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Delhi NCR News: हाईकोर्ट ने सीलमपुर में संपत्ति बेदखली के आदेश बरकरार, याचिका खारिज
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने नई सीलमपुर में एक संपत्ति से बेदखली के आदेशों को बरकरार रखते हुए याचिकाकर्ताओं की याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की एकल पीठ ने 25 मार्च 2026 को दिए गए फैसले में कहा कि लाइसेंस आधार पर आवंटित प्लॉट को बिना अनुमति के बेचना अवैध है, इसलिए याचिकाकर्ताओं को कोई कानूनी अधिकार नहीं बनता।
याचिकाकर्ता मोहम्मद यासीन एवं अन्य ने अपने पिता के नाम 1989 में बिहारी लाल से खरीदी गई संपत्ति को बचाने के लिए याचिका दायर की थी। उन्होंने लेफ्टिनेंट गवर्नर के 26 नवंबर 2025 के आदेश और डूसिब के 17 मई 2024 तथा 4 नवंबर 2024 के बेदखली आदेशों को रद्द करने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि प्लॉट 14 सितंबर 1965 को बिहारी लाल को आवासीय प्रयोजन के लिए लाइसेंस आधार पर आवंटित किया गया था। यह प्लॉट लाइसेंस शर्तों का उल्लंघन करते हुए तीसरे पक्ष को हस्तांतरित कर दिया गया और व्यावसायिक उपयोग में लाया गया। याचिकाकर्ताओं के पिता को बिना डूसिब की अनुमति के प्लॉट बेचा गया, इसलिए उनमें कोई वेस्टेड अधिकार नहीं बना।
न्यायमूर्ति ने कहा कि लाइसेंस आधार पर आवंटित प्लॉट को बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बेचा नहीं जा सकता। याचिकाकर्ता किसी भी दस्तावेज या लाइसेंस का हवाला नहीं दे सके जो उनके पक्ष में हो। इसलिए वे सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा कर रहे हैं।
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने नई सीलमपुर में एक संपत्ति से बेदखली के आदेशों को बरकरार रखते हुए याचिकाकर्ताओं की याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की एकल पीठ ने 25 मार्च 2026 को दिए गए फैसले में कहा कि लाइसेंस आधार पर आवंटित प्लॉट को बिना अनुमति के बेचना अवैध है, इसलिए याचिकाकर्ताओं को कोई कानूनी अधिकार नहीं बनता।
याचिकाकर्ता मोहम्मद यासीन एवं अन्य ने अपने पिता के नाम 1989 में बिहारी लाल से खरीदी गई संपत्ति को बचाने के लिए याचिका दायर की थी। उन्होंने लेफ्टिनेंट गवर्नर के 26 नवंबर 2025 के आदेश और डूसिब के 17 मई 2024 तथा 4 नवंबर 2024 के बेदखली आदेशों को रद्द करने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि प्लॉट 14 सितंबर 1965 को बिहारी लाल को आवासीय प्रयोजन के लिए लाइसेंस आधार पर आवंटित किया गया था। यह प्लॉट लाइसेंस शर्तों का उल्लंघन करते हुए तीसरे पक्ष को हस्तांतरित कर दिया गया और व्यावसायिक उपयोग में लाया गया। याचिकाकर्ताओं के पिता को बिना डूसिब की अनुमति के प्लॉट बेचा गया, इसलिए उनमें कोई वेस्टेड अधिकार नहीं बना।
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न्यायमूर्ति ने कहा कि लाइसेंस आधार पर आवंटित प्लॉट को बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बेचा नहीं जा सकता। याचिकाकर्ता किसी भी दस्तावेज या लाइसेंस का हवाला नहीं दे सके जो उनके पक्ष में हो। इसलिए वे सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा कर रहे हैं।
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