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खुलासा: डब्ल्यूएचओ की टीम पुलिस लेकर गई थी निजामुद्दीन, समझाने के बाद खोला था दरवाजा

Tue, 31 Mar 2020 12:41 AM IST
Vikas Kumar पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 31 Mar 2020 12:41 AM IST
सार

दिल्ली पुलिस ने 23 मार्च को ही दी थी जानकारी
27 मार्च को 204 कोरोना संदिग्ध लोगों को अस्पतालों में लाया गया था

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How such a large number of people gathered in Nizamuddin Markaz arised these five questions
निजामुद्दीन मरकज - फोटो : Social Media

विस्तार

निजामुद्दीन इलाके में थाने के पीछे स्थित मरकज में बड़ी संख्या में लोगों के एकत्रित होने की सूचना दिल्ली पुलिस को करीब एक सप्ताह पूर्व 23 मार्च को ही मिल गई थी। इसके बाद पुलिस ने आयोजकों से कहा कि लोगों के बीच दूरी बनाकर रखी जाए। पुलिस ने आयोजकों को थाने में बुलाकर उन्हें समझाया और नोटिस भी दिया। इसके बाद 27 मार्च को डब्ल्यूएचओ की टीम पुलिस को लेकर मरकज गई थी, लेकिन काफी देर समझाइश के बाद दरवाजा खोला।

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इस दौरान वहां जांच में कोरोना संदिग्ध पाए गए 204 लोगों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती करवाया, जिनमें से 6 लोगों में रविवार को संक्रमण में पुष्टि हुई। इसके बाद 28 मार्च को एसीपी लाजपतनगर ने आयोजकों को फिर से नोटिस भेजा। दिल्ली सरकार को भी जानकारी दी गई। इसके बावजूद दिल्ली सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
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दक्षिण-पूर्व जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी का दावा है कि यह सूचना तभी दिल्ली सरकार और एसडीएम को दे दी गई थी। बताया जा रहा है कि संबंधित एजेंसियों की टीमों ने मौका मुआयना भी किया और डॉक्टरों की टीम भी भेजी गई थीं, परंतु सब खानापूर्ति की गई थी।

यहां से लोगों को निकालने के लिए कुछ नहीं किया गया। क्वारंटीन करने के नाम पर लोगों को मरकज में ही बंद कर दिया गया था। अधिकारी दावा कर रहे हैं कि मेडिकल सुविधाएं दी गई थीं।

एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जब यहां के लोगों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ये लोगों को धर्म से अलग करने की साजिश है। कोरोना कुछ भी नहीं है। ये भी कहा जा रहा है कि यहां के एक वरिष्ठ मौलाना कुछ दिन पहले यहां से चले गए थे और वह जाकिर नगर में रहने लगे थे।

उठे रहे ये 5 सवाल 

. यहां लोगों को एकत्रित क्यों होने दिया गया था?
. पास में थाना होने के बाद भी पुलिस ने क्यों नजर नहीं रखी और जानकारी के बाद भी सख्त कदम क्यों नहीं उठाए?
. मेडिकल सुविधाएं देने के बावजूद लोग कैसे कोरोना की चपेट में आए गए?
. दिल्ली सरकार व एसडीएम ने समय से क्यों कदम नहीं उठाए?
. यहां से देश के हिस्सों में गए लोगों की जानकारी कैसे मिलेगी?
 

डब्ल्यूएचओ की टीम भी पहुंची

देर शाम निजामुद्दीन मरकज में विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम भी पहुंची। फिलहाल, निजामुद्दीन थाने से लेकर गालिब अकादमी तक के रास्ते को पूरी तरह सील कर दिया गया है। डॉक्टरों के लिए कैंप ऑफिस बना दिए गए। 

दिल्ली सरकार ने पुलिस से तबलीगी जमात के आयोजकों के खिलाफ मामला दर्ज करने को कहा है। इसके तहत देर रात तक आपराधिक लापरवाही का मामला दर्ज कर सकती है।

दिल्ली सरकार का कहना है कि जमात के आयोजकों ने लॉकडाउन के तहत जारी निर्देशों का उल्लंघन करने के साथ बड़ी संख्या में लोगों की जान को भी संकट में डाला है। ऐसे में आयोजकों के खिलाफ आपराधिक मामला बनता है।

दिल्ली सरकार ने कहा, आयोजकों पर दर्ज हो केस

निजामुद्दीन में भीड़ एकत्र होने के मामले में पुलिस ने आयोजकों को नोटिस भेजकर जवाब-तलब किया है। आयोजकों ने पुलिस को बताया कि यहां पर जलसा पहले से ही चल रहा था। इस बीच 22 मार्च को प्रधानमंत्री ने जनता कर्फ्यू का आह्वान किया। उसका पालन करने के लिए लोग मरकज में ही रुक गए थे।

इसके बाद 23 मार्च को ही लॉकडाउन की घोषणा हो गई। उस दिन भी मरकज से से लोग बाहर नहीं जा सके। सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने गृह मंत्रालय को रिपोर्ट भेज दी है। बताया जा रहा है कि निजामुद्दीन थाने के कई पुलिसकर्मी भी कोरोना संदिग्ध के दायरे में हैं।

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