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Tax on Air Purifiers: एयर प्यूरीफायर पर GST कम करने की याचिका पर सुनवाई, HC ने केंद्र से 10 दिन में मांगा जवाब
Fri, 26 Dec 2025 12:15 PM IST
विजय पुंडीर
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Fri, 26 Dec 2025 12:15 PM IST
सार
वर्तमान में एयर प्यूरीफायर पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है। याचिका में इसे मेडिकल डिवाइस मानकर जीएसटी को 5 प्रतिशत स्लैब में लाने की मांग की गई है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच एयर प्यूरीफायर को 'मेडिकल डिवाइस' घोषित कर उस पर जीएसटी 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने की जनहित याचिका (पीआईएल) का केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में कड़ा विरोध किया है। केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एन. वेंकटरमन ने कहा कि जीएसटी काउंसिल की प्रक्रिया को बाइपास कर अदालत से ऐसा निर्देश देना 'पैंडोरा बॉक्स' खोल देगा, जिससे अन्य वस्तुओं पर भी इसी तरह की छूट मांगने वाली याचिकाओं की बाढ़ आ जाएगी।
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याचिका अधिवक्ता कपिल मदान ने दाखिल की है, जिसमें तर्क दिया गया है कि दिल्ली की गंभीर प्रदूषण समस्या में एयर प्यूरीफायर अब विलासिता की वस्तु नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए आवश्यक उपकरण बन गए हैं। 2020 की एक अधिसूचना के अनुसार, ये 'मेडिकल डिवाइस' की श्रेणी में आते हैं और इन पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगना चाहिए, न कि 18 प्रतिशत। याचिकाकर्ता ने कहा कि गलत श्रेणी में कर लगाना मनमाना और असंवैधानिक है, जिससे आम आदमी के लिए ये उपकरण महंगे हो जाते हैं।
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जीएसटी काउंसिल संवैधानिक निकाय- केंद्र
केंद्र की दलील है कि जीएसटी काउंसिल एक संवैधानिक निकाय है, जिसमें सभी राज्य और केंद्र शामिल होते हैं। कोई निर्णय लेने के लिए भौतिक बैठक अनिवार्य है और इसे रिट याचिका से नहीं टाला जा सकता। एएसजी ने कहा, संसदीय समिति ने सिफारिश की है, इसे विचार किया जाएगा, लेकिन प्रक्रिया है। हम यह नहीं कह रहे कि छूट दी जाएगी या नहीं, लेकिन संवैधानिक मुद्दा शामिल है।
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अदालत ने 10 दिन में मांगा विस्तृत जवाब
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (न्यायमूर्ति विकास महाजन और न्यायमूर्ति विनोद कुमार) ने प्रदूषण की गंभीरता को देखते हुए चिंता जताई और पूछा कि 10-15 हजार रुपये वाले एयर प्यूरीफायर को आम आदमी की पहुंच में लाने के लिए जीएसटी क्यों नहीं घटाया जा सकता? कोर्ट ने कहा, "सबको चिंता है इस मुद्दे की। हालांकि, केंद्र को विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया गया है। याचिकाकर्ता को भी जवाब दाखिल करने की छूट दी गई। मामले की अगली सुनवाई 9 जनवरी 2026 को होगी।
इससे पहले बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी में खराब होती वायु गुणवत्ता को देखते हुए जीएसटी काउंसिल को निर्देश दिया था कि वह जल्द से जल्द बैठक कर एयर प्यूरीफायर पर लगने वाले जीएसटी को कम या पूरी तरह खत्म करने पर विचार करें। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की बेंच ने एक जनहित याचिका (पीआईएल) की सुनवाई में यह निर्देश दिया।
कोर्ट ने पहले ही दिन सरकार पर नाराजगी जताई थी कि इमरजेंसी स्थिति में जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 'बहुत खराब' श्रेणी में है, तब भी एयर प्यूरीफायर पर टैक्स छूट देने के लिए कुछ नहीं किया जा रहा। बेंच ने कहा कि अगर नागरिकों को साफ हवा नहीं दे सकते, तो कम से कम एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी कम करें। वर्तमान में एयर प्यूरीफायर पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है। याचिका में इसे मेडिकल डिवाइस मानकर जीएसटी को 5 प्रतिशत स्लैब में लाने की मांग की गई है।
वकील कपिल मदान की दाखिल याचिका में कहा कि दिल्ली में गंभीर प्रदूषण की अत्यधिक इमरजेंसी संकट स्थिति में एयर प्यूरीफायर को लग्जरी आइटम नहीं माना जा सकता। साफ इनडोर हवा स्वास्थ्य और जीवित रहने के लिए आवश्यक हो गई है। याचिका में तर्क दिया गया कि एयर प्यूरीफायर पर सबसे ऊंची स्लैब में जीएसटी लगाना इसे आर्थिक रूप से बड़ी आबादी के लिए पहुंच से बाहर कर देता है, जो मनमाना और असंवैधानिक है।