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AIIMS: अब सर्वाइकल कैंसर की आसानी से पहचान के लिए स्वदेशी कोल्पोस्कोपी, स्वास्थ्यकर्मियों को मिली ट्रेनिंग
Tue, 07 May 2024 02:09 AM IST
विजय पुंडीर
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Tue, 07 May 2024 02:09 AM IST
सार
विशेषज्ञों का कहना है कि स्वदेशी कोल्पोस्कोपी की मदद से महज 15 से 20 मिनट में ही गर्भाशय ग्रीवा के घाव की जांच हो सकेगी। इस जांच से पता चल जाएगा कि उक्त जगह पर ट्यूमर विकसित हो रहा है या नहीं।
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Delhi AIIMS
- फोटो : ANI
विस्तार
सर्वाइकल कैंसर की पहचान और इसका इलाज जल्द ही आसान हो जाएगा। सर्वाइकल इंट्रापीथेलियल नियोप्लासिया (सीआईएन) (कैंसर का शुरुआती चरण) की सटीक जांच स्वदेशी कोल्पोस्कोपी से स्वास्थ्य कर्मी कर सकेंगे। इसका पता चलने पर थर्मल अब्लेशन से 40 सेकंड में इलाज भी हो सकेगा। स्वास्थ्य कर्मियों को इनके उपयोग की ट्रेनिंग दी जा रही है। इसकी शुरुआत एम्स से हुई है।
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सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे बड़ा कारण है। समय पर पकड़ न हो पाने के कारण अधिकतर महिलाएं अंतिम स्टेज में अस्पताल पहुंचती है। यहीं कारण है कि हर साल इस कैंसर से हजारों महिलाएं दम तोड़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वदेशी कोल्पोस्कोपी की मदद से महज 15 से 20 मिनट में ही गर्भाशय ग्रीवा के घाव की जांच हो सकेगी। इस जांच से पता चल जाएगा कि उक्त जगह पर ट्यूमर विकसित हो रहा है या नहीं। सटीकता से आंकलन होने के बाद पुष्टि के लिए बायोप्सी भी कर सकेंगे। एम्स में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की पूर्व प्रमुख व एओगिन इंडिया की संस्थापक अध्यक्ष डॉ. नीरजा भाटला ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग के बाद आगे की जांच की दिशा में आगे बढ़ने के लिए स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है। एम्स से इसकी शुरूआत हुई है। आने वाले दिनों में देशभर में इसका विस्तार किया जाएगा।
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100 लोगों को दी गई ट्रेनिंग
एओजीडी ऑन्कोलॉजी समिति के सहयोग से एम्स में कोल्पोस्कोपी और सीआईएन के उपचार को लेकर ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाया गया। इसमें कोल्पोस्कोपी के व्यावहारिक पहलु व प्रीइनवेसिव के उपचार के बारे में बताया गया। इसमें 70 प्रतिनिधि व 32 संकाय ने भाग लिया। इसका उद्घाटन डॉ. के.के. वर्मा डीन एकेडमिक्स एम्स, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की प्रमुख डॉ. नीना मल्होत्रा सहित अन्य की मौजूदगी में हुआ।
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देश के दूरदराज के क्षेत्रों में भी हो सकेगा इस्तेमाल
देशभर की महिलाओं में जांच का दायरा बढ़ाने के लिए पोर्टेबल मशीन तैयार की गई है। ट्रेनिंग प्रोग्राम के दौरान प्रतिभागियों को विभिन्न पोर्टेबल कोल्पोस्कोप और मॉडलों पर थर्मल एब्लेशन व एलएलईटीजेड उपकरण के इस्तेमाल के बारे में बताया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी मदद महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल कैंसर का उन्मूलन करने का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा। टीम आने वाले दिनों में इसे देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में आयोजित करेगी।
देशभर में मिलेगी एम्स की सुविधा
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बैटरी से संचालित होने वाले कोलपोस्कोप की मदद से प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मचारी ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लीजन (जख्म) की तस्वीर डॉक्टर को भेज सकते हैं। डॉक्टर उसे देखकर फोन पर ही इलाज के बारे में बता सकते हैं। लीजन छोटा या प्रि-कैंसर की स्थिति में होने पर स्वास्थ्य कर्मचारी डॉक्टर के निर्देश पर थर्मल अब्लेशन कर सकेंगे। इस तकनीक से 100 से 120 डिग्री पर घाव को बर्न कर दिया जाता है। इससे मरीज को दर्द भी नहीं होता। इससे 40 सेकेंड में शुरुआती स्टेज के सर्वाइकल कैंसर का इलाज हो सकेगा।