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Delhi: हाईकोर्ट से भाजपा के सात विधायकों को राहत, अदालत ने निलंबन किया रद्द

Wed, 06 Mar 2024 02:44 PM IST
विजय पुंडीर एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Wed, 06 Mar 2024 02:44 PM IST
सार

70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा में भाजपा के आठ विधायक हैं। इनमें से सात भाजपा विधायकों को उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के अभिभाषण को बाधित करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया था।

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High Court sets aside suspension of seven BJP MLAs from Delhi's Legislative Assembly for an indefinite time
Delhi high court - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

उच्च न्यायालय ने बुधवार को भाजपा को राहत देते हुए सदन से निलंबित सातों विधायकों को बहाल कर दिया। विधानसभा अध्यक्ष ने सदन में उपराज्यपाल के अभिभाषण के दौरान कथित तौर पर हंगामा करने पर सभी को सदन से निलंबित कर दिया था। विधायकों द्वारा स्पीकर के फैसले को चुनौती देने के लिए उच्च न्यायालय का रुख करने के बाद न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने यह आदेश पारित किया।

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70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा में भाजपा के आठ विधायक हैं। इनमें से सात भाजपा विधायकों को उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के अभिभाषण को बाधित करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया था। निलंबित विधायकों में विजेंद्र गुप्ता, अजय कुमार महावर, अनिल कुमार बाजपेयी, ओम प्रकाश शर्मा, जितेंद्र महाजन, मोहन सिंह बिष्ट और अभय वर्मा शामिल हैं।
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एक विस्तृत फैसले में उच्च न्यायालय ने माना कि विधानसभा अध्यक्ष जो एक निष्पक्ष मध्यस्थ है और सदन का संचालन करते हैं, उसने स्वतंत्र रूप से कोई निर्णय नहीं लिया है और यह नहीं माना है कि मामला ऐसा है जिसे विशेषाधिकार समिति को भेजे जाने की आवश्यकता है। अदालत ने कहा, विशेषाधिकार समिति द्वारा मामले पर निर्णय लेने तक निलंबन की सजा देते समय याचिकाकर्ताओं को नहीं सुना गया। उन्होंने कहा कि इसका नतीजा यह है कि अध्यक्ष द्वारा स्वतंत्र रूप से अपना दिमाग लगाए बिना मुद्दे को विशेषाधिकार समिति के समक्ष भेजने का सदन का निर्णय निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन है।
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कोर्ट ने कहा चूंकि याचिकाकर्ता पहले ही 14 बैठकों के निलंबन का सामना कर चुके हैं, इसलिए इस अदालत की राय है कि याचिकाकर्ताओं को तुरंत सदन में फिर से शामिल होने की अनुमति दी जानी चाहिए।
 

सात भाजपा विधायकों- मोहन सिंह बिष्ट, अजय महावर, ओ.पी. शर्मा, अभय वर्मा, अनिल वाजपेई, जीतेंद्र महाजन और विजेंदर गुप्ता ने विधानसभा के शेष बजट सत्र के लिए अपने निलंबन को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी सदस्यों को चर्चा में भाग लेने से अक्षम करने के लिए दुर्भावनापूर्ण ढंग से योजना बनाई गई।



15 फरवरी को आप सरकार की उपलब्धियों को उजागर करने वाले उपराज्यपाल के अभिभाषण को कथित रूप से बाधित करने के लिए सदस्यों को निलंबित कर दिया गया था। विधायकों ने अपने निरंतर निलंबन के बारे में चिंता व्यक्त की और संभावित विवादास्पद माहौल का संकेत देने वाली हालिया राजनीतिक टिप्पणियों और संदेशों का विरोध किया। विधायकों के वरिष्ठ वकील जयंत मेहता ने 19 फरवरी को दलील दी थी कि निलंबन असंवैधानिक और नियमों के विपरीत है, जिससे कार्यवाही में भाग लेने का उनका अधिकार प्रभावित होता है।

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