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हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने चुकाए 26 करोड़, प्राधिकरण का बकाया था किराया
Sat, 16 Mar 2019 03:41 AM IST
vivek shukla
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 16 Mar 2019 03:41 AM IST
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हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड
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प्राधिकरण की परिसंपत्तियों पर काम करने वाली कंपनियों व एजेंसियों पर करोड़ों रुपये का किराया बकाया है। नोएडा प्राधिकरण ने बकाया चुकाने के लिए अंतिम नोटिस जारी किया है। ऐसे में पेट्रोलियम कंपनियों ने नोएडा में चल रहे आउटलेट्स और पेट्रोल पंप के एवज में बकाया किराया चुकाना शुरू कर दिया है।
शुक्रवार को हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने तय की गई राशि करीब 26 करोड़ रुपये प्राधिकरण को चुकाए। वहीं, इससे पहले भारत पेट्रोलियम ने करीब 4.5 करोड़ और आईओसीएल ने 56 करोड़ रुपये चुकाए हैं। इधर, सेक्टर-95 में भारत पेट्रोलियम का एक आउटलेट प्राधिकरण निरस्त कर चुका है। इसे लेकर एक प्रत्यावेदन पर प्राधिकरण के सीईओ आलोक टंडन ने शुक्रवार को सुनवाई की। कंपनी की ओर से इसके लिए प्रत्यावेदन दिया गया था।
बैंकों को दिया गया अंतिम नोटिस
अधिकारियों के मुताबिक, शहर के आठ बैंकों को प्राधिकरण ने जगह खाली करने का अंतिम नोटिस दे दिया है। इसमें सभी बड़े बैंक शामिल हैं। दबाव के बाद सिंडिकेट बैंक ने अपने उच्चाधिकारियों के हवाले से बताया कि वह 1.7 करोड़ का बकाया चुकाएंगे।
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इसके अलावा एसबीआई, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, केनरा बैंक, विजया बैंक, पीएनबी आदि ने पैसे नहीं जमा कराए हैं। साथ ही, किसी तरह का आश्वासन भी नहीं दिया है। प्राधिकरण के एसीईओ इंद्र विक्रम सिंह का कहना है कि ऐसे बैंकों से जगह खाली कराई जाएगी और उनको दूसरों को किराये पर दिया जाएगा।
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शुक्रवार को हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने तय की गई राशि करीब 26 करोड़ रुपये प्राधिकरण को चुकाए। वहीं, इससे पहले भारत पेट्रोलियम ने करीब 4.5 करोड़ और आईओसीएल ने 56 करोड़ रुपये चुकाए हैं। इधर, सेक्टर-95 में भारत पेट्रोलियम का एक आउटलेट प्राधिकरण निरस्त कर चुका है। इसे लेकर एक प्रत्यावेदन पर प्राधिकरण के सीईओ आलोक टंडन ने शुक्रवार को सुनवाई की। कंपनी की ओर से इसके लिए प्रत्यावेदन दिया गया था।
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बैंकों को दिया गया अंतिम नोटिस
अधिकारियों के मुताबिक, शहर के आठ बैंकों को प्राधिकरण ने जगह खाली करने का अंतिम नोटिस दे दिया है। इसमें सभी बड़े बैंक शामिल हैं। दबाव के बाद सिंडिकेट बैंक ने अपने उच्चाधिकारियों के हवाले से बताया कि वह 1.7 करोड़ का बकाया चुकाएंगे।
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इसके अलावा एसबीआई, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, केनरा बैंक, विजया बैंक, पीएनबी आदि ने पैसे नहीं जमा कराए हैं। साथ ही, किसी तरह का आश्वासन भी नहीं दिया है। प्राधिकरण के एसीईओ इंद्र विक्रम सिंह का कहना है कि ऐसे बैंकों से जगह खाली कराई जाएगी और उनको दूसरों को किराये पर दिया जाएगा।