{"_id":"6abd0715f5f04f4d1506925e","slug":"high-court-notice-to-private-cab-operators-regarding-the-safety-of-female-passengers-delhi-ncr-news-c-340-1-del1011-157250-2026-09-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: महिला यात्रियों की सुरक्षा पर निजी कैब ऑपरेटरों, राज्य सरकारों को हाईकोर्ट का नोटिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: महिला यात्रियों की सुरक्षा पर निजी कैब ऑपरेटरों, राज्य सरकारों को हाईकोर्ट का नोटिस
विज्ञापन
दिल्ली हाईकोर्ट ने ओला, उबर और रैपिडो को महिला सुरक्षा पीआईएल पर नोटिस जारी कर 16 दिसंबर तक मांगा जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने एप-आधारित कैब और बाइक टैक्सी सेवाओं में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने संबंधी जनहित याचिका (पीआईएल) पर ओला, उबर, रैपिडो के साथ केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। न्यायालय ने इन पक्षों से जवाब दाखिल करने को कहा कि अगली सुनवाई 16 दिसंबर को निर्धारित की गई है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया।
सुनवाई में पीठ ने स्पष्ट कहा, हम टैक्सी एप के निजी ऑपरेटरों को जवाबदेह बनाना चाहते हैं। इसीलिए हम नोटिस जारी कर रहे हैं। याचिकाकर्ता आदित्य सहगल ने याचिका में कहा कि दिल्ली-एनसीआर में दो लाख से अधिक कैब संचालित हो रही हैं, लेकिन रात 8-9 बजे के बाद ड्राइवरों की जांच (नशे की स्थिति या अन्य अनियमितताओं की) नहीं होती। इससे महिला यात्रियों को खतरा बना रहता है। याचिका में ड्राइवर-वाहन के विवरण का एप पर मिलान, अनधिकृत बदलाव पर बिना जुर्माने के रद्दीकरण, 24 घंटे एसओएस कमांड सेंटर (बुकिंग विवरण, ड्राइवर आईडी, वाहन नंबर और लोकेशन पुलिस को साझा करने की व्यवस्था), रूट डायवर्जन पर स्वचालित अलर्ट, ड्राइवरों के लिए जेंडर सेंसिटिविटी ट्रेनिंग और सत्यापित महिला ड्राइवर पूल जैसी व्यवस्थाएं मांगी गई हैं। न्यायालय ने याचिका में उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से लिया और निजी ऑपरेटरों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया। अब संबंधित कंपनियों तथा सरकारों को अपना पक्ष रखना होगा।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने एप-आधारित कैब और बाइक टैक्सी सेवाओं में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने संबंधी जनहित याचिका (पीआईएल) पर ओला, उबर, रैपिडो के साथ केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। न्यायालय ने इन पक्षों से जवाब दाखिल करने को कहा कि अगली सुनवाई 16 दिसंबर को निर्धारित की गई है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया।
सुनवाई में पीठ ने स्पष्ट कहा, हम टैक्सी एप के निजी ऑपरेटरों को जवाबदेह बनाना चाहते हैं। इसीलिए हम नोटिस जारी कर रहे हैं। याचिकाकर्ता आदित्य सहगल ने याचिका में कहा कि दिल्ली-एनसीआर में दो लाख से अधिक कैब संचालित हो रही हैं, लेकिन रात 8-9 बजे के बाद ड्राइवरों की जांच (नशे की स्थिति या अन्य अनियमितताओं की) नहीं होती। इससे महिला यात्रियों को खतरा बना रहता है। याचिका में ड्राइवर-वाहन के विवरण का एप पर मिलान, अनधिकृत बदलाव पर बिना जुर्माने के रद्दीकरण, 24 घंटे एसओएस कमांड सेंटर (बुकिंग विवरण, ड्राइवर आईडी, वाहन नंबर और लोकेशन पुलिस को साझा करने की व्यवस्था), रूट डायवर्जन पर स्वचालित अलर्ट, ड्राइवरों के लिए जेंडर सेंसिटिविटी ट्रेनिंग और सत्यापित महिला ड्राइवर पूल जैसी व्यवस्थाएं मांगी गई हैं। न्यायालय ने याचिका में उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से लिया और निजी ऑपरेटरों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया। अब संबंधित कंपनियों तथा सरकारों को अपना पक्ष रखना होगा।
विज्ञापन