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Delhi High Court: वरिष्ठ अधिकारी से बदसलूकी में दोषी हेडकांस्टेबल को राहत नहीं, जानें क्या है मामला

Mon, 31 Mar 2025 04:50 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Mon, 31 Mar 2025 04:50 AM IST
सार

कोर्ट ने अनुशासनात्मक प्राधिकरण द्वारा जारी आदेश और अपीलीय व संशोधन प्राधिकरण के बाद के आदेशों को बरकरार रखा। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति शालिंदर कौर की खंडपीठ ने कहा कि कोर्ट का हस्तक्षेप तभी संभव है जब प्रक्रिया में अनियमितता हो या निर्णय तर्कहीन हो।

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High Court refused to grant relief to the head constable convicted of misbehaving with his senior officer
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाईकोर्ट ने अपने वरिष्ठ अधिकारी से बदसलूकी के दोषी हेडकांस्टेबल को राहत देने से इन्कार कर दिया। हेडकांस्टेबल को अगस्त 2021 में अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई थी। कोर्ट ने अनुशासनात्मक प्राधिकरण द्वारा जारी आदेश और अपीलीय व संशोधन प्राधिकरण के बाद के आदेशों को बरकरार रखा। आदेश में उन्हें ड्यूटी पर लापरवाही, नशे में धुत हालत में आने और वरिष्ठ अधिकारियों व सहकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार के लिए दोषी ठहराया गया था।

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न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति शालिंदर कौर की खंडपीठ ने कहा कि कोर्ट का हस्तक्षेप तभी संभव है जब प्रक्रिया में अनियमितता हो या निर्णय तर्कहीन हो। कोर्ट ने पाया कि जांच निष्पक्ष थी। सबूतों में यह भी सामने आया कि याचिकाकर्ता ने सहकर्मी का मोबाइल छीनकर प्लेटफॉर्म की ओर फेंक दिया था और वरिष्ठ अधिकारी को धमकी दी थी। जानकारी के अनुसार देवेंद्र कुमार ने 10 मई 1998 को आरपीएफ में कांस्टेबल के रूप में सेवा शुरू की थी और बाद में हेड कांस्टेबल के पद पर पदोन्नत हुए। 15 फरवरी 2019 को उनकी तैनाती अंबाला कैंट स्टेशन पर हुई। घटना 23 मार्च 2021 की है, जब उनकी ड्यूटी शाम 4 से रात 12 बजे तक थी, लेकिन वह शाम 5:30 बजे ड्यूटी पर पहुंचे। आरोप है कि वह नशे की हालत में थे और अपने वरिष्ठ अधिकारी सब-इंस्पेक्टर पंकज और सहकर्मी हेड कांस्टेबल जगदेव सिंह के साथ दुर्व्यवहार किया।
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याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि जांच में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया। सजा अनुपातहीन है और उनके पिछले 20 साल के साफ रिकॉर्ड को नजरअंदाज किया गया। दूसरी ओर, प्रतिवादी के वकील ने कहा कि सभी प्रक्रियाएं आरपीएफ नियमों के अनुसार हुईं और याचिकाकर्ता को हर स्तर पर बचाव का मौका दिया गया।
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सुरक्षा बलों के लिए अनुशासनहीनता गंभीर अपराध
कोर्ट ने माना कि वरिष्ठ अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार और अनुशासनहीनता एक गंभीर अपराध है, जो आरपीएफ जैसे अनुशासित बल के मूल्यों के खिलाफ है। इसलिए, अनिवार्य सेवानिवृत्ति की सजा को अनुपातहीन नहीं माना जा सकता।


गिरफ्तारी का आधार न बताने पर आरोपी को मिली स्थायी जमानत
 हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी का आधार न बताने पर आरोपी को स्थायी जमानत दे दी। इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने आरोपी की जमानत रद्द कर दी थी। हाईकोर्ट ने कहा कि गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधारों की जानकारी मेमो के साथ दी जानी चाहिए। जस्टिस अनूप जयराम भंभानी की एकल पीठ ने आरोपी की याचिका को मंजूर करते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, गिरफ्तारी से पहले आधार मौजूद होने चाहिए और पुलिस डायरी में इनका रिकॉर्ड होना चाहिए। जांच अधिकारी के पास कोई कारण नहीं हो सकता कि वह गिरफ्तार व्यक्ति को लिखित में आधार न बताए। मामले के अनुसार याचिकाकर्ता पर एक अफगान नागरिक को नकली भारतीय पासपोर्ट, आधार और पैन कार्ड के जरिए स्पेन भेजने में मदद करने का आरोप था।

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