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अमर उजाला अभियान: मैं चौधरी चरण सिंह मार्ग हूं ...लेकिन अव्यवस्था से बेहाल हूं 

Mon, 28 Sep 2020 05:47 AM IST
दुष्यंत शर्मा संतोष कुमार, नई दिल्ली
संतोष कुमार, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 28 Sep 2020 05:47 AM IST
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I am Chaudhary Charan Singh Marg ... but suffering from chaos
चौधरी चरण सिंह मार्ग, आनंद विहार आईएसबीटी - फोटो : अमर उजाला

मैं चौधरी चरण सिंह मार्ग हूं ... नाम से नाता मेरा बड़े किसान नेता, दिवंगत प्रधानमंत्री से है। मैं दिल्ली का भी हूं और उतर प्रदेश का भी। मैं चौधरी चरण सिंह मार्ग हूं। मैंने ही दोनों प्रदेशों को उनके दायरे में बांध रखा है, उनकी सीमा बनकर। करीब सात किमी, गाजीपुर से दिलशाद गार्डन तक।

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मुझसे ही दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे दिलशाद गार्डन से जुड़ता है। और मैं ही दिल्ली के बड़े ट्रासपोर्ट हब का रास्ता भी हूं। मेरे बगल में आनंद विहार का आईएसबीटी व रेलवे स्टेशन है। इससे पूरे उतर भारत का दिल्ली से संपर्क होता है। मुझसे होकर गुजरने वाली तीन मेट्रो लाइनें पूरी दिल्ली का सैर कराती हैं। और यही क्यों, अभी हवा से बात करने वाली आरआरटीएस ट्रेन भी मुझसे मिलने वाली है, आनंद विहार के करीब ही।
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मेरा अपना अर्थशास्त्र भी है और रिहायश भी। एक तरफ ईडीएम मॉल और होटल हैं तो दूसरी तरफ फुटपाथी बाजार। तभी हर तबका मुझसे संतुष्ट हो लेता है। अपनी जेब के हिसाब से सस्ती से सस्ती व महंगी से महंगी चीजें खरीदकर। 
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बसावट भी मेरी अनूठी है। एक छोर पर हमारे गाजीपुर गांव है तो दूसरे छोर पर दिलशाद गार्डन की मध्यम आय वर्गीय कॉलोनी है। बीच में विवेक विहार, आनंद विहार, सूर्य नगर, रामप्रस्थ सरीखी पॉश बसावट है। 

इतना सब होकर भी मुझे सुकून नहीं है। मैं दिल्ली का सबसे प्रदूषित हिस्सा हूं। सर्दियों में तो मुझ पर सांस का संकट रहता है, हवा दमघोंटू हो जाने से। फिर, मेरा हर मर्जिंग व डी-मर्जिंग प्वाइंट बेतरतीब है। नतीजा, कदम दर कदम मेरी टांग टूटी रहती है, वाहनों के भारी दबाव से। मुश्किल रहता है चलना मेरा। फिर भी, मेरे होने के अपने मायने हैं क्योंकि मैं ही देश के दूसरे हिस्से को दिल्ली से जोड़ता हूं।

चौधरी चरण सिंह मार्ग लाइव:

  • लंबाई करीब सात किमी, छह लेन की सड़क पर नॉन पीक व पीक आवर्स में लगा तीस से चालीस मिनट।
  • गाजीपुर गांव व टाटा टेल्को टी-प्वाइंट के मर्जिंग व डी-मर्जिंग प्वांइट पर ट्रैफिक अस्त-व्यस्त।
  • आईएसबीटी आनंद विहार के इंट्री प्वाइंट पर लेन डिवाइड न होने से फंसे रहते हैं वाहन। करीब पांच सौ मीटर तक रेंगते रहे वाहन।
  • बस अड्डे के निकासी मार्ग से आगे यू-टर्न, निकलना आसान नहीं।
  • आगे सूर्य नगर के सिग्नल और बस स्टाप के पास-पास होने से आधा किमी तक रुका था ट्रैफिक। रेंगते हुए आगे बढ़ रहे थे वाहन।
  • रघुनाथ मंदिर सिग्नल पर भी आलम यही, सीधे जाने वाले वाहनों का सही तरीके से निकलना संभव नहीं।
  • दिलशाद गार्डन रेलवे ओवर ब्रिज और अंडरपास पर फंसा ट्रैफिक।


सड़क का डिजाइन भी गड़बड़
सड़क के डिजाइन में हर कदम पर गड़बड़ है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे से चौधरी चरण सिंह मार्ग के लेफ्ट टर्न पर वाहनों की रफ्तार अचानक धीमी करनी पड़ती है। इससे पीछे ट्रैफिक फंस जाता है। फिर, सड़क पर करीब ऐसे दस प्वाइंट हैं, जहां मर्जिंग व डी-मर्जिंग ट्रैफिक बेतरतीब रहता है। इससे चलना आसान नहीं होता। दोनों सिग्नल पर भी यही समस्या है। इसका नतीजा, छह लेन की महज सात किमी लंबी सड़क पार करने में आधे घंटे से ज्यादा लग जाता है।
-एसके महेश्वरी, रोड विशेषज्ञ।

सस्ते बाजार से महंगे माल तक, हर सामान मौजूद

I am Chaudhary Charan Singh Marg ... but suffering from chaos
1 - फोटो : अमर उजाला

आनंद विहार में मिला-जुला बाजार है। ईडीएम मॉल व फुटपाथ पर बाजार लगा रहता है। दोनों जगहों पर सामान की कीमतों में जमीन आसमान का अंतर रहता है। यहां सड़क के किनारे के ढाबे भी हैं और होटल भी। इससे हर तबके की जरूरत पूरी हो जाती है। गाजीपुर की सब्जी मंडी, फूल व फल मंडी का भी अपना अलग आकर्षण है।

हर तबके की रहती है आवाजाही
यहां हर तबके का मुसाफिर पहुंचता है। सबकी अपनी क्रय शक्ति होती है। इसी नजरिए से यहां बाजार विकसित हुआ है। साथ ही मॉल व होटल भी बने हैं। इससे सबकी जरूरतें पूरी हो जाती हैं।
-डॉ. सुनील सिंह, अर्थशास्त्री

ग्रीन बेल्ट दूर कर सकती है प्रदूषण
हर सड़क के तीन हिस्से होते हैं। मुख्य कैरिज-वे, फुटपाथ और सेंटर वर्ज। अगर थोड़ी संजीदगी से काम किया जाए तो सड़क की धूल का निदान हरियाली दे सकती है। इसके लिए फुटपाथ पर जंगली कदंब, सीता अशोक, जामुन, लसोड़ा सरीखे मिडिल कैनॉपी के पौधे लगाए जाएं, जबकि सेंटर वर्ज पर लोवर कैनॉपी के पौधे। इससे धूल को हवा में जाने से दो स्तर पर रोका जा सकता है। पर्याप्त जगह होने के बावजूद चौधरी चरण सिंह मार्ग पर इस तरह का नियोजन कहीं नहीं दिखता।
-फैय्याज खुदसर, पर्यावरण विशेषज्ञ

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