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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   High Court said that it is legally wrong to convertplace of worship into house and claim possession

Delhi: उपासना स्थल को घर में बदलना और कब्जे का दावा करना कानूनन गलत, अदालत ने कहा- इसे तुरंत रोका जाना चाहिए

Tue, 14 Mar 2023 03:52 AM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: आकाश दुबे Updated Tue, 14 Mar 2023 03:52 AM IST
सार

जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने कहा, कुछ मामलों में अदालत ने देखा है कि कुछ उपासना स्थलों को आवंटित भूमि से आगे बढ़ाकर व्यावसायिक संपत्ति में परिवर्तित कर दिया जाता है। उस जगह के लिए अवैध और अनधिकृत तरीके से किराया/पट्टे की राशि वसूलने की भी मांग की जाती है।

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High Court said that it is legally wrong to convertplace of worship into house and claim possession
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : पीटीआई

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, सार्वजनिक उपासना स्थलों पर वहां के मौलवी, पादरी, इमाम, पंडितों व सेवाकारों का कब्जा करना, उसमें परिवार के साथ रहना और उसके निजी संपत्ति होने का दावा करना कानूनन गलत है। हाईकोर्ट ने कहा, यह प्रथा चिंताजनक है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी दिल्ली के इंडिया गेट के पास मान सिंह रोड पर मस्जिद जाब्ता गंज के बगल में स्थित एक प्रमुख संपत्ति पर दावे को खारिज करते हुए की।

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जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने कहा, कुछ मामलों में अदालत ने देखा है कि कुछ उपासना स्थलों को आवंटित भूमि से आगे बढ़ाकर व्यावसायिक संपत्ति में परिवर्तित कर दिया जाता है। उस जगह के लिए अवैध और अनधिकृत तरीके से किराया/पट्टे की राशि वसूलने की भी मांग की जाती है। वर्तमान मामले को ही देख लें, यह स्पष्ट नहीं है कि किस आधार पर याचिकाकर्ता ने ‘श्रमिकों’ के रूप में वर्णित इतने सारे व्यक्तियों को संपत्ति में शामिल किया और वे कई वर्षों तक संपत्ति पर कब्जा बनाए रहे। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को अनधिकृत कब्जाधारी बताते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने कहा, याचिकाकर्ता ने दिल्ली वक्फ बोर्ड की संपत्ति पर अवैध कब्जा किया है। 
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चार सप्ताह के अंदर सीमांकन के आदेश : हाईकोर्ट ने दिल्ली वक्फ बोर्ड के अधिकारियों के साथ संबंधित एसडीएम को चार सप्ताह के भीतर मस्जिद के लिए आवंटित भूमि का उचित सीमांकन कराने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने निर्देश पारित किया कि वक्फ बोर्ड 3 जुलाई, 1945 को पंजीकृत समझौते के संदर्भ में जारी गजट अधिसूचना के माध्यम से उसे आवंटित भूमि को सुरक्षित करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि 0.095 एकड़ से अधिक भूमि पर वर्तमान इमाम, उसके परिवार या उसकी ओर से रहने वालों व्यक्ति समेत किसी का कब्जा न हो।
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आठ सप्ताह में दिल्ली वक्फ बोर्ड को 15 लाख चुकाने का आदेश
अदालत ने याचिकाकर्ता को आठ सप्ताह के भीतर दिल्ली वक्फ बोर्ड को 15 लाख रुपये भुगतान करने का निर्देश दिया। इसके अलावा, उसे 8 सप्ताह के भीतर दिल्ली वक्फ बोर्ड के पास मुकदमेबाजी की लागत के रूप में 2 लाख रुपये भी जमा करने को कहा है।


मस्जिद की संपत्ति पर दावा नहीं किया जा सकता 
हाईकोर्ट ने कहा, याचिकाकर्ता और जिन तीन व्यक्तियों का उसने प्रतिनिधित्व किया, वे स्पष्ट रूप से अनधिकृत कब्जेदार और अतिक्रमणकारी हैं, जिनका संपत्ति में कोई अधिकार नहीं था। एक इमाम का परिवार मस्जिद की संपत्ति में किसी भी अधिकार का दावा नहीं कर सकता है, क्योंकि संपत्ति वक्फ में निहित है। इमाम को केवल प्रार्थना करने और वक्फ संपत्ति की देखभाल करने के उद्देश्य से नियुक्त किया जाता है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में दलील दी कि वह और उसका परिवार कई दशकों से इस संपत्ति पर रह रहे हैं।

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