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हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को लगाई फटकार, कहा- क्या दशहरा बीतने के बाद पुतले बनाएंगे कारीगर

Mon, 23 Jul 2018 09:30 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 23 Jul 2018 09:30 AM IST
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High court rebuke Delhi government on land Allotment to artist for Vijayadashami festival

क्या दशहरा बीतने के बाद रावण के पुतले बनाएंगे कारीगर? यह सवाल पुतला बनाने वाले कारीगरों को एक साल बाद जमीन आवंटित न किए जाने पर फटकार लगाते हुए हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार व सरकारी एजेंसियों से पूछा है।  

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एमसीडी ने कारीगरों पर कार्रवाई करते हुए सितंबर 2017 में इन्हें पुरानी जगह से हटा दिया था। हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका पर सुनवाई शुरू की थी। कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति गीता मित्तल व न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा एक साल बीतने के बाद भी इन कारीगरों को जमीन नहीं दी गई है।
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यह कारीगर क्या दशहरा बीतने के बाद रावण व दुर्गा आदि के पुतले बनाएंगे। इस मामले में दक्षिण दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) के उपायुक्त पेश होकर जवाब दें। हाईकोर्ट ने कहा एक साल से यह याचिका विचाराधीन है लेकिन इसके बाद भी एसडीएमसी इस संबंध में पॉलिसी नहीं बना पाई है और न ही कारीगरों को जमीन आवंटित की गई है। कारीगर पुतले बनाने के लिए कच्चा माल खरीद चुके हैं। जितनी जल्दी हो कारीगरों को जमीन आवंटित की जाए ताकि वह पुतले बना सकें।
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सरकार की प्रस्तावित नीति के मुताबिक, कारीगर को काम शुरू करने से दो माह पहले पंजीकरण कराना होगा। जमीन का यह आवंटन केवल दो माह के लिए ही होगा। इसके बाद कारीगर को जमीन खाली करनी होगी। पंजीकरण के लिए कारीगर को 500 रुपये और जमीन के लिए पांच रुपये प्रति फुट प्रति माह के हिसाब से शुल्क देना होगा।

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