अपनी मौत का नाटक रचने वाले ने बताया जेलों का सच, ‘अपनों के अंतिम संस्कार में नहीं जा पाते आम बंदी’
खुद की मौत का स्वांग कर विक्षिप्त की हत्या में जेल में बंद रहे चंद्रमोहन शर्मा ने आम बंदियों की समस्याओं के समाधान के लिए कानून मंत्रालय, मानवाधिकार आयोग, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री समेत अन्य को पत्र लिखा है।
जमानत पर बाहर आने के बाद हरियाणा के हिसार में रहकर ऑटो चला रहे चंद्रमोहन ने पत्र में अपनों की मौत होने पर आम बंदियों को पैरोल न मिलने की समस्या को प्रमुखता से उठाया है।
अपने पत्र में चंद्रमोहन ने कहा है कि कानून और मानवाधिकार आयोग के निर्देशों के अनुसार अगर किसी बंदी के परिजन की मौत होती है तो उसे तुरंत कस्टडी पैरोल मिलनी चाहिए। तत्काल कस्टडी पैरोल देने का अधिकार जिला मजिस्ट्रेट को होता है लेकिन विभिन्न कारणों के चलते आम बंदियों को पैरोल नहीं मिल पाती।
पैरोल की मांग की थी लेकिन उसे पैरोल नहीं मिल पाई
चंद्रमोहन ने बताया कि 10 अक्तूबर 2016 को उसके भाई जॉनी की मौत हो गई थी। उसने पैरोल की मांग की थी लेकिन उसे पैरोल नहीं मिल पाई। चंद्रमोहन का कहना है कि आम बंदी अगर कोर्ट से पैरोल की मांग करे तो वकील से संपर्क, करने याचिका दाखिल करने और सुनवाई होने में कई बार इतना समय लग जाता है कि तब तक तेरहवीं भी हो जाती है।
उसके ही जैसे न जाने कितने आम बंदियों की यह समस्या है। चंद्रमोहन का कहना है कि हालांकि कुछ खास बंदी विशेष प्रयास कर पैरोल पाकर चले जाते हैं। इसके अलावा चंद्रमोहन ने कुछ बुजुर्ग बीमार बंदियों की रिहाई कराने के प्रयास शुरू करने की भी मांग की है।
हमारे पास जो भी पैरोल के लिए प्रार्थना पत्र आते हैं। उन्हें जिला प्रशासन को अग्रसारित कर दिया जाता है। कुछ बंदियों को पैरोल पर अंतिम संस्कार आदि में शामिल होने के लिए भेजा भी गया है। - विपिन कुमार मिश्र, जेल अधीक्षक, गौतमबुद्ध नगर जिला कारागार