केंद्र पर भारी पड़ रही थी दिल्ली की बीमारी, इसलिए रण में कूदे गृहमंत्री अमित शाह
- रविवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपराज्यपाल अनिल बैजल, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन और तीनों नगर निगम के नेताओं के साथ की संयुक्त बैठक
- कुछ ही दिनों में बिहार में चुनाव का सामना करना है। अगर केंद्र सरकार यहां असफल होती है, तो उसे बिहार में इस सवाल का जवाब देना पड़ सकता है
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रविवार को उन्होंने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपराज्यपाल अनिल बैजल, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन और तीनों नगर निगम के नेताओं के साथ संयुक्त बैठक की और राजधानी में कोरोना को काबू में लाने के उपायों पर मंथन किया।
माना जा रहा है कि दिल्ली में कोरोना की स्थिति बिगड़ने से सीधे केंद्र सरकार की छवि को नुकसान पहुंच रहा था, इसीलिए केंद्र सरकार की छवि बचाने के लिए गृह मंत्रालय सक्रिय हुआ।
इस तरह हो रहा था नुकसान
दरअसल, दिल्ली की प्रशासकीय स्थिति अलग होने के कारण यहां हर कार्य में दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच में बार-बार टकराव होता रहा है। दोनों के अधिकार क्षेत्र के मामले कई बार सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुके हैं।
हाल ही में उपराज्यपाल अनिल बैजल ने दिल्ली सरकार के उन फैसलों को पलट दिया, जिसमें उन्होंने दिल्ली के अस्पतालों में केवल दिल्ली के लोगों का इलाज करने की बात कही थी।
आम आदमी पार्टी और भाजपा में उस समय भी टकराव दिखा, जब दिल्ली सरकार ने कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा एक हजार के करीब दिखाया, तब भाजपा शासित तीनों नगर नगम के नेताओं ने संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस कर यह बताया कि राजधानी में कोरोना से मौत का आंकड़ा दो हजार के पार जा चुका है।
कांग्रेस नेता पीएल पूनिया कहते हैं कि देश देख रहा है कि केंद्र सरकार उपराज्यपाल के माध्यम से दिल्ली के हर काम में दखल देती रहती हैं।
ऐसे में अगर कोरोना के हालात बेकाबू होते हैं तो देश प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से यह सवाल जरूर पूछता कि आपने उस समय दखल क्यों नहीं दिया जब दिल्ली में कोरोना के हालत बेकाबू हो रहे थे?
यह स्थिति भाजपा को असहज कर सकती थी। यही कारण है कि अचानक केंद्र सरकार दिल्ली की स्थिति को संभालने के लिए सक्रिय हो उठी है।
क्या बिहार चुनाव पर भी पड़ता असर
पूनिया का कहना है कि कुछ ही दिनों में बिहार में चुनाव का सामना करना है। अगर केंद्र सरकार यहां असफल होती है, तो उसे बिहार में इस सवाल का जवाब देना पड़ सकता है।
जनता पूछ सकती है कि अगर प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, स्वास्थ्यमंत्री, उपराज्यपाल और नगर निगम तक पूरी मशीनरी हाथ में रहने के बाद भी अगर भाजपा दिल्ली नहीं संभाल सकी तो वह बिहार की स्थिति को कैसे कंट्रोल करेगी?
अमित शाह को इस सवाल का बखूबी अंदाजा है, यही कारण है कि अब वे आगे बढ़कर स्थिति कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं।
सबको साथ लेने का काम भी केवल दिखावा
अमित शाह ने सोमवार को दिल्ली के सभी राजनीतिक दलों की एक संयुक्त बैठक बुलाई है। इस बैठक में दिल्ली के सभी राजनीतिक दलों का साथ लेकर कोरोना से निबटने की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
पूनिया कहते हैं कि सभी दलों को साथ लेने की यह कोशिश केवल मीडिया को दिखाने का काम है। अगर भाजपा सबको साथ लेकर कोरोना से निबटना चाहती है तो उत्तर प्रदेश में वह विपक्ष की आवाज बंद करने की कोशिश क्यों कर रही है जहां श्रमिकों और गरीबों की आवाज उठाने के कारण कांग्रेस नेता अजय लल्लू को जेल में डाल दिया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार को सबको साथ लेकर आगे बढ़ना चाहिए क्योंकि यह ऐसी बीमारी है, जिसे सरकार भी अकेले के दम पर नहीं हरा सकती। उसे सबको साथ लेना चाहिए।
निचले स्तर को साथ लिए बिना सफलता संभव नहीं
अमित शाह के साथ रविवार की बैठक में शामिल एनडीएमसी के नेता अवतार सिंह कहते हैं कि कोरोना से निबटने के मामले में कोई सरकार तब तक सफल नहीं हो सकती जब तक कि प्रशासन के सबसे निचले स्तर तक से पूरा सहयोग नहीं लिया जाता।
उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार नगर निगमों से पूरा सहयोग नहीं ले रही है। कोरोना के संकट काल में भी उनके लिए डॉक्टरों को वेतन देना संभव नहीं हो पा रहा है, क्योंकि दिल्ली सरकार उन्हें फंड नहीं दे रही है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली के सबसे निचले स्तर तक साफ-सफाई करने, लोगों को प्राथमिक सुविधाएं पहुंचाने और प्राथमिक इलाज करने का काम नगर निगमों से बेहतर कोई दूसरा नहीं कर सकता।
संक्रमित लोगों की मदद करने और वे संक्रमण न फैलाएं, इसके लिए उन पर जरूरी निगाह रखना भी नगर निगमों के सहयोग के बिना संभव नहीं हो सकता।
यह तथ्य समझने के बाद भी सरकार हमारा पूरा सहयोग नहीं ले रही थी। दिल्ली के कोरोना की लड़ाई में पिछड़ने का यह भी एक कारण हो सकता है।
उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि अब केंद्र, दिल्ली सरकार और नगर निगम एकजुट होकर कोरोना की लड़ाई लड़ेंगे और इससे जीतेंगे।