IAS अधिकारियों ने काली कमाई को डकारने का निकाला नया तरीका, छह नौकरशाह पकड़ाए
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उत्तर प्रदेश के नौकरशाहों द्वारा टैक्स चोरी और अपनी काली कमाई को प्रापर्टी खरीद में खपाने का नया खेल सामने आया है। इन अफसरों ने एनसीआर में चेक के जरिए संपत्ति खरीद दिखाई लेकिन भुगतान कैश या दूसरे माध्यम से कर दिया।
इतना ही नहीं आयकर से बचने के लिए इन्होंने प्रॉपर्टी भी किस्तों और सर्किल रेट से भी कम मूल्य दिखाकर खरीदी। राज खुलने पर आयकर विभाग ने ऐसे छह आईएएस अधिकारियों को नोटिस भेजा है।
आयकर विभाग ने यूपी के आईएएस अधिकारियों के परिजनों के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों के कागजात को खंगाला तो चौंकाने वाली जानकारी हाथ लगी। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद व मेरठ में सर्किल रेट से भी कम कीमत पर प्रॉपर्टी खरीदी गई।
बैंक खातों की जांच में आई चौंकाने वाली सच्चाई
रजिस्ट्री की फाइलों को देखा गया तो खरीद चेक के माध्यम से दिखाई गई। इसके बाद संबंधित नौकरशाहों व उनके परिजनों के बैंक खातों की जांच की गई तो पता चला कि खाते से कभी इतना पैसा कटा ही नहीं। इसका मतलब साफ था कि भुगतान या तो कैश में किया गया या किया ही नहीं गया।
सूत्र बताते हैं कि ऐसा ही एक दिलचस्प मामला गाजियाबाद में तैनात रहे आईएएस अधिकारी का पकड़ में आया है, जिन्होंने 2015 की शुरुआत में नोएडा में एक पार्टी ने खरीदी, फिर आठ महीने बाद उस पार्टी से अपने बेटे के नाम पर 29.90 लाख रुपये में (री-सेल) खरीद ली।
रजिस्ट्री पेपर में भुगतान चेक से दिखाया गया लेकिन परिवार के किसी बैंक खाते से इतने कैश का भुगतान नहीं हुआ। उधर, बागपत के पूर्व जिलाधिकारी के परिजनों के नाम पर खरीदी गई ऐसी ही एक संपत्ति के कागजात मिले हैं। सूत्रों का कहना है कि अभी तक छह बड़े मामले पकड़ में आए हैं, जिसके बाद संबंधित नौकरशाहों को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया गया।
आयकर से बचने का निकाला ये फार्मूला
नौकरशाह अपने पद और पहुंच का इस्तेमाल प्रापर्टी खरीदने में भी कर रहे हैं। नोएडा में जो संपत्ति 29.90 लाख रुपये में खरीदी गई, उसकी बाजार में कीमत 45 लाख रुपये से ज्यादा है। साल 2015 में संपत्ति खरीदते वक्त सर्किल रेट 45 हजार रुपये वर्ग मीटर का था लेकिन खरीद सर्किल रेट से कम पर दिखाई गई, ताकि आयकर विभाग से बचा जा सके।
30 लाख या उससे अधिक की हर खरीद का ब्योरा एआईआर (एनुअल इंफार्मेशन रिपोर्ट) के तहत आयकर विभाग के पास खुद ही पहुंच जाता है। इसकी जानकारी नौकरशाहों को पहले से थी। इसलिए जानबूझकर 30 लाख रुपये से नीचे की प्रॉपर्टी खरीदी। संपत्ति महंगी होते हुए भी 30 लाख से कम कीमत दिखाई गई।
उधर, आयकर को संभावना है कि एनसीआर में नौकरशाहों से जुड़े ऐसी ही काफी मामले पकड़ में आ सकते हैं। इसी को ध्यान में रखकर व्यापक स्तर पर संपत्तियों की खरीद-फरोख्त की जांच शुरू हो गई है।