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दिल्ली: उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत का मामला, दोषी दो पुलिस अधिकारियों को HC ने दी जमानत

Sat, 23 Sep 2023 03:06 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Sat, 23 Sep 2023 03:06 PM IST
सार

न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा ने जमानत प्रदान करते हुए कहा कि दोषी भदौरिया और प्रसाद दोनों दोषी चार साल से अधिक की सजा काट चुके हैं। कोर्ट ने कहा उम्रकैद की सजा के मामलों के अलावा अन्य मामलों के लिए वास्तविक सजा का 50 प्रतिशत का व्यापक पैरामीटर जमानत देने का आधार हो सकता है।

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High Court grants bail to two Police officers convicted in the custodial death of Unnao Misdeed victim father
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media

विस्तार

उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के लिए दोषी उत्तर प्रदेश पुलिस के दो अधिकारियों अशोक सिंह भदौरिया और कामता प्रसाद को जमानत प्रदान कर दी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर, भदौरिया, प्रसाद और अन्य को इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने मार्च 2020 में गैर इरादतन हत्या सहित कई अपराधों के लिए दोषी ठहराते हुए सजा प्रदान की थी। उन्हें 10 वर्ष के कठोर कारावास की सज़ा दी गई थी।

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न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा ने जमानत प्रदान करते हुए कहा कि दोषी भदौरिया और प्रसाद दोनों दोषी चार साल से अधिक की सजा काट चुके हैं। कोर्ट ने कहा उम्रकैद की सजा के मामलों के अलावा अन्य मामलों के लिए वास्तविक सजा का 50 प्रतिशत का व्यापक पैरामीटर जमानत देने का आधार हो सकता है। उन्होंने कहा रिकॉर्ड के अनुसार मामले में एक अपील 31 जुलाई 2020 को स्वीकार की गई थी, हालांकि, अदालत इस पर सुनवाई नहीं कर पाई है। यह भी रिकॉर्ड की बात है कि अपीलकर्ताओं ने समय-समय पर उन्हें दी गई अंतरिम जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं किया।

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अदालत ने उनकी जमानत 50-50 हजार के नीति मुचलके व एक-एक अन्य जमानत राशि पर स्वीकार की है। 11 जून से 20 जून 2017 के बीच सेंगर द्वारा नाबालिग उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता का अपहरण किया गया और उसके साथ दुष्कर्म किया गया। फिर उसे 60,000 में बेच दिया गया, जिसके बाद उसे माखी पुलिस स्टेशन में बरामद किया गया। इसके बाद सेंगर के निर्देशानुसार पुलिस अधिकारियों द्वारा पीड़िता को लगातार धमकाया गया और बोलने के खिलाफ चेतावनी दी गई।

नौ अप्रैल 2018 को दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत हो गई। आरोप है कि मामले के कुछ आरोपियों से झगड़े के बाद उन पर हमला किया गया। आरोप था कि उसे माखी थाने ले जाया गया और अवैध असलहा रखने के आरोप में फंसा दिया गया। इसके बाद उन्हें हिरासत में रिमांड पर भेज दिया गया जिसके दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
मामले में कुल सात लोगों को दोषी ठहराया गया था।

उन्नाव दुष्कर्म मामले ने राष्ट्रीय ध्यान तब आकर्षित किया जब बिना नंबर प्लेट वाली एक लॉरी ने उस कार को टक्कर मार दी जिसमें पीड़िता यात्रा कर रही थी। पीड़िता और उसके वकील गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि उसकी दो चाचियों की मृत्यु हो गई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सभी चार मामलों की सुनवाई लखनऊ से दिल्ली स्थानांतरित कर दी और आदेश दिया कि इसे दिन-प्रतिदिन के आधार पर चलाया जाए और 45 दिनों के भीतर पूरा किया जाए।

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