Delhi AIIMS: बेहद गंभीर मरीजों को जिंदगी देगा हाइब्रिड ऑपरेशन थियेटर, मिलेंगी आधुनिक जांच की सभी सुविधाएं
एम्स के मुताबिक, करीब 40/40 फीट के कमरे में एक ही जगह पर सभी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। ऑपरेशन टेबल तक सीटी स्कैन, एमआरआई जैसी जांच मशीनों को लाने के लिए ट्रैक बिछाए जा रहे हैं।
विस्तार
हादसों में जख्मी हुए बेहद गंभीर मरीजों को जिंदगी देने के लिए एम्स के ट्रामा सेंटर में हाइब्रिड ऑपरेशन थियेटर तैयार होगा। इसमें एक जगह पर ही सारी आधुनिक जांच की सुविधाएं मौजूद रहेंगी। मरीज को ऑपरेशन टेबल से हटाने की भी जरूरत नहीं होगी। ट्रामा सेंटर में रेड जोन के नजदीक इस हाइब्रिड ओटी का निर्माण एक माह पहले ही शुरू हुआ है, जो अगले साल तक तैयार हो जाएगा।
एम्स के मुताबिक, करीब 40/40 फीट के कमरे में एक ही जगह पर सभी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। ऑपरेशन टेबल तक सीटी स्कैन, एमआरआई जैसी जांच मशीनों को लाने के लिए ट्रैक बिछाए जा रहे हैं, ताकि मरीज को ओटी टेबल से हटाने की जरूरत न हो, बल्कि टेबल पर ही सारी जांच कर मरीज की बीमारी जानकार आगे का इलाज शुरू कर दिया जाएगा।
इसके अलावा इसी ओटी में इंटरवेंशन के प्रोसीजर की व्यवस्था रहेगी। इसमें मरीज के अंदर तार के जरिये किसी ब्लॉकेज को खोलना हो या बेहतर तरीके से अंदर के हालात को समझना हो तो ये काम भी ओटी टेबल पर किया जा सकेगा। इससे तुरंत और बेहतर सर्जरी करना संभव हो सकेगा। ऐसा होने से अति गंभीर मरीज को बचाना भी आसान हो जाएगा। यह देश का पहला हाइब्रिड ओटी होगा। अभी तक ऐसे मरीजों का ऑपरेशन रेड जोन में बने इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर में होता है।
ऐसा देखा गया है कि कई बार मरीज काफी दुर्घटना में घायल होकर अति गंभीर स्थिति में एम्स ट्रामा सेंटर में पहुंचते हैं। जांच में इन मरीजों की पल्स तक नहीं मिल पाती और इन्हें बचाना मुश्किल हो जाता है। अब ऐसे मरीजों को भी बेहतर सुविधा मिल पाएगी।
12 हो जाएंगे ऑपरेशन थियेटर
एम्स ट्रामा सेंटर में हाइब्रिड ऑपरेशन थियेटर बनने के बाद ओटी की संख्या बढ़कर 12 हो जाएगी। सेंटर में अभी पांच सामान्य ओटी चल रहे हैं। इसके अलावा रेड जोन में एक अतिरिक्त ऑपरेशन थियेटर भी चल रहा है। मरीजों की संख्या को देखते हुए पांच मॉड्यूलर ओटी भी बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा एक हाइब्रिड ओटी भी तैयार हो रहा है जिन्हें तैयार होने में करीब एक साल का समय लग सकता है।
सुविधाएं होंगी बेहतर
एम्स ट्रामा सेंटर के प्रमुख डॉ. कामरान फारूकी का कहना है कि हाइब्रिड ऑपरेशन थिएटर बनने के बाद बेहद गंभीर मरीजों को भी बेहतर और तुरंत उपचार मिल सकेगा। हम उम्मीद कर रहे हैं कि अगले एक साल में यह बनकर तैयार हो जाएगा।
देशभर से आते हैं मरीज
सड़क हादसों व अन्य तरीके से घायल होकर हर दिन काफी मरीज एम्स के ट्रामा सेंटर पहुंचते हैं। इन मरीजों के लिए दो जोन बनाए गए हैं। रेड जोन में 16 बेड हैं। इसमें गंभीर मरीजों को रखा जाता है। वहीं, यलो जोन में 25 बेड हैं इनमें कम गंभीर मरीजों को रखा जाता है। ट्रामा सेंटर में 250 बेड की व्यवस्था है। इन पर भर्ती मरीजों का उपचार होता है।