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रोज अंधेरे में पलायन कर रहे सैकड़ों लोग, रात में छोटे-छोटे बच्चों को गोद में लेकर पैदल जाती दिख रहीं महिलाएं
Wed, 25 Mar 2020 11:18 PM IST
Mohit Mudgal
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: Mohit Mudgal
Updated Wed, 25 Mar 2020 11:18 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : pti
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पूरे देश में लॉकडाउन के बाद कामकाजी गरीब तबके ने दिल्ली छोड़ना शुरू कर दिया है। सिर पर गठरी रखकर बच्चों को गोद में लेकर महिलाएं और पुरुष रात के अंधेरे में पैदल ही दिल्ली बॉर्डर पार करने का प्रयास कर रहे हैं। किसी तरह नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद की सीमा में प्रवेश करते ही इनमें खुशी दिखती है। इनमें से कुछ रुककर किसी सवारी का इंतजार करते हैं, जबकि बाकी पैदल ही आगे बढ़ जाते हैं।
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कोरोना वायरस के खौफ के बीच रात के अंधेरे में हाईवे पर इन दिनों गाड़ियों की भीड़ के बजाय सैकड़ों पैदल लोगों को भीड़ दिख रही है। पूछने पर इनका कहना है कि जब उनके पास कोई कामकाज ही नहीं है तो दिल्ली में रुकने का कोई मतलब नहीं बनता। बॉर्डर पर पुलिस की चेकिंग से बचने के लिए ये लोग रेलवे पटरियों का भी सहारा ले रहे हैं। उनका कहना है कि किसी तरह वह अपने गांव पहुंच जाएं, जिसके बाद दोबारा नए जीवन की शुरुआत का प्रयास करेंगे।
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एनएच-9 पर मंगलवार रात करीब 9 बजे सड़क के दोनों तरफ लोगों की भीड़ दिखी। ये लोग घरों तक पहुंचने के लिए किसी सवारी के इंतजार में थे। कभी कोई ट्रक उनके पास आकर रुकता तो सैकड़ों की भीड़ एक साथ उस ओर भागती। जिसे उस ट्रक में जानवरों की तरह लदने का मौका मिल गया, वह खुद को खुशकिस्मत महसूस करता है। जिन्हें ट्रक में जगह नहीं मिली, उन्होंने पैदल ही हापुड़ की ओर कदम बढ़ा दिए। कई किलोमीटर तक हाइवे पर केवल लोगों की ही भीड़ देखने को मिल रही है। इन लोगों का कहना है कि रात के वक्त पुलिस का पहरा कम होता है, इसलिए वे पूरे परिवार के साथ घर के लिए निकले हैं।
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इनमें से ज्यादातर लोग पूर्वांचल से सटे जिलों के हैं। इनमें से काफी लोगों को यह भी नहीं पता कि उन्हें अभी कितने किलोमीटर लंबा चलना है। उनके साथ पूरे जीवन की भी पूंजी है, जिसे वे गठरी में बांधे हुए हैं।
दोपहिया पर सैकड़ों किमी सफर का जोखिम
कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो घर जाने के लिए दोपहिया वाहनों का सहारा ले रहे हैं। एक ही बाइक पर सवार तीन से चार तक लोग जान जोखिम में डालकर गोरखपुर, बलिया और बनारस सहित अन्य जिलों तक पहुंचने के प्रयास में हैं। ये जिले सैकड़ों किमी दूर हैं, इसके बावजूद उनका लक्ष्य रहता है कि सूरज निकलने से पहले वे अपने घर के दरवाजे तक किसी तरह पहुंच जाएं। लोगों का कहना है कि वे मुसीबत की घड़ी में सरकार का पूरा साथ दे रहे हैैं, लेकिन सरकार को चाहिए कि उन्हें घर तक पहुंचाने का उचित इंतजाम कर दे।
कारवाले वसूल रहे मनमाना किराया
पैदल ही घर के लिए निकले राहगीरों को बिठाने के लिए कुछ कार चालक मनमाना किराया वसूूल रहे हैं। कई बार तो ये उनसे मोटी रकम लेकर घरों तक पहुंचाने का भी सौदा कर रहे हैं। ऐसा ही हाल फरीदाबाद के मथुुरा हाईवे का भी है। यहां पुलिस से बचने के लिए लोग कालिंदी कुंज के नहर वाले रास्ते से हरियाणा की ओर जा रहे हैं।