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Human Trafficking: बड़े गिरोह का भंडाफोड़, दो वर्षों में 500 लोगों की तस्करी कर चुका है गैंग; चार गिरफ्तार

Thu, 28 Aug 2025 03:38 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 28 Aug 2025 03:38 AM IST
सार

गिरोह के सदस्य रेलवे स्टेशनों पर कमजोर नाबालिगों और मजदूरों को निशाना बनाकर जम्मू-कश्मीर भेजते थे। वहां उन्हें बिना पैसे दिए घरेलू कार्य और बंधुआ मजदूरी कराई जाती थी।

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Human trafficking racket busted, four arrested
Demo - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली पुलिस की बाहरी-उत्तरी जिला पुलिस ने मानव तस्करी के एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से एक किशोर और दो नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया है। गिरोह के सदस्य रेलवे स्टेशनों पर कमजोर नाबालिगों और मजदूरों को निशाना बनाकर जम्मू-कश्मीर भेजते थे। वहां उन्हें बिना पैसे दिए घरेलू कार्य और बंधुआ मजदूरी कराई जाती थी। पुलिस उपायुक्त हरेश्वर स्वामी ने बताया कि किशोरों के लिए 20 हजार से 25 हजार जबकि लड़कियों के एवज में 60 हजार रुपये तक वसूलते थे।
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बाहरी-उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त हरेश्वर स्वामी के अनुसार यह गिरोह दलालों और प्लेसमेंट एजेंटों के नेटवर्क के जरिये काम करता था। ये पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन सहित विभिन्न स्थानों पर गरीब और बेसहारा बच्चों और मजदूरों को बेहतर खानपान और रुपयों का लालच देकर फंसाते थे।
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पुलिस उपायुक्त स्वामी ने बताया कि गिरोह के सदस्य गांदरबल (जम्मू-कश्मीर) निवासी सलीम-उल-रेहमान उर्फ वसीम (38), बेगमपुर (दिल्ली) निवासी सूरज (31), रामपुर (उत्तर प्रदेश) निवासी मोहम्मद तालीब और बाराबंकी (उत्तर प्रदेश) निवासी सतनाम सिंह उर्फ सरदार को गिरफ्तार किया गया है।
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सलीम पिछले दो वर्षों के दौरान 500 लोगों की तस्करी कर चुका है और प्रत्येक पीड़ित के बदले भारी कमीशन वसूला है। तालीब के पास से यूपी पुलिस के उप-निरीक्षक का फर्जी पहचान पत्र भी बरामद हुआ है। आरोपी इसका इस्तेमाल गिरफ्तारी से बचने और पीड़ितों की यात्रा को आसान बनाने के लिए करता था।

ऐसे खुला मामला
उपायुक्त स्वामी ने बताया कि इस गिरोह का खुलासा उस समय हुआ जब भलस्वा डेरी थाने में 15 और 13 साल की दो लड़कियों के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई गई। टेक्निकल सर्विलांस के जरिये इन लड़कियों की लोकेशन श्रीनगर में ट्रेस की गई। पुलिस टीम ने 15 जून को दोनों नाबालिगों को श्रीनगर से सुरक्षित बरामद कर लिया और दोनों को दिल्ली लाया गया।

बाल कल्याण समिति के समक्ष दर्ज बयान में पीड़ितों ने बताया कि उन्हें पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से बहलाया-फुसलाया गया और फिर श्रीनगर ले जाकर जबरन घरेलू काम कराया गया। बयानों के आधार पर 14 अगस्त को वसीम और सूरज को प्रहलाद विहार से गिरफ्तार किया गया।

एजेंसी चलाता था
पुलिस अधिकारियों के अनुसार सलीम ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह श्रीनगर में ''''वीए मैनपावर प्राइवेट लिमिटेड नामक एजेंसी चलाता था और पिछले दो साल में 500 लोगों को कश्मीर में बेच चुका है। सूरज ने बताया कि वह दिल्ली में एजेंटों के लिए ट्रांसपोर्टर का काम करता था और उसने पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के आसपास सक्रिय कई साथियों के नाम बताए।


एक और किशोर को बरामद किया गया
पुलिस ने 19 अगस्त को श्रीनगर में की गई छापेमारी के दौरान तालीब और सतनाम को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने इनके कब्जे से 16 वर्षीय एक किशोर को मुक्त कराया था। उन्होंने बताया कि गिरोह के अन्य सदस्यों शहबाज खान, नरेश, रोहित पांडे और सोहेल अहमद की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस यूपीआई लेनदेन की जांच कर रही है और तस्करी में प्रयुक्त वाहनों की पहचान भी कर रही है।
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