती आपको अयोग्य साबित कर देगी।

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बंगलूरू की तरह नोएडा में भी ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर टेस्ट लेने के बाद लाइसेंस जारी करने की योजना पर काम शुरू हो गया है। प्रदेश के परिवहन आयुक्त ने नोएडा में ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक बनाने को कहा है।

दो एकड़ एरिया में बनने वाले इस ट्रैक में वे सारे नियम-कायदे होंगे, जिनका सामना वाहन चालकों को सड़क पर चलने के दौरान करना पड़ता है। ट्रैफिक सिग्नल, लेन, डिवाइडर, यू-टर्न, लेफ्ट टर्न, राइट टर्न, फ्लाईओवर, अंडरपास डिवाइडर आदि बने होंगे। खास बात यह है कि पूरे ट्रैक पर सेंसर लगा होगा। टेस्ट के दौरान अगर आवेदक छूटी सी भी चूक करेगा तो तुरंत पता चल जाएगा।
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कंप्यूटर उसकी कमी बता देगा, जिसके बाद लाइसेंस नहीं बन सकेगा। इस तरह का ट्रैक बंगलूरू में पहले से ही बना हुआ है। परिवहन आयुक्त के निर्देश पर पंजीयन अधिकारी महेश शर्मा ने बंगलूरू जाकर इसका निरीक्षण भी किया है।

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ये आएगी बड़ी मुश्किल

If you don't have driving license, you will be in trouble now.

महेश शर्मा ने बताया कि यह ट्रैक आठ के आकार में बना हुआ है। इसमें ट्रैफिक से जुड़ी छोटी सी छोटी बातों को भी समाहित कर रखा है। इस ट्रैक पर टेस्ट में पास होने वाले आवेदकों का ही लाइसेंस बन पाता है।

बंगलूरू में लाइसेंस बनवाने से पहले आवेदकों को विधिवत ट्रेनिंग और नियमों के बारे में जानकारी लेनी होती है। इंस्पेक्शन एंड सर्टिफिकेशन सेंटर से रुकेगा फर्जीवाड़ा एक तरफ ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक से ड्राइविंग लाइसेंस के लिए सख्त टेस्ट से गुजरना होगा, वहीं इंस्पेक्शन एंड सर्टिफिकेशन सेंटर में ही वाहनों के प्रदूषण की जांच होगी।

पूर्णतया कंप्यूट्रीकृत इस सेंटर में गेट से घुसते ही वाहन से निकलने वाले धुएं से प्रदूषण की जांच हो जाएगी। प्रदूषण की सटीक रिपोर्ट जारी होगी। रिपोर्ट में किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं हो सकेगी। इसके लिए भी तीन एकड़ जमीन की जरूरत होगी। कुल मिलाकर दोनों प्रोजेक्ट के लिए पांच एकड़ जमीन उपलब्ध कराने पर जिला प्रशासन और प्राधिकरण से बातचीत चल रही है। वर्तमान समय में नोएडा में एक दर्जन से ज्यादा प्रदूषण जांच केंद्र चल रहे हैं।

वाहन से प्रदूषण ज्यादा होने पर भी मानक के अनुरूप रिपोर्ट बनाकर देने की गड़बड़ी सामने आ रही है। इस सेंटर से न सिर्फ फर्जी प्रमाणपत्र पर रोक लगेगी बल्कि ये जांच केंद्र भी बंद कर दिए जाएंगे। सिर्फ इंस्पेक्शन एंड सर्टिफिकेशन सेंटर पर ही जांच की सुविधा होगी।

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