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Delhi High Court: एंट्रिक्स को मिली राहत, देवास मल्टीमीडिया को नहीं देने होंगे 4491.8 करोड़ रुपये

Mon, 29 Aug 2022 11:09 PM IST
अनुराग सक्सेना एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: अनुराग सक्सेना Updated Mon, 29 Aug 2022 11:09 PM IST
सार

एंट्रिक्स ने इंटरनेशनल चेंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा गठित मध्यस्थता अधिकरण के 14 सितंबर 2005 के मध्यस्थता फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस अधिकरण ने देवास मल्टीमीडिया प्राइवेट लिमिटेड के दावे को मंजूर करते हुए एंट्रिक्स को ब्याज समेत 56.2 करोड़ डॉलर चुकाने के लिए कहा था।

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High Court Relief to Antrix will not have to pay Rs 4491.8 crore to Dewas
इसरो - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को इसरो की वाणिज्यिक शाखा एंट्रिक्स को राहत देते हुए देवास मल्टीमीडिया को 4491.8 करोड़ रुपये चुकाने संबंधी एक मध्यस्थता फैसले को दरकिनार कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि यह मध्यस्थता फैसला, पेटेंट संबंधी धोखे और अवैध गतिविधियों से प्रभावित है और भारत के सार्वजनिक नीति के खिलाफ है। जस्टिस संजीव सचदेव की पीठ ने एंट्रिक्स की याचिका पर यह फैसला सुनाया।

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एंट्रिक्स ने इंटरनेशनल चेंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा गठित मध्यस्थता अधिकरण के 14 सितंबर 2005 के मध्यस्थता फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस अधिकरण ने देवास मल्टीमीडिया प्राइवेट लिमिटेड के दावे को मंजूर करते हुए एंट्रिक्स को ब्याज समेत 56.2 करोड़ डॉलर चुकाने के लिए कहा था।
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हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के 17 जनवरी 2022 के फैसले का जिक्र किया, जिसमें शीर्ष कोर्ट ने कहा था कि एंट्रिक्स और देवास के बीच वाणिज्यिक साझेदारी का बीज देवास द्वारा तैयार धोखे से बना था और इसलिए इस बीज से उत्पन्न पौधे का हर अंग, मसलन एग्रीमेंट, विवाद, मध्यस्थता आदि इस धोखे के जहर से संक्रमित थे।

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सुप्रीम कोर्ट ने ये दिया था आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि नैतिकता और न्याय की बुनियादी धारणाएं हमेशा धोखाधड़ी के साथ संघर्ष में होती हैं। कोर्ट ने कहा कि देवास और उसके शेयरधारकों को उनकी धोखाधड़ी से लाभ उठाने की अनुमति देना, एक और गलत संदेश देगा कि गलत तरीके अपना कर और भारत में 579 करोड़ रुपये का निवेश लाकर निवेशक दसियों हजार करोड़ रुपये कमा सकते हैं। वो भी तब जब इसमें से 488 करोड़ रुपये हेराफेरी से वापस भेज दिए गए।

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