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Delhi NCR News: हाईकोर्ट ने 27 सप्ताह के गर्भपात के आदेश को किया संशोधित

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 04 Jul 2025 12:44 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता की 27 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि इस चरण में गर्भपात भ्रूण हत्या के समान होगा। एम्स के मेडिकल बोर्ड की राय के आधार पर कोर्ट ने पीड़िता को गर्भावस्था को 4-6 सप्ताह तक जारी रखने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति अनीश दयाल की खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के 30 जून के आदेश को संशोधित करते हुए कहा कि 16 वर्षीय पीड़िता और उसके बच्चे के हित में गर्भावस्था को जारी रखना उचित होगा। एम्स की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया।
अदालत ने पीड़िता और उसकी मां के वकील को समझाने को कहा कि प्रसव के बाद यदि वे चाहें तो शिशु को गोद देने का विकल्प चुन सकते हैं। चर्चा के बाद वकील ने बताया कि पीड़िता ने गर्भावस्था जारी रखने पर सहमति जताई है। एम्स के मेडिकल बोर्ड के दो डॉक्टरों ने कोर्ट को बताया कि इस समय गर्भपात करने से समयपूर्व प्रसव होगा, जिसमें बच्चा जीवित रहेगा और यह भ्रूण हत्या के समान होगा, जो केवल चिकित्सकीय समस्याओं के मामले में ही उचित है। डॉक्टरों ने कहा कि गर्भपात से पीड़िता के भविष्य के प्रजनन स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और 34 सप्ताह की गर्भावस्था में प्रक्रिया करना अधिक सुरक्षित होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के गर्भपात की अनुमति देने से अन्य लोग भी इसी तरह की मांग कर सकते हैं। कोर्ट ने स्थिति को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, अप्रिय और नाजुक बताते हुए कहा कि उसे नाबालिग लड़की और उसके अजन्मे बच्चे दोनों के कल्याण को सुनिश्चित करना है।
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खंडपीठ ने आदेश दिया कि लड़की को पूरी गर्भावस्था और प्रसव तक एम्स में भर्ती रखा जाए और प्रसव के बाद जब तक वह स्वस्थ महसूस न करे, तब तक उसे अस्पताल में रहने की अनुमति दी जाए। कोर्ट ने एम्स को अगले पांच वर्षों तक लड़की और बच्चे को मुफ्त चिकित्सा उपचार प्रदान करने का भी आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्तूबर को होगी।
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