दृष्टिबाधित छात्रों को लेखक मुहैया करवाना डीयू की जिम्मेदारी: हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने ओपन बुक एग्जाम (ओबीई) की तैयारियों पर नाराजगी जाहिर करते हुए बृहस्पतिवार को दिल्ली विश्वविद्यालय से पूछा कि ओबीई में दृष्टिबाधित छात्रों को लेखक मुहैया कराने की क्या व्यवस्था है। इन छात्रों को ओबीई के लिए लेखक मुहैया करवाना डीयू की जिम्मेदारी है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो ओबीई केवल एक मजाक बनकर रह जाएगा।
न्यायमूर्ति हिमा कोहली तथा न्यायमूर्ति एस. प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि चीजें बिल्कुल भी स्पष्ट नहीं है। कोर्ट को संतुष्ट करने के लिए अब तक कुछ नहीं दिखाया गया है। दृष्टिबाधित छात्रों के संबंध में ऐसा कुछ भी रिकार्ड पर नहीं है जिससे कोर्ट प्रभावित हो। कोर्ट ने ओबीई के मॉक टेस्ट के दोनों चरणों का विवरण टेबल के रूप में पेश करने का निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई के लिए पांच अगस्त की तारीख तय की है।
डीयू की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सचिन दत्ता ने कहा कि कोर्ट के समक्ष मॉक टेस्ट का जो डाटा पेश किया गया है वह मॉक टेस्ट के पहले दो दिनों का है न कि पूरे पहले चरण का। उन्होंने कहा कि चार अगस्त तक स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी। खंडपीठ ने डीयू के वकीलो से पूछा कि मॉक टेस्ट का दूसरा चरण कब पूरा होगा तो इसके जवाब में अधिवक्ता एम. रूपल ने बताया कि यह चार अगस्त को पूरा हो जाएगा।
नेशनल फेडरेशन ऑफ ब्लाइंड की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एसके रूंगटा ने डीयू के 180 दृष्टिबाधित छात्रों को लेखक, पाठन सामग्री तथा सहायक उपकरण लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिल रहा है।
कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि विशेष जरूरत वाले 647 छात्रों में से केवल 486 ने ही मॉक टेस्ट के लिए लॉग इन किया था। वहीं 182 दृष्टिबाधित छात्रों में से केवल 50 फीसदी ने मॉक टेस्ट के लिए लॉग इन किया और उनमें से भी बेहद कम ने उत्तर पुस्तिका पोर्टल पर अपलोड की थी।
खंडपीठ ने दूर दराज के उन दृष्टिबाधित छात्रों के बारे में पूछा जिनके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है। इस बात पर भी गौर किया कि इस संबंध में सरकारी विभागों द्वारा दी गई जानकारी पूरी तरह सही नहीं है।
हालांकि दूसरी ओर सचिन दत्ता ने कहा कि ओबीई पूरी तरह स्वैच्छिक है और यह छात्र बाद में होने वाली परीक्षा में व्यक्तिगत रूप से शामिल हो सकते हैं और मांगे जाने पर दृष्टिबाधित छात्रों को डीयू लेखक उपलब्ध करवाएगा। कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि मॉक टेस्ट के पहले चरण में 74180 छात्रों ने हिस्सा लिया था।
सुप्रीम कोर्ट में लंबित है मुद्दा, हाईकोर्ट ने दी याचिका वापस लेने की अनुमति
अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को अनिवार्य रूप से कराने वाले यूजीसी के दिशानिर्देश से जुड़ा मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इसके ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने आदेश को चुनौती देने वाली याचिका वापस लेने की अनुमति याची छात्र को प्रदान कर दी।
न्यायमूर्ति जयंत नाथ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई करते हुए न केवल याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी बल्कि सुप्रीम कोर्ट जाने की छूट भी छात्र को प्रदान कर दी। यह याचिका दायर कर डीयू के अंतिम वर्ष के छात्र कबीर सचदेवा ने यूजीसी के छह जुलाई के उस दिशानिर्देश को चुनौती थी जिसमें अंतिम वर्ष की परीक्षा अनिवार्य रूप से ऑनलाइन, ऑफलाइन अथवा मिश्रित रूप से सितंबर अंत तक कराने का आदेश सभी कॉलेजों को दिया गया है।